भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार, सड़क की चौड़ाई तय करेगी कहां खुलेगा शोरूम और कहां बनेगा मकान
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल का नया मास्टर प्लान ड्राफ्ट पूरी तरह तैयार हो गया है।
- यह ड्राफ्ट एक-दो दिन में जारी हो सकता है।
- शहर में अब अलग कमर्शियल और आवासीय जोन नहीं होगा।
- 12 मीटर से चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड लैंडयूज लागू होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने सीलिंग में भेदभाव न करने की चेतावनी दी है।
भोपाल के व्यापारियों के लिए राहत की खबर आई है। शहर का नया मास्टर प्लान लगभग तैयार हो चुका है। सीलिंग की कार्रवाई से परेशान कारोबारियों की उम्मीदें अब इसी नए प्लान पर टिकी हैं। जानकारी के मुताबिक ड्राफ्ट पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। इसके एक-दो दिन के भीतर जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
अब नहीं होंगे अलग-अलग जोन
भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट की सबसे बड़ी खासियत सामने आई है। अब तक शहर में कमर्शियल और आवासीय इलाके अलग-अलग बांटे जाते थे। नए प्लान में यह व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। अब पूरे शहर में मिक्स्ड लैंडयूज लागू होगा। इसका मतलब है कि एक ही सड़क पर मकान और दुकान दोनों बन सकेंगे। यह फैसला सड़क की चौड़ाई के आधार पर लिया जाएगा।
सड़क की चौड़ाई से तय होगा नियम
ड्राफ्ट के मुताबिक 12 मीटर या इससे ज्यादा चौड़ी सड़कों पर मिक्स्ड लैंडयूज की मंजूरी होगी। हालांकि 12 से 24 मीटर तक चौड़ी सड़कों पर कारोबारी गतिविधि सीमित रहेगी। यहां हर तरह का व्यापार करने की छूट नहीं मिलेगी। सरकार ने इसके लिए खास शर्तें तय की हैं।
वहीं 24 मीटर या इससे अधिक चौड़ी सड़कों को लेकर बड़ी राहत दी गई है। इन सड़कों पर कमर्शियल गतिविधियों की पूरी अनुमति होगी। यहां आवासीय बंगले और शोरूम एक साथ बन सकेंगे। व्यापारियों के लिए यह सबसे फायदेमंद प्रावधान माना जा रहा है।
कॉलोनियों के अंदर अब भी रहेगी रोक
नए ड्राफ्ट में कॉलोनियों के भीतर सख्ती बरकरार रखी गई है। रहवासी इलाकों और कॉलोनियों के अंदर किसी भी तरह की कारोबारी गतिविधि की मनाही रहेगी। यह नियम शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए रखा गया है। यानी बड़ी सड़कों पर छूट मिलेगी, लेकिन अंदरूनी कॉलोनियों में सख्ती जारी रहेगी।
हाईराइज के लिए खरीदना होगा एफएआर
24 मीटर से चौड़ी सड़कों के आसपास अनलिमिटेड निर्माण यानी हाईराइज बिल्डिंग बनाई जा सकेंगी। वहीं, इसके लिए बिल्डरों को अतिरिक्त एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो (Floor Area Ratio) खरीदना होगा। बिना अतिरिक्त एफएआर खरीदे हाईराइज निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम शहर के व्यवस्थित विकास के लिए बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सुनवाई
22 सितंबर को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इस दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। सरकार ने ड्राफ्ट प्रकाशित करने और लोगों से दावे-आपत्तियां लेने की अनुमति मांगी। साथ ही यह भी कहा गया कि कोर्ट की अनुमति के बिना नए प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद भी सीलिंग जैसी कार्रवाई मौजूदा नियमों के तहत ही होती रहेगी। यानी नया प्लान आने तक पुराने नियम लागू रहेंगे।
कोर्ट में उठा सीलिंग खोलने का मुद्दा
सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी यानी कोर्ट मित्र (Amicus Curiae) ने भोपाल का खास जिक्र किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कई बार परिसरों को सील करने के कुछ घंटे या दिन बाद ही फिर से खोल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस दौरान न तो कारण बताओ नोटिस का जवाब आता है और न ही अधिकारी कोई औपचारिक निर्णय लेते हैं।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए। यदि चुनिंदा तरीके से कार्रवाई करने के मामले सामने आए, तो कोर्ट सख्त रुख अपनाएगा।
मुकदमा लंबित होना बाधा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम बात स्पष्ट की है। कोर्ट के मुताबिक किसी जमीन या भवन के मालिकाना हक से जुड़ा मुकदमा यदि कोर्ट में लंबित है, तो इससे सीलिंग की कार्रवाई नहीं रुकेगी। यदि संपत्ति का उपयोग आवंटन के मकसद या मंजूर नक्शे के खिलाफ पाया जाता है, तो सीलिंग कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा बिना मंजूरी के किए गए निर्माण पर भी कानून के मुताबिक सीलिंग या तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी रहेगी।
व्यापारियों के लिए क्या रहेगा असर
नया मास्टर प्लान लागू होने के बाद भोपाल के व्यापारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। खासकर उन दुकानदारों को फायदा होगा, जो चौड़ी सड़कों के किनारे कारोबार कर रहे हैं। हालांकि जब तक ड्राफ्ट को अंतिम मंजूरी नहीं मिलती, तब तक मौजूदा नियम ही लागू रहेंगे। इसलिए व्यापारियों को अभी थोड़ा इंतजार करना होगा।
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