इंदौर कार हादसा: कार की पिछली सीट पर सो रही पोती को भूल गए दादा, 80° तापमान ने ली जान
Anjali Dwivedi | May 19, 2026, 12:18 IST
child died locked car
इंदौर में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। दादा अपनी चार साल की पोती को कार की पिछली सीट पर भूल गए। बाहर 43 डिग्री तापमान था और कार के अंदर का पारा 80 डिग्री पहुंच गया। दम घुटने और भीषण गर्मी के कारण मासूम बच्ची की जान चली गई।
समझें क्या है पूरा मामला
- इंदौर के माणिकबाग क्षेत्र में एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ है।
- दादा अपनी चार साल की पोती को कार के पीछे भूल गए।
- उन्होंने कार को लॉक कर दिया और घर के अंदर चले गए।
- बाहर तापमान 43 डिग्री था और कार के अंदर 80 डिग्री पहुंचा।
- दम घुटने और अत्यधिक गर्मी से मासूम बच्ची की मौत हो गई।
कैसे हुआ यह हादसा
हादसे के वक्त बाहर का तापमान करीब 43 डिग्री सेल्सियस था। बंद कार के अंदर ग्रीनहाउस इफेक्ट पैदा हो गया। इसके कारण कार के अंदर का तापमान 80 डिग्री तक पहुंच गया। बंद शीशों की वजह से कार में ऑक्सीजन का लेवल तेजी से गिरा। बच्ची करीब पौने घंटे तक अंदर तड़पती रही और अंत में उसकी जान चली गई।
heatstroke alert
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पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले
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कार सुरक्षा के जरूरी नियम जानें
- उतरते समय सीटें चेक करने की आदत: अक्सर भागदौड़ या किसी दूसरी चिंता में लोग कार लॉक करके चले जाते हैं। हमेशा कार से बाहर कदम रखने से पहले एक नियम बना लें कि आगे और पीछे की सीटों पर नजर जरूर मारनी है। खासकर अगर बच्चा सो रहा हो, तो वह कोई आवाज नहीं करता, जिससे उसके कार में ही छूटने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
- चाबी बच्चों की पहुंच से दूर रखना: बच्चे स्वभाव से चंचल होते हैं और बड़ों की नकल करते हैं। अगर कार की चाबी उनके हाथ लग जाए, तो वे खेल-खेल में कार को अनलॉक करके अंदर बैठ सकते हैं। कई बार कारें 'ऑटो-लॉक' हो जाती हैं, जिससे बच्चा अंदर ही फंस जाता है। इसलिए घर पर भी चाबी को हमेशा किसी ऊंची और सुरक्षित जगह पर ही रखें।
- हॉर्न बजाने की ट्रेनिंग देना: यह एक ऐसा लाइफ-सेविंग तरीका है जो हर माता-पिता को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए। बच्चों को सिखाएं कि अगर वे कभी कार में अकेले बंद हो जाएं और दरवाजा न खुले, तो उन्हें ड्राइवर की सीट पर जाकर लगातार हॉर्न बजाना है। हॉर्न की आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ेंगे।
- इंडिकेटर और लॉक खोलना सिखाना: बच्चों को कार के डैशबोर्ड पर मौजूद डबल इंडिकेटर का बटन दबाना जरूर सिखाएं। इसके चालू होने से कार की बाहर की लाइट्स ब्लिंक करने लगती हैं, जो खतरे का संकेत देती हैं। इसके साथ ही, उन्हें अंदर से कार का दरवाजा अनलॉक करने का तरीका भी खेल-खेल में सिखाते रहना चाहिए।
गर्मी में रखें इन बातों का ध्यान
FAQ
- बंद कार के अंदर का तापमान इतनी तेजी से क्यों बढ़ता है?
बंद कार में जब सूरज की किरणें कांच के रास्ते अंदर आती हैं, तो वे अंदर की हवा और सीटों को गर्म कर देती हैं। यह गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिसे ग्रीनहाउस इफेक्ट कहते हैं। इसके कारण कार के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में दोगुना तक बढ़ जाता है। अगर बाहर 40 डिग्री तापमान है, तो कार के अंदर 70 से 80 डिग्री तक गर्मी हो सकती है। - अगर कोई बच्चा गलती से कार में लॉक हो जाए तो उसे क्या करना चाहिए?
बच्चों को बचपन से ही कार के कुछ बेसिक फीचर्स के बारे में सिखाना चाहिए। उन्हें सिखाएं कि अगर वे कार में अकेले बंद हो जाएं, तो घबराने की जगह कार का हॉर्न लगातार बजाएं। इसके अलावा कार की डबल इंडिकेटर यानी हैजार्ड लाइट को ऑन करना सिखाएं। - गर्मी के मौसम में कार पार्किंग के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
गर्मी में कार पार्क करते समय हमेशा उसे किसी छायादार जगह पर खड़ी करने की कोशिश करें। कार के शीशों को पूरी तरह बंद करने की बजाय एक-दो सेंटीमीटर खुला छोड़ दें ताकि हवा आती-जाती रहे। कार में कभी भी सनशेड लगाना न भूलें।
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