केंद्रीय मंत्री शिवराज जिनके पक्ष में उतरे, उन पर वन भूमि कब्जाने का आरोप, कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में बड़ा दावा
31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर था कब्जा
सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र में वन भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई थी। इस दौरान आदिवासियों के मकान और झोपड़ियां हटाई गई थीं। इसके बाद मामला गरमा गया है। अब सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले की जांच शुरू की है। सीहोर कलेक्टर (आईएएस बालागुरु के.) ने राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे जिलों से आए कुछ लोगों ने वन भूमि पर अवैध कब्जा किया था। उन्होंने वहां सागौन के पौधे काटकर झोपड़ियां बना ली थीं। जांच रिपोर्ट में 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण होने की बात कही गई है।
78 हजार से ज्यादा सागौन के पौधे नष्ट
जांच रिपोर्ट में वन विकास निगम के पौधारोपण का भी जिक्र है। वर्ष 2021 में वन विकास निगम ने इस क्षेत्र में तीन लाख 37 हजार 500 सागौन के पौधे लगाए थे। ये पौधे 135 हेक्टेयर जमीन पर लगाए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 78 हजार 700 पौधे नष्ट कर दिए गए थे। इसके बाद 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। यह जमीन वन विकास निगम के अधीन है। वर्ष 2020 में सामान्य वन मंडल ने 186.960 हेक्टेयर वन भूमि निगम को सौंपी थी।
Google Earth की तस्वीरों से मिला सुराग
जांच के दौरान Google Earth की पुरानी तस्वीरों की भी मदद ली गई है। वन विकास निगम ने इन तस्वीरों को सबूत के तौर पर पेश किया है। निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 तक इस वन भूमि पर कोई कब्जा नहीं था। साल 2022 से यहां कब्जे होने शुरू हुए थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुनील पिता शैतान और 11 अन्य लोगों ने यहां लगाए गए पौधों को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद जमीन पर अस्थायी झोपड़ियां बना ली थीं। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने खेती करने के लिए वन भूमि पर कब्जा किया था। वन विकास निगम का कहना है कि सैटेलाइट की पुरानी तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पहले इस जमीन की क्या स्थिति थी और बाद में यहां किस तरह बदलाव हुए।
11 अक्टूबर को हटाई गईं 9 झोपड़ियां
वन विभाग ने 11 अक्टूबर को सीहोर जिले की भैंरूदा तहसील में कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई लाड़कुई वन परिक्षेत्र की कोसमी बीट में हुई थी। यहां रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट नंबर 426 से अतिक्रमण हटाया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान नौ झोपड़ियां हटाई गई थीं। कार्रवाई की ड्रोन से वीडियोग्राफी भी कराई गई थी।
प्रशासन का दावा है कि इस कार्रवाई के बाद 31.48 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जे से मुक्त करा लिया गया है। वहीं कार्रवाई का विरोध भी हो रहा है। प्रभावित लोग वन विकास निगम के डिपो के बाहर धरना दे रहे हैं। रिपोर्ट में तीन दिन से विरोध प्रदर्शन चलने की बात कही गई है।
जिनकी झोपड़ियां हटाईं, उनके गांव में पक्के मकान होने का दावा
कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन नौ लोगों की झोपड़ियां हटाई गईं, उनके मूल गांवों में पहले से पक्के मकान हैं।
भैंरूदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की जानकारी के आधार पर यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ये लोग खुद को भूमिहीन बता रहे थे। हालांकि प्रशासन का कहना है कि इनके सिंहपुर और हबीबनगर गांव में मकान दर्ज हैं। इन मकानों के नंबर और संबंधित लोगों के वोटर आईडी कार्ड की जानकारी भी जांच रिपोर्ट में दी गई है।
अब सरकार की जांच पर नजर
बुधनी में मकान तोड़ने की कार्रवाई को लेकर विवाद जारी है। केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी प्रभावित लोगों के पक्ष में सामने आए थे। दूसरी तरफ प्रशासन की रिपोर्ट में वन भूमि पर कब्जे और सागौन के पौधे नष्ट करने के गंभीर दावे किए गए हैं।
फिलहाल सामान्य प्रशासन विभाग मामले की जांच कर रहा है। कलेक्टर की रिपोर्ट में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर कई तथ्य रखे गए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस रिपोर्ट पर क्या फैसला लेती है। साथ ही प्रभावित लोगों के आरोपों और प्रशासन के दावों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।