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BHOPAL. भोपाल में आयोजित किसान महाचौपाल में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। मंच पर एकजुटता दिखी और भाषण में धार थी। हालांकि, उनके जाते-जाते कई सवाल हवा में रह गए। टारगेट 50 हजार था या 70 हजार? भीड़ 20 हजार आई या 35 हजार? खाली कुर्सियां, कम होर्डिंग और कुछ नेताओं का नाम न लिए जाने की चर्चा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
कांग्रेस ने इसे किसान महाचौपाल के रूप में प्रस्तुत किया। राहुल गांधी ने किसानों के मुद्दों और केंद्र की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। प्रदेश नेतृत्व ने इसे शक्ति प्रदर्शन और संगठनात्मक एकजुटता का संदेश बताया। हालांकि, कार्यक्रम के बाद चर्चा भाषण से ज्यादा भीड़ और व्यवस्थाओं पर केंद्रित रही।
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टारगेट पर अलग-अलग दावे
कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच आंकड़ों को लेकर भ्रम था। एक धड़ा कहता है कि टारगेट 50 हजार था, पहुंचे लगभग 20 हजार। दूसरे का दावा था कि 70 हजार का लक्ष्य था, 30-35 हजार लोग आए। सूत्रों का आरोप था कि सिर्फ 10 हजार कुर्सियां बुक थीं। अब सवाल उठ रहा है कि वास्तविक लक्ष्य क्या था और उपलब्धि कितनी?
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खाली कुर्सियां: तस्वीर बनाम दलील
कार्यक्रम स्थल पर कई कुर्सियां खाली दिखीं। विपक्ष ने इसे असफल आयोजन बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि तेज धूप और टेंट न होने से लोग साइड में खड़े रहे। उनका दावा था कि भीड़ मौजूद थी, लेकिन सभी सीटों पर बैठना संभव नहीं था। मंच से कुछ नेताओं का नाम न लिया जाने पर चर्चा हुई। किसान मोर्चा के धर्मेंद्र चौहान ने सफाई दी कि सभी मोर्चों के नाम लेने पड़ते। फिर भी राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा हो रही है।
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जीतू पटवारी के होर्डिंग कम क्यों?
राजधानी भोपाल में कार्यक्रम था, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के होर्डिंग अपेक्षाकृत अन्य नेताओं के कम दिखे। इसको लेकर संगठन के भीतर समन्वय पर सवाल उठे। कुछ राजनीतिक चर्चाओं में यहां तक कहा गया कि कहीं अंदरूनी खींचतान तो असर नहीं डाल रही? हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
एंट्री पास और व्यवस्थाओं पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक एयरपोर्ट पर भी सीमित कार्यकर्ता पहुंचे। कार्यक्रम स्थल पर पास को लेकर भ्रम की स्थिति रही। करीब 300 मंच पास बने थे, जिनमें से 28 लोग अनुपस्थित रहे। मंच पर अनुशासन दिखा, लेकिन बाहर कई कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस करते नजर आए।
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पत्रकार से बदसलूकी और भाजपा का पलटवार
खाली कुर्सियों का वीडियो बनाने के दौरान एक पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की का मामला सामने आया। पत्रकार संगठनों ने इस पर डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। इस बीच भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रबंधक आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है।
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की असफल यात्रा में खाली कुर्सियों की सच्चाई दिखाने पर पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने इसे कांग्रेस की असहिष्णु मानसिकता बताया और मांग की कि जीतू पटवारी और कांग्रेस पार्टी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र में सच दिखाना और सवाल पूछना अपराध नहीं है, बल्कि यही उसकी आत्मा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्हें ऐसी किसी गंभीर घटना की जानकारी नहीं है।
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कांग्रेस के प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले ने कहा, किसान चौपाल बहुत व्यवस्थित तरीके से पूर्ण हुई।अब यह सारे बेबुनियाद आरोप भाजपा लगा रही है जो कि तर्कसंगत नहीं है।
नेतृत्व एक मंच पर
पूरी कांग्रेस लीडरशिप एक मंच पर दिखी। राहुल गांधी का भाषण आक्रामक और मुद्दा आधारित रहा। मंच संचालन और अनुशासन व्यवस्थित नजर आया। वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि कार्यकर्ताओं में उत्साह था और बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर कार्यक्रम सुनते रहे।
संदेश बनाम मैनेजमेंट
भीड़ के आंकड़ों में विरोधाभास। खाली कुर्सियों की तस्वीरों ने विपक्ष को आक्रामक होने का मौका दिया। होर्डिंग और नाम न लेने की चर्चा से संगठनात्मक तालमेल पर सवाल। पास और एंट्री को लेकर असंतोष की खबरें। ये संकेत बताते हैं कि मैदानी स्तर पर और बेहतर समन्वय की जरूरत है।
क्या कांग्रेस को करना होगा आत्ममंथन?
जब लक्ष्य और उपलब्धि के बीच अंतर दिखाई दे, तो समीक्षा जरूरी हो जाती है। क्या आपसी खींचतान का असर कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर पड़ा? क्या जमीनी स्तर पर संगठनात्मक तैयारी कमजोर रही? विश्लेषकों का मानना है बड़े चेहरे से भीड़ जुटती है, लेकिन मजबूत नेटवर्क से संदेश टिकता है।
संदेश मजबूत, लेकिन संगठन को कसावट चाहिए
राहुल गांधी ने राजनीतिक संदेश दिया। मंच पर एकता दिखी, लेकिन मैदान में सवाल उठे। इन सवालों ने संगठन को सोचने पर मजबूर किया। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस इसे शक्ति प्रदर्शन मानेगी या सुधार के संकेत के रूप में लेगी। राजनीति में सिर्फ भाषण नहीं, प्रबंधन और संदेश की स्पष्टता भी अहम होती है।
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