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छतरपुर जिले के राजनगर थाने में एक युवक की मौत के बाद बवाल मच गया है। पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया है जबकि परिजनों का आरोप है कि युवक की मौत पुलिस की पिटाई से हुई है। घटना के बाद युवक के परिजन देर रात धरने पर बैठे रहे। परिजनों ने दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर की मांग भी की है।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार, 14 फरवरी की शाम करीब 5 बजे युवक का शव छतरपुर जिले के राजनगर थाने में चाइल्ड डेस्क के वॉशरूम में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला। पुलिस ने जांच में इसे आत्महत्या बताया है। युवक के परिवारवालों का आरोप है कि पुलिस हिरासत में मारपीट के बाद उसकी मौत हुई है।
पुलिसकर्मियों पर FIR की मांग
घटना के बाद थाने के बाहर काफी तनाव की स्थिति बन गई थी। रात 12 बजे तक लोग धरने पर बैठे रहे। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बस भी तैनात था। परिजन और गांव वाले युवक को थाने लाने वाले दो पुलिस कॉन्स्टेबल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे।
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देर रात छतरपुर एसपी अगम जैन ने बताया कि मामले की जांच मजिस्ट्रेट कर रहे हैं। दो कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके बाद धरना प्रदर्शन खत्म हो गया।
पिता बोले- पिटाई से मौत हुई
मृतक के पिता किशोरी पटेल ने पुलिस पर आरोप लगाया कि शनिवार सुबह 10 बजे दो पुलिसकर्मी (संजय कुमावत और शिवकुमार पाल) बिना किसी वजह के उनके बेटे को घर से उठाकर ले गए।
उन्होंने ये भी कहा कि पुलिसवालों ने बेटे को छोड़ने के लिए 50 हजार रुपए की मांग की। मैंने गांव वालों से पैसे उधार लेकर व्यवस्था भी कर ली थी लेकिन शाम को खबर आई कि मेरे बेटे की मौत हो गई। उसकी मौत पिटाई से हुई है उसने फांसी नहीं लगाई थी।
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एसपी बोले- पूछताछ के लिए लाए थे
छतरपुर के एसपी अगम जैन ने बताया कि राजेश पटेल को धारा 151 के तहत पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। एसपी ने बताया कि युवक वॉशरूम जाने के बहाने वहां गया और फांसी लगा ली।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने उन दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है, जिन पर परिवार वालों ने आरोप लगाए हैं। फिलहाल न्यायिक मजिस्ट्रेट की टीम इस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस स्टाफ क्या कर रहा था?
देर रात कविता सिंह राजनगर थाने पहुंची और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। कविता सिंह ने कहा कि अगर थाने के अंदर किसी युवक ने आत्महत्या की है, तो उस वक्त वहां मौजूद पुलिस स्टाफ क्या कर रहा था?
इसके अलावा कविता सिंह ने ये भी सवाल उठाया कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे क्या ठीक से काम कर रहे थे। क्यों उनके फुटेज अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए।
मजिस्ट्रियल जांच की जाए
कविता सिंह ने यह मांग की कि पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच पारदर्शिता तरीके से कराई जाए। किसी भी तरह की लापरवाही सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही कविता सिंह ने पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा भी दिया।
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