बोल हरि बोल : दो घरों का मैनेजमेंट कर रहे एक साहब, मंत्रीजी को इंजीनियर्स ने बताई सच्चाई
पॉवर में रहो तो सब अपने होते हैं, पर कुर्सी से उतरते ही पहचानने वाले भी नजरें फेर लेते हैं। मामा के साथ ऐसा ही हो गया है। उधर, एक मंत्रीजी को सच्चाई हजम नहीं हो रही। इंजीनियरों ने उनके सामने हकीकत बयां कर दी है। मंत्रालय में ड्राइवर न रखने वाले डिप्टी सेक्रेटरी साहब चर्चा में हैं। सरकारी गाड़ी है, पर खुद ही चलाते हैं। बसंत के इस मौसम में साहिबान और अफसरान के खूब चर्चे हैं। आप तो सीधे नीचे उतर आईए और बोल हरि बोल के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
कुर्सी से क्या उतरे, अपने भी पराए हो गए!
जवाब पढ़कर मंत्रीजी को पता चल गई हकीकत
सूबे के एक मंत्री महोदय को इन दिनों अपनी छवि की बहुत चिंता है। ऐसा भी नहीं कि सिर्फ शीशे के सामने खड़े होकर बाल संवार रहे हों, बल्कि विभाग की छवि को सुधारने के लिए भी जोर-शोर से लगे हैं। इसी क्रम में उन्होंने क्रांतिकारी कदम उठाया। प्रदेशभर के इंजीनियरों से 57 सवालों के जवाब ऑनलाइन भरवा लिए। मंत्रीजी को उम्मीद थी कि जवाब कुछ इस तरह आएंगे कि सर, आपकी दूरदर्शिता कमाल की है या फिर आपके नेतृत्व में सड़कें चिकनी हो गईं और पुल मजबूत, लेकिन असली जवाब देखे तो मंत्रीजी के माथे पर पसीना आ गया। कुछ ईमानदार इंजीनियरों ने साफ-साफ लिख दिया कि मंत्रीजी जब तक ऊपर से नीचे तक कमीशन रूपी भ्रष्टाचार की नदियां बह रही हैं, तब तक गड्ढे ही नजर आएंगे। मंत्रीजी ने एक- एक जवाब पढ़ा, फिर चुपचाप फाइल बंद कर दी। आखिर जवाब में दम था और मंत्रीजी के पास समाधान नहीं था।
बेटे ने कराई साहब की किरकिरी
केंद्र सरकार में पदस्थ मध्यप्रदेश केडर के एक आईएएस अफसर के बेटे ने उनकी किरकिरी करवा दी। दरअसल, मामला ऐसा है कि साहब का बेटा दिल्ली में इंजीनियरिंग कर रहा है। देर रात वह झगड़े में पुलिस के हत्थे चढ़ गया। घर तक मामला ना पहुंचे, इसलिए शुरुआत में उसने अपनी पहचान छिपाई। बस फिर क्या था, पुलिस जैसे किसी आम अपराधी की खातिरदारी करती है, उसी अंदाज में साहब के शहजादे और उसके दोस्तों की मेहमान नवाजी कर दी। आखिरकार शहजादे से जब सहन नहीं हुआ तो उसने अपने साहब पिता का नाम बताया। साहब ऊंचे ओहदे पर हैं, तो पुलिस वाले भी डर गए। रात को ही साहब को फोन लगाया। खबर मिलते ही साहब रात को थाने दौड़े, मामला दबाने और बेटे के भविष्य को बचाने पॉवर का भी इस्तेमाल किया, लेकिन बात बाहर आ ही गई।
साहब ड्राइवर क्यों नहीं रखते?
साहब ने आखिर परिचय क्यों दिया?
अफसरों के बड़े साहब ने हाल ही में कलेक्टर-कमिश्नर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बुलाई। बैठक शुरू होते ही अपर मुख्य सचिव जे.एन कंसोटिया ने अपना परिचय देते हुए कहा, मैं गृह विभाग में अपर मुख्य सचिव हो गया हूं। बस, इतना कहना था कि डीजीपी से लेकर हर कलेक्टर-एसपी अचरज में पड़ गए। ब्यूरोक्रेसी में कौन कंसोटिया साहब को नहीं जानता? आखिर उन्होंने परिचय क्यों दिया? क्या ये पद की नई जिम्मेदारी को लेकर कोई औपचारिकता थी या फिर 'बड़े साहब' को एहसास दिलाने का कोई खास तरीका? वीसी खत्म होते ही सरकारी गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया। कुछ लोगों का मानना है कि साहब बस अपनी प्रोफाइल अपडेट कर रहे थे तो कुछ का कहना है कि यह उनकी स्टाइल थी– पहचान कर लो, अब मैं और भी ताकतवर हो गया हूं। अब साहब के इस परिचय के कई मायने निकाले जा रहे हैं, लेकिन असली बात तो वही जानें कि यह परिचय जरूरत थी या कोई खास संदेश?
खाकी के दाग धोने में जुटे साहब
खाकी की साख पर फिर से दाग लग गया है। अब देखिए न, पीएचक्यू के अकाउंट डिपार्टमेंट में घोटाले का जिन्न बाहर आ गया है। तीन करोड़ से ज्यादा की हेराफेरी की खबर है। लंबे समय से ये खेल चल रहा था। मेडिक्लेम के बिलों में इतना गोलमाल किया गया है कि बीमार को दवा मिलने से पहले ही इलाज बिलों में हो चुका था। अब तीन पुलिसकर्मी हिरासत में हैं और बाकी 'खिलाड़ियों' के दिलों की धड़कनें तेज हैं। कहीं अगला नंबर उनका न आ जाए। नए बड़े साहब जीरो टोलरेंस को लेकर बेहद सख्त हैं। उन्होंने कड़ी कार्रवाई के निर्देश देते हुए नए सिरे से जांच बैठा दी है।
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