मुनाफा कमाने के चक्कर में पड़ गए सस्ती दवाएं मुहैया कराने वाले केंद्र
Sanjay Sharma | Dec 06, 2024, 14:37 IST
Centers providing
'द सूत्र' ने राज्य के तीन शहरों के जन औषधि केंद्रों की पड़ताल की। स्थिति को समझने महाकौशल अंचल के जबलपुर, मालवा के रतलाम और मध्य क्षेत्र के रायसेन जिले के केंद्रों से दवाएं खरीदीं।
BHOPAL. कैसे मुनाफे का लालच योजनाओं को उद्देश्य से भटका देता है इसका एक और उदाहरण बन गई है जनऔषधि परियोजना। मंहगे उपचार और दवाओं के लिए परेशान गरीब-कमजोर वर्ग की परेशानी दूर करने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 18 साल पहले शुरू योजना में अब वसूलीबाज घुस आए हैं। जनऔषधि केंद्रों पर जरूरतमंदों से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है। मुनाफे के चक्कर में ज्यादातर केंद्रों से कारगर लेकिन सस्ती दवाएं गायब कर दी गई हैं। अब मुनाफाखोरों ने यहां भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसरों में भी इन दवा केंद्रों की मनमानी जारी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं है। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो मतलब ये है कि एक ओर योजना सरकारी सिस्टम की उदासीनता की शिकार हो चली है।
जीवनरक्षक दवाएं कम कीमत पर मुहैया कराने की सरकार की नीयत को कैसे बिगाड़ा जा रहा है ये किसी से छिपा नहीं है। जन औषधि केंद्र भी सरकारी निगरानी न होने के कारण बाजारू मेडिकल स्टोर की शक्ल लेते जा रहा हैं। जहां मरीज की हालत नहीं बल्कि मुनाफा कमाना उद्देश्य होता है। जन औषधि केंद्र जबसे खुले हैं शायद ही सीएमएचओ या प्रशासन के किसी अफसर ने इनकी पड़ताल की है। इसी वजह से केंद्र संचालक मनमानी पर उतर आए हैं। सरकारी योजना के तहत खुले इस केंद्रों को प्रशासन की ओर से रियायत देने का फायदा भी ये जमकर उठा रहे हैं। इन शिकायतों पर जहां प्रशासन मौन हैं वहीं द सूत्र ने पड़ताल की तो कई खुलासे हुए हैं। इन्हें आप भी देखेंगे तो चौंक जाएंगे कि कैसे खुलेआम नियम तोड़कर केंद्र और राज्य की मंशा को पलीता लगाया जा रहा है।
जन औषधि केंद्र पर सस्ती और जरूरी दवाएं न रखने के सवाल पर संचालकों के अपने जवाब हैं। दुकानदारों का कहना है जनऔषधि केंद्र पर 2 हजार तरह की दवाएं रखने का मैनुअल है। कस्बे और शहरों में इतनी दवाओं की बिक्री नहीं होती। ज्यादातर दवाएं खराब हो जाती है जिन्हें जेनेरिक कंपनियां वापस नहीं लेती। जबकि पूरी दवाओं की सेल पर उन्हें केवल 2 फीसदी कमीशन ही मिलता है। यानी कम बचत में इतना बढ़ा स्टॉक रख पाना काफी मुश्किल होता है। इस वजह से ज्यादातर केंद्रों पर चलन वाली दवाएं ही उपलब्ध होती हैं।
गरीब, कमजोर सहित आमजन पर जरूरी दवाओं की खरीदी पर भार न पड़े इसे ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर भारतीय जनऔषधि परियोजना यानी PMBJP की शुरूआत की गई थी। नवम्बर 2008 में केंद्र सरकार ने इस योजना को हरी झंडी दी थी जिसके तहत अब देश के हर राज्य में जिला और तहसील स्तर ही नहीं छोटे कस्बों में भी जन औषधी केंद्र खुल गए हैं। मेडिकल स्टोर की तर्ज पर चलने वाले इन केंद्रों पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध होती हैं जो 80 फीसदी तक सस्ती कीमत पर उपलब्ध होती हैं। यानी दवाएं खरीदने पर हजारों रुपए की बजत हो जाती है। दो महीने पहले तक देशभर में 13822 केंद्र संचालित थे जिन पर PMBJP के तहत सस्ती जेनेरिक दवाएं मुहैया कराई जाती है। लेकिन इन केंद्रों पर भी मुनाफे के लालच ने व्यवस्था बिगाड़ दी है। यहां भी मरीज या जरूरतमंदों से दवाओं के बदले में ज्यादा कीमत वसूली होने लगी है।
जन औषधि केंद्र की नहीं नहीं हो रही पड़ताल
बिल से इंकार, जरूरी दवा की भी कमी
द सूत्र ने राज्य के तीन शहरों के जन औषधि केंद्रों की पड़ताल की। स्थिति को समझने महाकौशल अंचल के जबलपुर, मालवा के रतलाम और मध्य क्षेत्र के रायसेन जिले के केंद्रों से दवाएं खरीदीं। इस दौरान किसी ने बिल नहीं दिया तो किसी ने अपने ही कम्प्यूटर सिस्टम पर दवा की कीमतें दिखाकर पल्ला झाड़ लिया। कहीं सस्ती जेनेरिक दवाएं ज्यादा कीमत वसूलकर थमाई गईं तो कुछ ने कम मुनाफा देने वाली दवा होने से ही इंकार कर दिया। द सूत्र की पड़ताल से सब साफ है कि कैसे सस्ती दवाएं देने वाले केंद्र अपने उद्देश्य से भटक चुके हैं। यही नहीं जन औषधि केंद्रों पर व्यावसायिक धोखाधड़ी भी बेधड़क जारी है।
योजना की पाबंदी भी घटा रही मोह
विजन से भटकी अच्छी योजना
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman