भोपाल में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, दुकान संचालकों को दिखाने होंगे अनुमति पत्र
Aman Vaishnav | Sept 10, 2026, 13:00 IST
फिर अटका भोपाल का मास्टर प्लान
भोपाल के रिहायशी और लो-डेंसिटी इलाकों में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मॉल, होटल और दुकान संचालकों को अनुमति पत्र दिखाने होंगे और नगर निगम इनकी जांच करेगा।
भोपाल के लो-डेंसिटी और आवासीय इलाकों में अवैध निर्माण का मामला गहराता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल और व्यावसायिक संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं। इन्हें अपने वैधानिक अनुमति पत्र नगर निगम को दिखाने होंगे। इसके बाद निगम कानून के मुताबिक इनकी जांच करेगा।
दूसरी तरफ शहर के लो-डेंसिटी क्षेत्रों में तय सीमा से दस गुना तक ज्यादा निर्माण हो चुका है। नगर निगम लगातार नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई कर रहा है।
इसी बीच अफसर मास्टर प्लान के जरिए इन निर्माणों को नियमित करने का रास्ता खोज रहे हैं। इस वजह से मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।
बता दें कि शहर के कुछ इलाके 2005 के मास्टर प्लान में लो-डेंसिटी घोषित हैं। इनमें बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ और मिंडोरी शामिल हैं। यहां घनत्व सीमा 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर तय है। निर्माण के लिए कम से कम 10 हजार वर्गफीट जमीन जरूरी है।
यहां एफएआर (FAR – Floor Area Ratio) सिर्फ 0.06 तय है। यानी 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर केवल 600 वर्गफीट निर्माण की अनुमति है। कुल जमीन के महज छह फीसदी हिस्से पर ही निर्माण हो सकता है। इससे ज्यादा कुछ भी अवैध माना जाएगा।
जमीनी हकीकत नियमों से बिल्कुल अलग है। कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास बनी वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट तक के बंगले बन गए। यह मामला अब कोर्ट में है।
चार इमली और श्यामला हिल्स पर भी अवैध बंगले बन गए हैं। नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी जोन में 12 बड़ी कॉलोनियां खड़ी हो गईं। मिंडोरी क्षेत्र में बड़े मकान और रेस्टोरेंट तक विकसित हो चुके हैं।
केरवा डेम से लगी जमीन भी लो-डेंसिटी घोषित है। लेकिन इस तरफ जाने वाली सड़क किनारे अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। यह दिखाता है कि नियमों की अनदेखी कितने बड़े स्तर पर हुई है।
आवासीय क्षेत्रों में चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की वैधानिकता अब नगर निगम भोपाल जांचेगा। सोमवार को हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़ी 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
मंगलवार को दस नंबर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब कानून के अनुसार जांचने के निर्देश दिए। साथ ही कारण सहित आदेश पारित करने को कहा गया।
दूसरी ओर मकान तोड़ने से जुड़े मामले में दलीलें अभी पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने तोड़फोड़ पर रोक बरकरार रखी है। अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।
जिन इलाकों में तय सीमा से कहीं ज्यादा निर्माण हो चुका है, वहां अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने की कोशिश हो रही है। नगर निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई से बचने के लिए दोनों पक्ष मास्टर प्लान लागू करने की मांग कर रहे हैं।
पिछले पंद्रह दिनों से टीएंडसीपी (TCP – Town and Country Planning) और नगरीय प्रशासन के अफसर लगातार बैठकें कर रहे हैं। इसी वजह से मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।
हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में बड़ा कदम है। अब अनुमति के नाम पर बहानेबाजी नहीं चलेगी।
रहवासी संगठन ने ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें भी उठाई हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से इन समस्याओं को झेल रहे हैं। लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।
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दूसरी तरफ शहर के लो-डेंसिटी क्षेत्रों में तय सीमा से दस गुना तक ज्यादा निर्माण हो चुका है। नगर निगम लगातार नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई कर रहा है।
इसी बीच अफसर मास्टर प्लान के जरिए इन निर्माणों को नियमित करने का रास्ता खोज रहे हैं। इस वजह से मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।
लो-डेंसिटी के नियम क्या हैं
यहां एफएआर (FAR – Floor Area Ratio) सिर्फ 0.06 तय है। यानी 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर केवल 600 वर्गफीट निर्माण की अनुमति है। कुल जमीन के महज छह फीसदी हिस्से पर ही निर्माण हो सकता है। इससे ज्यादा कुछ भी अवैध माना जाएगा।
कहां-कहां अवैध निर्माण
चार इमली और श्यामला हिल्स पर भी अवैध बंगले बन गए हैं। नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी जोन में 12 बड़ी कॉलोनियां खड़ी हो गईं। मिंडोरी क्षेत्र में बड़े मकान और रेस्टोरेंट तक विकसित हो चुके हैं।
केरवा डेम से लगी जमीन भी लो-डेंसिटी घोषित है। लेकिन इस तरफ जाने वाली सड़क किनारे अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। यह दिखाता है कि नियमों की अनदेखी कितने बड़े स्तर पर हुई है।
कोर्ट ने क्या निर्देश दिया
मंगलवार को दस नंबर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब कानून के अनुसार जांचने के निर्देश दिए। साथ ही कारण सहित आदेश पारित करने को कहा गया।
दूसरी ओर मकान तोड़ने से जुड़े मामले में दलीलें अभी पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने तोड़फोड़ पर रोक बरकरार रखी है। अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।
मास्टर प्लान से रास्ता तलाश
पिछले पंद्रह दिनों से टीएंडसीपी (TCP – Town and Country Planning) और नगरीय प्रशासन के अफसर लगातार बैठकें कर रहे हैं। इसी वजह से मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।
रहवासियों की प्रतिक्रिया
रहवासी संगठन ने ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें भी उठाई हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से इन समस्याओं को झेल रहे हैं। लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।
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