NGT ने BMC के कामकाज पर उठाए सवाल, पूछा- 2024-25 में क्यों अटका काम
Bhopal Pollution Control Board: भोपाल की हवा दिन-ब-दिन सांस लेने लायक नहीं बच रही है और शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे खतरनाक माहौल में हवा को सांस लेने लायक बनाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाला करोड़ों रुपयों का बजट बिना इस्तेमाल हुए ही धूल फांक रहा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) की सेंट्रल बेंच ने जब भोपाल नगर निगम के खातों की पड़ताल की। तो सरकारी सिस्टम की एक ऐसी अनदेखी सामने आई जिसने ट्रिब्यूनल के जजों के भी होश उड़ा दिए।
हवा सुधारने के नाम पर मिले पैसों का क्या हुआ। 2023 से 2026 के बीच बजट में क्या खेल हुआ और NGT की फटकार के बाद अब नगर निगम के अफसरों में क्यों हड़कंप मचा है। आइए समझते हैं इस पूरी खबर की हर एक परत।
भोपाल की हवा और सरकारी बजट का सच
भोपाल शहर की हवा को साफ और सेहतमंद बनाने के लिए केंद्र सरकार हर साल करोड़ों रुपए का बजट देती है। लेकिन जमीनी स्तर पर इस फंड का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT की सेंट्रल बेंच ने इस मुद्दे पर बहुत कड़ा रुख अपनाया है।
NGT ने भोपाल नगर निगम से सीधा सवाल पूछा है कि आखिर क्लीन एयर फंड का बड़ा हिस्सा बिना खर्च किए क्यों पड़ा रहा। 20 अगस्त 2026 को दिए अपने आदेश में ट्रिब्यूनल ने BMC के कामकाज पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
NCAP फंड का 21 फीसदी ही हुआ इस्तेमाल
पर्यावरण मंत्रालय देश के 131 शहरों में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) चला रहा है। इसमें भोपाल शहर भी शामिल है जहां PM 10 और PM 2.5 का स्तर लगातार चिंताजनक रहता है। NGT की बेंच में शामिल जुडिशल मेंबर शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने इस पर चिंता जताई है।
ट्रिब्यूनल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024-25 में आवंटित कुल फंड में से सिर्फ 12.44 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह पूरे बजट का केवल 21.18 फीसदी हिस्सा है। इतने कम बजट इस्तेमाल से शहर में धूल और प्रदूषण कम करने के सारे प्रोजेक्ट्स लटक गए हैं।
2023 से 2026 तक का ट्रैक रिकॉर्ड खराब
BMC द्वारा पेश की गई खुद की रिपोर्ट में कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023-24 में फंड रिलीज ही नहीं हुआ। वहीं साल 2025-26 के दौरान प्रदूषण नियंत्रण का कोई भी नया काम शुरू नहीं किया गया।
पिटीशनर भोपाल सिटिजंस फोरम के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने ट्रिब्यूनल में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जो पैसा खर्च हुआ भी, वह हवा साफ करने के बजाए दूसरे कामों में लगा दिया गया। वहीं दूसरे पिटीशनर रशीद नूर खान के वकील हर्षवर्धन तिवारी ने भी इस बात का समर्थन किया।
BMC का बचाव और NGT की फटकार
नगर निगम (Bhopal Municipal Corporation) की तरफ से पेश वकील ओम शंकर श्रीवास्तव ने दावा किया कि मिला हुआ पूरा बजट सही तरीके से खर्च किया गया है। लेकिन NGT के मेंबर्स इस जवाब से बिल्कुल संतुष्ट नहीं दिखे। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि रिपोर्ट में ये जानकारी ही गायब है कि पैसा किस नियम के तहत कहां खर्च हुआ।
National Green Tribunal NGTने अब भोपाल नगर निगम और मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (MPPCB) को सख्त निर्देश दिए हैं। दोनों विभागों को तीन हफ्ते के भीतर साफ और सही जानकारी के साथ रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इस बड़े केस की अगली सुनवाई अब 21 सितंबर 2026 को तय की गई है।
FAQ
- NGT ने भोपाल नगर निगम से क्या सवाल पूछा है?
NGT ने BMC से पूछा है कि NCAP के तहत मिले क्लीन एयर फंड का केवल 21.18% हिस्सा ही क्यों खर्च किया गया और बाकी पैसा बिना इस्तेमाल के क्यों पड़ा रहा। - भोपाल में NCAP प्रोजेक्ट के तहत कितना फंड खर्च हुआ?
साल 2024-25 के दौरान भोपाल में 58.7 करोड़ के कुल बजट में से सिर्फ 12.44 करोड़ रुपये (21.18%) ही खर्च किए गए, जो कि हवा की गुणवत्ता सुधारने में नाकाफी हैं। - इस मामले में अगला कदम क्या है और अगली सुनवाई कब होगी?
NGT ने BMC और MPPCB को 3 हफ्ते के भीतर नियम और खर्च का पूरा ब्योरा पेश करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी।
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