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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अपनी झीलों के साथ-साथ अपनी गहरी आध्यात्मिक जड़ों के लिए भी जानी जाती है। जैसे-जैसे 15 फरवरी 2026 की महाशिवरात्रि नजदीक आ रही है, शहर के शिवालयों में रौनक बढ़ने लगी है।
इस बार की शिवरात्रि बेहद खास है क्योंकि भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए उत्साहित हैं। भोपाल में तीन ऐसे प्रमुख मंदिर हैं, जहां शिवलिंग की स्थापना इंसानों ने नहीं की, बल्कि वे स्वयं प्रकट हुए हैं। नेवरी के मनकामेश्वर, सोमवारा के बड़ वाले महादेव और लालघाटी का गुफा मंदिर आस्था के सबसे बड़े केंद्र हैं।
इन मंदिरों का इतिहास सदियों पुराना है और यहां की मान्यताएं भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। आइए, इस महाशिवरात्रि से पहले इन प्राचीन शिवधामों की अद्भुत कहानी जानें।
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नेवरी स्थित मनकामेश्वर महादेव
नेवरी महादेव मंदिर भोपाल के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक, ये दिव्य शिवलिंग 18वीं सदी का है। नवाबी शासन के दौरान राजा किशन राव अपनी जमीन पर खुदाई करवा रहे थे।
उसी समय उन्हें भूमि के भीतर दबा हुआ यह विशाल शिवलिंग दिखाई दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शिवलिंग एक ही अखंड पत्थर से बना है। इसे जमीन से बाहर निकालने की कोशिश की गई। पर यह पूरी तरह नहीं निकला।
आज भी शिवलिंग का केवल 1.5 फीट हिस्सा ही बाहर दिखाई देता है। बाकी का 4-5 फीट हिस्सा आज भी धरती की गहराई में समाया हुआ है। पुरातत्व विभाग ने भी बोर्ड लगाकर इसे 18वीं सदी का प्राचीन स्मारक घोषित किया है।
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बड़ वाले महादेव
सोमवारा क्षेत्र के कायस्थपुरा में स्थित बड़ वाले महादेव की महिमा निराली है। यहां महादेव एक विशाल बरगद (वट) वृक्ष के नीचे विराजमान हैं।
पुरानी मान्यताओं के मुताबिक, यहां शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था जिसे कुछ संतों ने देखा था। शुरुआत में यहां एक छोटी मढ़िया बनाई गई थी जहां साधु-संत पूजा करते थे।
धीरे-धीरे कायस्थ समाज और स्थानीय लोगों ने मंदिर का भव्य निर्माण कराया। अब यहां मंदिर के नवीनीकरण का कार्य बड़े स्तर पर चल रहा है।
महाशिवरात्रि के दिन यहां से भोपाल की सबसे भव्य 'शिव बारात' निकाली जाती है। इस बारात में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और झांकियां शामिल होती हैं।
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लालघाटी का गुफा मंदिर
लालघाटी की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित गुफा मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 77 साल पुराना बताया जाता है।
साल 1948 में महंत नारायण दास त्यागी उज्जैन से भोपाल आए थे। पहाड़ियों पर भ्रमण के दौरान उन्हें एक प्राकृतिक गुफा में शिवलिंग दिखाई दिया। चट्टानों के बीच दबे इस शिवलिंग को बाहर निकालकर पूजा-अर्चना शुरू की गई।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता शिवलिंग के पास बहने वाली प्राकृतिक जलधारा है। गुफा के भीतर से पानी झरने की तरह शिवलिंग के समीप बहता रहता है। साल 1980 में इस मंदिर का पुनरुद्धार हुआ और आज यह एक बड़ा धार्मिक केंद्र है।
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महाशिवरात्रि 2026 की विशेष तैयारियां
इस साल 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का त्योहार पूरे भोपाल में धूमधाम से मनाया जाएगा। इन तीनों स्वयंभू मंदिरों में विशेष अभिषेक और श्रृंगार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
नेवरी और गुफा मंदिर में विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा। प्रशासन ने भी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और पार्किंग के कड़े इंतजाम किए हैं।
भक्तों का मानना है कि इन स्वयंभू शिवलिंगों के दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन के सोमवार और शिवरात्रि पर यहां पैर रखने की भी जगह नहीं होती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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