ब्रांडेड कंपनियों के मसाले छीन रहे मर्दानगी , कैंसर का भी खतरा , ऐसे पता लगाएं मसालों में मिलावट है या नहीं

स्वास्थ्य विभाग ने 8 मई को प्रदेश के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाकर एमडीएच, एवरेस्ट जैसी नामी कंपनियों के मसालों के सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट में मसालों में तय मात्रा से अधिक खतरनाक केमिकल मिलाए जाने की पुष्टि हुई।

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Marut raj
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ब्रांडेंड कंपनियों के मसाले कैंसर जैसी बीमारियों की वजह बन सकते हैं। दरअसल, रसोई तक जो ब्रांडेड कंपनियों के मसाले पहुंच रहे हैं, उनमें कीड़े मारने वाले केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है। ये केमिकल तमाम गंभीर बीमारियों के कारण बनते हैं।

इस तरह के मसाले का लगातार उपयोग गर्भवती महिलाओं के मिसकैरेज ( गर्भपात ) की वजह बन सकता है। फेफड़े और लीवर डैमेज कर सकता है। यहां तक कि पुरुषों को नामर्द बना सकता है।

राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर में अभियान चलाकर सभी जिलों से ब्रांडेंड कंपनियों के मसालों के सैंपल लिए थे। जांच में कई ब्रांडेड मसालों में पेस्टिसाइड और एथिलीन ऑक्साइड जैसे केमिकल मिले हैं।

ऐसे हुआ मसालों में कीटनाशक का खुलासा

राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने 8 मई को प्रदेश के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाकर एमडीएच, एवरेस्ट, श्याम, गजानंद, सीबा जैसी नामी कंपनियों के मसालों के 93 सैंपल जुटाए थे। राज्य की सेंट्रल लैब से जब जांच रिपोर्ट आई, तो उसमें कई तरह के घरेलू उपयोग वाले मसालों में तय मात्रा से अधिक खतरनाक केमिकल मिलाए जाने की पुष्टि हुई।

मसालों में मिले ये खतरनाक केमिकल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जांच में एमडीएच कंपनी के गरम मसाले में एसिटामिप्रिड, थियामेथोक्साम, इमिडाक्लोप्रिड मिले हैं। एमडीएच के सब्जी और चना मसाला में ट्राईसाइलाजोन, प्रोफिनोफोस मिले हैं। सीबा ताजा कंपनी के रायता मसाला में थियामेथोक्साम और एसिटामिप्रिड, गजानंद कंपनी के अचार मसाला में इथियोन। एवरेस्ट कंपनी के जीरा मसाला में एजोक्सीस्ट्रोबिन, थियामेथोक्साम पेस्टीसाइड/इंसेक्टिसाइड निर्धारित मात्रा से काफी अधिक पाए गए। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं।

गांठ और स्तन कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मसालों में मिले केमिकल मानव शरीर के लिए सबसे घातक हैं। जिन केमिकल से कीड़े मर जाते हैं, वो हमारे शरीर को भी बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। पेस्टिसाइड से हमारे शरीर में कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है।

इनमें सबसे खतरनाक है एथिलीन ऑक्साइड। एथिलीन ऑक्साइड की मात्रा ज्यादा होने पर लिंफोमा और ल्यूकेमिया कैंसर होता है। लिंफोमा कैंसर में शरीर में गांठ बनने लग जाती है। वहीं ल्यूकेमिया, खून में होने वाला कैंसर है।

महिलाओं को गर्भपात का खतरा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तय मात्रा से ज्यादा पेस्टिसाइड से महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। एथिलीन ऑक्साइड गैस से जानवरों के प्रजनन से जुड़े प्रभाव देखे गए हैं। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) की रिसर्च के अनुसार, प्रेग्नेंट महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा तो है ही, पुरुषों में भी नामर्दी के लक्षण आ सकते हैं।

डैमेज हो सकते हैं फेफड़े, लीवर और आंत 

लिवर हमारे शरीर के अंदर विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। तय मात्रा से अधिक पेस्टिसाइड वाले मसाले बार-बार खाने से लीवर ही काम करना बंद कर देता है। इससे पीलिया (हेपेटाइटिस), त्वचा में पीलापन जैसी समस्याएं आने लगती हैं।

 हमारी आंत के अंदर सूक्ष्मजीव होते हैं, जो जहरीले और विषैले तत्वों को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करते हैं। मसालों में पाए गए केमिकल से आंत भी डैमेज होती हैं।

फेफड़ों में गंभीर समस्याएं

पेस्टीसाइड्स के सेवन से लंग्स (फेफड़े) डिस्फंक्शन की समस्या का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह से क्रोनिक कफ और खांसी की समस्या हो सकती है। शरीर में पेस्टीसाइड्स की मौजूदगी के कारण फेफड़ों से जलन पैदा होती है और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।



इसलिए डालते हैं खतरनाक एथिलीन ऑक्साइड

एथिलीन ऑक्साइड सबसे खतरनाक पेस्टिसाइड होता है। फिर भी इसका इस्तेमाल तय मात्रा में कई तरह की इंडस्ट्री में होता है। इस केमिकल से अस्पतालों में सर्जिकल इक्विपमेंट साफ किए जाते हैं।

कंपनियां मसालों को फंगस (फफूंद), बैक्टीरिया से बचाने के लिए इसमें एथिलीन ऑक्साइड का उपयोग करती हैं। बैक्टीरिया या फंगस लगने से मसाले जल्दी खराब हो जाते हैं। इस केमिकल को एक तय मात्रा में ही उपयोग किया जा सकता है। कई कंपनी मनमाने ढंग से इसकी मात्रा बढ़ा देती हैं। जब हम बार-बार उन मसालों का सेवन करते हैं तो जाने-अनजाने में बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

ऐसे पता लगाएं मसालों में मिलावट है या नहीं

काली मिर्च : काली मिर्च में मिलावट के लिए पपीते के बीजों को मिलाया जाता है। इससे काली मिर्च का टेस्ट तो बिगड़ता ही है साथ ही ये बीज सेहत के लिए भी अच्छे नहीं होंगे। काली मिर्च की मिलावट को परखने के लिए एक गिलास में पानी भरें और उसमें एक चम्मच काली मिर्च डालें। असली काली मिर्च नीचे दब जाएगी और नकली ऊपर ही तैरेगी।

लाल मिर्च पाउडर : लाल मिर्च में ज्यादातर चॉक, केमिकल डाई या फिर ईंट का पाउडर मिलाया जाता है। इसे टेस्ट करने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच लाल मिर्च डालें और देखें कि लाल मिर्च पानी में घुल रही है या नहीं। अगर लाल मिर्च नकली होगी तो उसका रंग बदल जाएगा।

हल्दी : हल्दी को टेस्ट करने के लिए एक गिलास गर्म पानी लेकर उसमें एक चम्मच हल्दी का पाउडर मिला लें। अब देखें कि पानी में घुलने के बाद हल्का पीला रंग दिखता है और वह नीचे जमने लगती है तो हल्दी असली होगी। अगर हल्दी का रंग गाढ़ा पीला दिखता है तो हल्दी नकली होगी।

जीरा : एक चम्मच जीरा लेकर अपनी उंगलियों के बीच रगड़कर जांच सकते हैं। अगर आप मिलावटी जीरा रगड़ रहे हैं तो आपकी उंगलियां काली पड़ जाएंगी और शुद्ध जीरा आपके हाथों को काला नहीं करता।

लौंग : लौंग को ताजा दिखाने के लिए आमतौर पर हानिकारक तेलों से ढका जाता है। जब आप पानी से भरे गिलास में लौंग डालते हैं, तो ताजा लौंग सीधे नीचे चली जाती है जबकि पॉलिश की हुई लौंग सतह पर तैरने लगती है। मसालों में मिलावट का कैसे पता लगाएं मसालों में जानलेवा केमिकल How to detect adulteration in spices

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