बोल हरि बोल: सिस्टम, साहब और सितार… इस हफ्ते सब गड़बड़ाए
Harish Divekar | Jun 07, 2026, 13:56 IST
bol hari bol journalist harish divekar bhopal
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के बोल हरि बोल कॉलम में इस हफ्ते मध्यप्रदेश के सिस्टम, पांच सितारा होटल में खाकी की रंगदारी, अनइमोशनल आईएएस और ठगे गए युवा आईपीएस अफसरों की अनसुनी कहानियां उजागर हुई हैं।
BHOPAL. भाई साहब! इस हफ्ते तो कमाल हो गया। जिसे सिस्टम ने बड़ी उम्मीदों से कुर्सी पर बिठाया, वो सिस्टम को ही चूना लगा गया। जो खाकी कानून की रखवाली करती है, वो पांच सितारे में मुफ्त की रात गुजारने लगी। और जिन आईएएस साहबान को जनता की तकलीफ समझनी चाहिए, वो अपनों की तकलीफ भी नहीं समझ पाए।
तो चलिए इस हफ्ते के असली किरदारों से मिलते हैं- जहां गुज्जू भाई इटली में हैं। कप्तान साहब होटल में और युवा आईपीएस… ठगे हुए से खड़े हैं। आज के Bol Hari Bol में वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर बता रहे हैं सरकार और सियासत के गलियारों की अनसुनी बातें…
आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि सिस्टम को भी कोई टोपी पहना सकता है। जी हां… ये सच है। दरअसल बांध और कैनाल वाले सिस्टम से नौशाद को आउट करने के बाद गुज्जू भाई को एंट्री दी गई थी। गुज्जू भाई ने साउथ और गुजरात के बड़े-बड़े कॉन्ट्रैक्टरों से मेल-मुलाकात कर तीन फिगर का नंबर ले लिया।
बताते हैं कि ये नंबर सिस्टम में आता उसके पहले ही गुज्जू भैय्या गायब हो गए। अब उन्हें पूरा सिस्टम और खुफिया महकमा ढूंढ रहा है, लेकिन गुज्जू भैय्या का अता-पता नहीं है। उड़ते-उड़ते सोर्स बता रहे हैं कि गुज्जू भैय्या इटली निकल लिए हैं।
इस घटना के बाद सबसे ज्यादा खुशी नौशाद और उनके संरक्षक मंत्रीजी को हो रही है। वे सिस्टम को अहसास दिला रहे हैं कि जब तक नौशाद था, तब तक तो सब कुछ ईमानदारी से चल रहा था। गुज्जू भैय्या ने सिस्टम को टोपी पहनाई है… ये बात भी नौशाद की टीम बाजार में आगे होकर बता रही है।
टाइगर रिजर्व वाले जिले में खाकी वालों की दादागीरी चर्चा में है। अब तक खाकी छोटे होटल और रिजॉर्ट वालों पर ही रंगदारी कर रहे थे, लेकिन अब कप्तान भी मैदान में आ गए हैं। उन्होंने सीधे पांच सितारा होटल पर ही हाथ डाल दिया है। बताया जा रहा है कि कप्तान साहब के चाहने और चाहने वाली जब भी टाइगर रिजर्व की तफरी करने आते हैं तो उनके लिए पांच सितारा होटल के कमरों में रुकने की मुफ्त व्यवस्था की जाती है।
शुरुआत में तीन-चार महीने में कमरा बुक होता था, लेकिन अब महीने में दो बार कमरा बुक होने से पांच सितारा होटल के मैनेजर की इंटरनल जांच बैठ गई है। मैनेजर ने कप्तान की रंगदारी का बयान अपने मैनेजमेंट को दिया है। बताया जा रहा है कि पांच सितारा के प्रबंधन के बड़े साहब लोग इस मामले को डीजीपी तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
माता-पिता के निधन के बाद बेटा हो या बेटी गहरा सदमा तो लगता ही है। लेकिन एमपी में आईएएस अफसरों के दो मामले ऐसे सामने आए हैं, जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या ट्रेनिंग में ही अनइमोशनल होना बताया जाता है…
दरअसल कुछ समय मंत्रालय में पदस्थ सीनियर आईएएस अफसर की मां का निधन हुआ। इन साहब ने मां की अंत्येष्टि के दूसरे दिन ही नौकरी ज्वाइन कर ली, जबकि हिन्दू रीति-रिवाज में तो तीन दिन शुद्धि के होते हैं। इन दिनों में नौकरी पर आना तो दूर घर से भी नहीं निकलते।
दूसरा मामला भी मंत्रालय में पदस्थ एक महिला आईएएस का है। इनके पिता का निधन हो गया। खबर मिलते ही मैडम ने घर के लिए रवानगी डाल दी, लेकिन ये क्या 13वीं से पहले ही मैडम जी जर्मनी टूर पर निकल गईं। बताया जा रहा है कि मैडम का टूर पहले से फिक्स था, बीच में पिता का निधन हो गया तो क्रियाकर्म का कार्यक्रम पूरा होते ही मैडम निकल लीं? अब 13वीं का क्या है परिवार के सदस्य कर ही लेंगे।
प्रदेश के युवा आईपीएस अफसरों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। ये लोग खुलकर अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर आईपीएस एसोसिएशन और पीएचक्यू में बैठे सीनियर अफसरों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल कुछ दिन पहले भोपाल में एक बड़े अखबार समूह के मालिक पर एफआईआर करने के मामले में प्रशिक्षु आईपीएस पर गाज गिरी थी। रात डेढ़ बजे होम डिपार्टमेंट ने आदेश जारी कर उन्हें लूप लाइन में भेजा गया। मामले की परतें खुलीं तो पता चला कि प्रशिक्षु आईपीएस ने एफआईआर से पहले वरिष्ठों से सहमति ली थी। मामले में दबाव बनने पर बेचारे को निपटा दिया गया।
शुरू के दो दिन तक तो सीनियर आईपीएस इस मामले में सहानुभूति दिखाते हुए मुख्यमंत्री से एसोसिएशन की मुलाकात की बात करते रहे, लेकिन बाद में मामला ठंडा हो गया। इसी बात को लेकर युवा आईपीएस अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।
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तो चलिए इस हफ्ते के असली किरदारों से मिलते हैं- जहां गुज्जू भाई इटली में हैं। कप्तान साहब होटल में और युवा आईपीएस… ठगे हुए से खड़े हैं। आज के Bol Hari Bol में वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर बता रहे हैं सरकार और सियासत के गलियारों की अनसुनी बातें…
गुज्जू भाई ने सिस्टम को पहनाई टोपी
बताते हैं कि ये नंबर सिस्टम में आता उसके पहले ही गुज्जू भैय्या गायब हो गए। अब उन्हें पूरा सिस्टम और खुफिया महकमा ढूंढ रहा है, लेकिन गुज्जू भैय्या का अता-पता नहीं है। उड़ते-उड़ते सोर्स बता रहे हैं कि गुज्जू भैय्या इटली निकल लिए हैं।
इस घटना के बाद सबसे ज्यादा खुशी नौशाद और उनके संरक्षक मंत्रीजी को हो रही है। वे सिस्टम को अहसास दिला रहे हैं कि जब तक नौशाद था, तब तक तो सब कुछ ईमानदारी से चल रहा था। गुज्जू भैय्या ने सिस्टम को टोपी पहनाई है… ये बात भी नौशाद की टीम बाजार में आगे होकर बता रही है।
खाकी की दादागीरी...
शुरुआत में तीन-चार महीने में कमरा बुक होता था, लेकिन अब महीने में दो बार कमरा बुक होने से पांच सितारा होटल के मैनेजर की इंटरनल जांच बैठ गई है। मैनेजर ने कप्तान की रंगदारी का बयान अपने मैनेजमेंट को दिया है। बताया जा रहा है कि पांच सितारा के प्रबंधन के बड़े साहब लोग इस मामले को डीजीपी तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
अनइमोशनल साहब-मैडम
दरअसल कुछ समय मंत्रालय में पदस्थ सीनियर आईएएस अफसर की मां का निधन हुआ। इन साहब ने मां की अंत्येष्टि के दूसरे दिन ही नौकरी ज्वाइन कर ली, जबकि हिन्दू रीति-रिवाज में तो तीन दिन शुद्धि के होते हैं। इन दिनों में नौकरी पर आना तो दूर घर से भी नहीं निकलते।
दूसरा मामला भी मंत्रालय में पदस्थ एक महिला आईएएस का है। इनके पिता का निधन हो गया। खबर मिलते ही मैडम ने घर के लिए रवानगी डाल दी, लेकिन ये क्या 13वीं से पहले ही मैडम जी जर्मनी टूर पर निकल गईं। बताया जा रहा है कि मैडम का टूर पहले से फिक्स था, बीच में पिता का निधन हो गया तो क्रियाकर्म का कार्यक्रम पूरा होते ही मैडम निकल लीं? अब 13वीं का क्या है परिवार के सदस्य कर ही लेंगे।
युवा आईपीएस अफसरों में नाराजगी
दरअसल कुछ दिन पहले भोपाल में एक बड़े अखबार समूह के मालिक पर एफआईआर करने के मामले में प्रशिक्षु आईपीएस पर गाज गिरी थी। रात डेढ़ बजे होम डिपार्टमेंट ने आदेश जारी कर उन्हें लूप लाइन में भेजा गया। मामले की परतें खुलीं तो पता चला कि प्रशिक्षु आईपीएस ने एफआईआर से पहले वरिष्ठों से सहमति ली थी। मामले में दबाव बनने पर बेचारे को निपटा दिया गया।
शुरू के दो दिन तक तो सीनियर आईपीएस इस मामले में सहानुभूति दिखाते हुए मुख्यमंत्री से एसोसिएशन की मुलाकात की बात करते रहे, लेकिन बाद में मामला ठंडा हो गया। इसी बात को लेकर युवा आईपीएस अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।
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