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News in short
- पुलिस मुठभेड़ और फायरिंग मामले में जेल में बंद आरोपी को राहत मिली है।
- पुलिस पर कई राउंड फायरिंग का दावा है, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ है।
- आरोपी भोला गुर्जर के पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ था।
- एक साल से अधिक समय से जेल में आरोपी बंद था।
- जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने जांच को कमजोर मानकर जमानत मंजूर कर दी है।
News In Detail
पुलिस मुठभेड़ और फायरिंग जैसे गंभीर आरोपों में जेल में बंद आरोपी को ग्वालियर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि कमजोर जांच और ट्रायल में देरी के बीच लंबे समय तक जेल में रखना आजादी के मूल सिद्धांत के खिलाफ है। इसी आधार पर भोला गुर्जर को शर्तों के साथ जमानत दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 20 और 21 फरवरी 2025 की दरम्यानी रात का है। भिंड जिले के उमरी थाना क्षेत्र में पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी इलाके में संदिग्ध हालत में घूम रहे हैं।
सूचना के बाद पुलिस ने तीन अलग-अलग टीमें बनाकर इलाके में घेराबंदी शुरू की। इसी दौरान एक नीली रंग की हुंडई i10 कार को रोकने की कोशिश की गई। कार सवारों ने भागने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार कार एक गड्ढे में फंस गई। इसके बाद आरोपी पैदल भागने लगे।
पुलिस का दावा और मुठभेड़ की कहानी
पुलिस का कहना था कि भागते समय आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। इस कथित मुठभेड़ में दो आरोपियों के पैरों में गोली लगने की बात कही गई। इनमें भोला गुर्जर और अनुज राजावत शामिल थे। तीसरा आरोपी गजेंद्र भदौरिया कार से गिरने के कारण घायल बताया गया।
बचाव पक्ष ने जांच को बताया खोखला
भोला गुर्जर की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट में जोरदार दलील दी। कहा कि अभियोजन की कहानी में आरोपी के खिलाफ कोई स्पष्ट भूमिका तय नहीं की गई है। यह भी कहा गया कि पुलिस पर कई राउंड फायरिंग का दावा किया गया। हैरानी की बात यह है कि किसी भी पुलिसकर्मी को खरोंच तक नहीं आई।
इतना ही नहीं भोला गुर्जर के पास से न तो कोई हथियार बरामद हुआ और न ही कोई कारतूस। सभी बरामदगी सह आरोपी गजेंद्र भदौरिया से दिखाई गई है। इससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
लंबी जेल और ट्रायल में देरी बना बड़ा मुद्दा
बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट को बताया कि भोला गुर्जर 20 फरवरी 2025 से लगातार जेल में बंद है। जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। इसके बावजूद ट्रायल के जल्द खत्म होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है।
ग्वालियर हाईकोर्ट से मिली जमानत
ग्वालियर हाईकोर्ट के जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने मामले की सुनवाई की। कहा कि यदि ट्रायल में देरी हो रही हो और आरोपी के खिलाफ जांच कमजोर नजर आ रही हो, तो लंबे समय तक जेल में रखना प्री-ट्रायल सजा के समान है। ये व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने भोला गुर्जर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी है।
साथ ही यह भी शर्त रखी गई है कि आरोपी हर 15 दिन में संबंधित थाने में हाजिरी लगाएगा। किसी भी गवाह को न तो डराएगा और न ही प्रभावित करेगा। किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होगा और बिना अनुमति भारत से बाहर नहीं जाएगा। यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ तो जमानत स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
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