अब बीच राह में नहीं रुकेगी ई-रिक्शा, केंद्र सरकार ने 7 चीनी ऐप्स पर लगाया बैन

Amresh Kushwaha | Jul 04, 2026, 08:04 IST
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ई-रिक्शा रोकने वाले 7 चीनी एप हटाए गए
ई-रिक्शा रोकने वाले 7 चीनी एप हटाए गए

केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा बीच रास्ते बंद करने वाले 7 चीनी ऐप हटाए हैं। भोपाल, दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में सैकड़ों शिकायतें आई थीं। आईटी मंत्रालय ने ऐप स्टोर्स को सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • केंद्र सरकार ने 7 चीनी मोबाइल ऐप हटाने का आदेश दिया है।
  • ये ऐप ई-रिक्शा को बीच रास्ते अचानक बंद कर देते थे।
  • भोपाल, दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में सबसे ज्यादा शिकायतें आईं।
  • शरारती तत्व ऐप से बैटरी का ब्लूटूथ बंद कर रहे थे।
  • आईटी मंत्रालय ने ऐप स्टोर्स को सख्ती से जांच के निर्देश दिए।
देशभर में ई-रिक्शा चालकों की परेशानी अचानक बढ़ गई थी। कोई भी वाहन कभी भी बीच रास्ते बंद हो सकता था। इसके पीछे सात चीनी मोबाइल ऐप का कमाल निकला। केंद्र सरकार ने अब इन ऐप पर बड़ी कार्रवाई की है।

केंद्र सरकार का यह कदम Google और Apple को तीन चीनी बैटरी मैनेजमेंट ऐप्स BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion को हटाने का आदेश देने के बाद उठाया गया है।

क्या है पूरा विवाद

पिछले एक हफ्ते से देशभर में अजीब घटनाएं हो रही थीं। ई-रिक्शा बीच सड़क पर अचानक बंद हो जाते थे। चालक को कुछ समझ नहीं आता था। बाद में पता चला कि यह किसी ऐप का असर था। इसमें बैट-बीएमएफएस, एफकेआई-आयन और लॉसिनी नाम के ऐप शामिल थे। ये तीनों ऐप एक चीनी कंपनी ने बनाए थे। सरकार ने इन्हें एंड्रॉयड और आईओएस (iOS यानी iPhone Operating System) दोनों स्टोर से हटा दिया है।

सबसे ज्यादा शिकायतें कहां आईं

मध्यप्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह समस्या सबसे ज्यादा दिखी। भोपाल में हर दिन दर्जनों शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं। दिल्ली में शिकायतों की संख्या 100 से ज्यादा हो गई। यूपी और उत्तराखंड में भी हालात लगभग वैसे ही रहे।

सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो वायरल हुए थे। इनमें ई-रिक्शा चालक रोते हुए दिखे। कुछ लोगों ने जानबूझकर उनका वाहन बंद कर दिया था। इससे चालकों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा।

चीनी ऐप का असली मकसद

आईटी और ईवी (Electric Vehicle) तकनीक के जानकार के मुताबिक ये ऐप असल में बैटरी की सेहत देखने के लिए बनाए गए थे। इनका काम लिथियम-आयन बैटरी का तापमान और चार्जिंग जांचना था। यह जांच वायरलेस तरीके से होती थी। लेकिन इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल होने लगा।

कैसे बंद होता है ई-रिक्शा

हर लिथियम बैटरी में एक ब्लूटूथ सिस्टम लगा होता है। कई सस्ती बैटरियों में इसकी सुरक्षा बहुत कमजोर होती है। वहीं, 15 मीटर के दायरे में कोई भी शख्स इससे जुड़ सकता है। इसके बाद वह डिस्कनेक्ट स्विच दबा देता है। ऐसा करते ही गाड़ी की बैटरी बंद हो जाती है। गाड़ी चलते-चलते अचानक रुक जाती है।

दोबारा चालू करना क्यों मुश्किल

गाड़ी अपने आप दोबारा चालू नहीं होती। इसे उसी ऐप के जरिए या किसी खास तरीके से रीस्टार्ट करना पड़ता है। इसी वजह से चालक सड़क पर फंस जाते हैं। कई बार यात्री बिना पैसे दिए ही उतर जाते हैं।

किन वाहनों को खतरा नहीं

हर ई-रिक्शा इस समस्या से नहीं जूझ रहा है। पुराने लेड-एसिड बैटरी वाले वाहन पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें ब्लूटूथ सिस्टम होता ही नहीं है। बड़ी कंपनियों की बैटरियां भी सुरक्षित मानी गई हैं। इनमें मजबूत सॉफ्टवेयर और पासवर्ड लगा होता है। हालांकि पुराने ब्लूटूथ वाले ई-स्कूटर और ई-कार भी खतरे में हैं। बिना पासवर्ड सुरक्षा वाला कोई भी वाहन रिमोटली बंद हो सकता है। इसलिए हर वाहन मालिक को अपनी बैटरी की सुरक्षा जांच लेनी चाहिए।

बंद हो तो तुरंत क्या करें

अगर गाड़ी अचानक बंद हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। चाबी से गाड़ी को तुरंत बंद कर दें। इसके बाद पांच से 10 सेकंड तक रुकें। फिर दोबारा गाड़ी चालू करें। ऐसा करने से बैटरी का ब्लूटूथ मॉड्यूल रीसेट हो जाता है। ज्यादातर मामलों में गाड़ी फिर से चलने लगती है।

हमेशा के लिए बचाव का तरीका

चालकों को कुछ आसान कदम उठाने चाहिए। जरूरत न हो तो फोन का ब्लूटूथ बंद रखें। बैटरी ऐप में जाकर डिफॉल्ट पासवर्ड बदल दें। मैकेनिक से बैटरी का ब्लूटूथ मॉड्यूल भी डिस्कनेक्ट कराया जा सकता है। इन उपायों से यह खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। हर चालक को अपनी बैटरी की सेटिंग समय-समय पर जांचनी चाहिए।

कानूनन कितनी सजा मिलेगी

बिना मालिक की मंजूरी किसी वाहन का सिस्टम छेड़ना अपराध है। यह सीधे साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है। आईटी एक्ट (Information Technology Act) की धारा 43 और 66 के तहत केस बनता है। दोषी को तीन साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही पांच लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यानी यह गड़बड़ी अब आसानी से नहीं टलेगी।

सरकार ने क्या एक्शन लिया

मामले की गंभीरता देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY यानी Ministry of Electronics and Information Technology) ने फौरन एक्शन लिया। मंत्रालय के सचिव ने बताया कि जानकारी मिलते ही ऐप हटा दिए गए। उन्होंने ऐप स्टोर्स को भी सख्त हिदायत दी है।

स्टोर्स को हर ऐप की गहराई से जांच करनी होगी। फर्जी और खतरनाक ऐप को प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं मिलनी चाहिए। सरकार अभी इस गड़बड़ी के तकनीकी कारणों की पूरी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर आम आदमी की रोजी-रोटी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी है। लाखों ई-रिक्शा चालक रोज इस वाहन से कमाई करते हैं। किसी शरारती चीनी एप के कारण उनका काम रुक जाना गंभीर मसला है। यह खबर बताती है कि डिजिटल तकनीक का गलत इस्तेमाल आम नागरिक को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है।

साथ ही यह सरकार की सतर्कता और साइबर कानून की ताकत भी दिखाती है। इससे लोगों को अपने वाहन और डेटा की सुरक्षा समझने में मदद मिलती है। यह जानकारी हर ई-रिक्शा चालक और यूजर के लिए जरूरी है ताकि वे खुद को ऐसी घटनाओं से बचा सकें।

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