भोपाल के काटजू अस्पताल में होगा हाईटेक इलाज, महिलाओं को एक ही जगह मिलेगा निसंतानता और पीसीओएस का इलाज
Aman Vaishnav | Mar 15, 2026, 08:13 IST
bhopal katju hospital new infertility center womens health services
राजधानी भोपाल के कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में 20 मार्च से विशेष सेवाएं शुरू हो रही हैं। अब यहां महिलाओं को बांझपन और पीसीओएस जैसी समस्याओं का बेहतरीन इलाज मिल सकेगा। एक ही छत के नीचे गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज संभव हो पाएगा।
राजधानी के कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में 20 मार्च से महिलाओं के लिए खास स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो रही हैं। अब महिलाएं यहां इन्फर्टिलिटी (निसंतानता), पीसीओएस, सर्वाइकल कैंसर, मोटापा, मेनोपॉज और अनियमित मासिक धर्म जैसी समस्याओं का इलाज एक ही जगह करवा सकेंगी। अस्पताल में एक नया स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनाकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी खोला गया है। यहां इन सभी समस्याओं का इलाज मिलेगा।
काटजू अस्पताल भोपाल में हाईटेक सेंटर करीब दो करोड़ रुपए की लागत से बना है। साथ ही यहां महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए कई अहम सुविधाएं मिल सकेंगी। यहां जांच से लेकर इलाज तक सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं के कई स्वास्थ्य मुद्दों का इलाज किया जाएगा।
जैसे मेनोपॉज, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस, फाइब्रॉइड्स और इन्फर्टिलिटी (बांझपन)। खासतौर पर, आईयूआई जैसे आधुनिक इन्फर्टिलिटी उपचार भी इस सेंटर में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए वीआईए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे समय रहते इलाज कर के महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी।
सरकारी अस्पतालों में निःसंतानता का इलाज 40 हजार से 80 हजार रुपए तक में हो सकता है। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में यह इलाज 3 लाख रुपए तक का पड़ता है। भारत में निःसंतानता की समस्या करीब 10-14% लोगों को प्रभावित करती है। इसका मुख्य कारण खराब जीवनशैली और देर से शादी करना है।
महिलाओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी कई खतरनाक बीमारियां हैं जिनसे वे जूझ रही हैं, खासकर कैंसर और पीसीओडी जैसे रोगों से।
सर्वाइकल कैंसर: महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। भोपाल इस मामले में देशभर में 15वें स्थान पर है। यह कैंसर महिलाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर: महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। भोपाल में यह देश में 8वें स्थान पर है। एक लाख महिलाओं में से 33.9 महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है।
गर्भाशय में गांठ (फाइब्रॉइड): 30-50% महिलाओं को जीवनभर में कभी न कभी ये समस्या होती है। यह समस्या खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद आम हो जाती है।
पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज): 10-27% महिलाओं को प्रभावित करता है। इस कारण महिलाओं को अनियमित पीरियड्स और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इन बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए जागरूकता और सही समय पर जांच जरूरी है।
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महिलाओं के लिए कई बेहतर सुविधाएं
जैसे मेनोपॉज, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस, फाइब्रॉइड्स और इन्फर्टिलिटी (बांझपन)। खासतौर पर, आईयूआई जैसे आधुनिक इन्फर्टिलिटी उपचार भी इस सेंटर में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए वीआईए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे समय रहते इलाज कर के महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी।
प्रदेश का पहला इन्फर्टिलिटी सेंटर काटजू अस्पताल में प्रदेश का पहला इन्फर्टिलिटी सेंटर खुलने जा रहा है। इसके अलावा, एम्स में भी एक इन्फर्टिलिटी क्लीनिक है। अब एम्स में आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के जरिए भी इलाज शुरू होने वाला है।
सरकारी अस्पतालों में निसंतानता का इलाज
ये जानना जरूरी...
सर्वाइकल कैंसर: महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। भोपाल इस मामले में देशभर में 15वें स्थान पर है। यह कैंसर महिलाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर: महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। भोपाल में यह देश में 8वें स्थान पर है। एक लाख महिलाओं में से 33.9 महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है।
गर्भाशय में गांठ (फाइब्रॉइड): 30-50% महिलाओं को जीवनभर में कभी न कभी ये समस्या होती है। यह समस्या खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद आम हो जाती है।
पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज): 10-27% महिलाओं को प्रभावित करता है। इस कारण महिलाओं को अनियमित पीरियड्स और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इन बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए जागरूकता और सही समय पर जांच जरूरी है।
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