15 अगस्त के बाद होगी नए CS के साथ CM मोहन की पहली कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस

Sourabh Bhatnagar | Aug 01, 2026, 10:01 IST
collector commissioner conference mp
मध्य प्रदेश में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस 15 अगस्त के बाद होगी। सीएम मोहन यादव और नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल मिलकर बैठक लेंगे। इस बार लंबे एजेंडे की जगह जरूरी मुद्दों पर ही चर्चा होगी। भोपाल में करीब 200 अफसर जुटेंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस 15 अगस्त के बाद होगी।
  • सीएम मोहन यादव खुद इस बार बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
  • नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के कार्यकाल की यह पहली कॉन्फ्रेंस होगी।
  • 71 बिंदुओं की जगह अब सिर्फ जरूरी मुद्दों पर चर्चा होगी।
  • भोपाल में प्रदेशभर से करीब 200 अफसर शामिल होंगे।

मध्य प्रदेश में इस बार कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस का अंदाज बदला हुआ रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। उनके साथ नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल भी मौजूद रहेंगे। यह बैठक 15 अगस्त के बाद आयोजित होगी। संभावना है कि यह कॉन्फ्रेंस 20 अगस्त के आसपास हो सकती है। बैठक के लिए भोपाल का कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर या समागम केंद्र प्रस्तावित है। यह नए मुख्य सचिव के कार्यकाल की पहली कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस होगी।



क्यों बदला गया प्लान

शुरुआत में तय हुआ था कि यह बैठक सिर्फ मुख्य सचिव लेंगे। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने भी खुद उपस्थित रहने की इच्छा जताई। इसके बाद पूरे कार्यक्रम में बदलाव किया गया। अधिकारियों ने नए सिरे से कार्ययोजना तैयार की है। अब सीएम और सीएस दोनों मिलकर समीक्षा करेंगे।



लंबा एजेंडा नहीं, सटीक चर्चा

इस बार बैठक का तरीका भी अलग होगा। पहले करीब 71 बिंदुओं पर लंबी चर्चा होती थी। इस बार सिर्फ जरूरी और सटीक मुद्दों पर बात होगी। अधिकारी इसे पिन-पॉइंटेड चर्चा कह रहे हैं। बैठक तय समय में पूरी करने की कोशिश रहेगी। मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी विभागों को निर्देश भेज दिए हैं। हर विभाग से कामकाज की प्रगति रिपोर्ट (Progress Report) मांगी गई है। यह रिपोर्ट बैठक से पहले जमा करनी होगी।



किन मुद्दों पर होगी समीक्षा

कॉन्फ्रेंस में कानून व्यवस्था पर खास ध्यान रहेगा। जिलों में शांति और सुरक्षा की स्थिति परखी जाएगी। जनकल्याणकारी योजनाएं जमीन पर कितनी असरदार हैं, इसकी समीक्षा होगी। जन-विश्वास अभियान की प्रगति भी देखी जाएगी। इस अभियान के तहत अफसर हर शुक्रवार मैदान में जाते हैं। वे बैठकों से दूरी बनाकर सीधे जनता से मिलते हैं। इसका मकसद आम लोगों की समस्याएं जल्दी सुलझाना है।



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जिलों के प्रशासनिक कामकाज की रैंकिंग भी तैयार होगी। यह रैंकिंग जिलों के परफॉर्मेंस के आधार पर बनेगी। इसके अलावा जमीन से जुड़े मुद्दों पर भी बात होगी। पट्टा वितरण और अवैध कॉलोनियों के प्रबंधन की समीक्षा होगी। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की प्रगति भी परखी जाएगी। बैंकर्स (Bankers) की मासिक और त्रैमासिक बैठकों का हाल भी देखा जाएगा। रोजगार और स्वरोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। कलेक्टर और एसडीएम (SDM) द्वारा तहसील निरीक्षण की समीक्षा भी होगी। हर महीने होने वाली राजस्व समीक्षा पर भी नजर रहेगी।



3 अगस्त तक भेजने होंगे एजेंडा

राज्य सरकार ने सभी विभाग प्रमुखों को साफ निर्देश दिए हैं। हर विभाग को अपने तीन एजेंडा बिंदु भेजने हैं। यह जानकारी 3 अगस्त तक भेजनी होगी। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर बैठक का एजेंडा तय होगा।



200 से ज्यादा अफसर आएंगे भोपाल

कॉन्फ्रेंस में भोपाल पहुंचने वाले अफसरों की संख्या (एसपी कलेक्टर कांफ्रेंस) भी बड़ी होगी। प्रदेशभर से करीब 200 से ज्यादा अधिकारी शामिल होंगे। इनमें सभी 10 संभागायुक्त शामिल रहेंगे। साथ ही 55 जिलों के कलेक्टर भी मौजूद रहेंगे। सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक भी बुलाए गए हैं। जिला पंचायत के सीईओ (CEO) भी बैठक में आएंगे। प्रमुख नगर निगम आयुक्तों को भी बुलाया गया है। इतनी बड़ी संख्या में अफसरों का जुटना बैठक की गंभीरता दिखाता है।



योजनाओं की समीक्षा होगी

बैठक में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गहराई से चर्चा होगी। पेंशन योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा होगी। सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों का हाल देखा जाएगा। लोक सेवा गारंटी योजना के काम की गति भी परखी जाएगी। जनसुनवाई में लंबित मामलों की जानकारी भी ली जाएगी। राजस्व से जुड़े मामलों के निपटारे पर भी बात होगी। इन सभी बिंदुओं के आधार पर अफसरों का प्रदर्शन आंका जाएगा।



बारिश और विकास कार्यों पर बात

बारिश के मौसम में आने वाली दिक्कतों पर भी चर्चा तय है। जलभराव, सड़क और बिजली से जुड़ी समस्याओं पर बात होगी। इनके समाधान को लेकर भी अफसरों से सुझाव मांगे जाएंगे। विकास कार्यों की रफ्तार की समीक्षा भी बैठक में होगी। कई जिलों में योजनाओं की प्रगति धीमी बताई जा रही है। इस पर भी कड़ा रुख अपनाया जा सकता है।



अफसरों को मिलेगा साफ संदेश

मुख्यमंत्री कॉन्फ्रेंस में अफसरों को साफ संदेश देंगे। बेहतर प्रशासन और तेज कामकाज पर जोर रहेगा। आम जनता की समस्याओं का जल्दी समाधान करने को कहा जाएगा। सरकार चाहती है कि योजनाओं का फायदा सीधे लोगों तक पहुंचे। इसके लिए अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी। आने वाले दिनों में इसका असर जमीनी स्तर पर दिख सकता है।



क्यों अहम है यह कॉन्फ्रेंस

कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस को मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। हर कुछ महीनों में यह बैठक होती है। इसमें जिलों के कामकाज की सीधी समीक्षा होती है। सीएम और सीएस के सामने अफसरों को अपनी रिपोर्ट देनी होती है। इसी वजह से इस बैठक को गंभीरता से लिया जाता है। पिछली कई कॉन्फ्रेंस में एजेंडा काफी लंबा रहता था। इस बार सरकार ने इसे छोटा और असरदार बनाने का फैसला किया है।



नए सीएस के सामने चुनौती

नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के लिए भी यह बड़ा मौका है। पहली बार वे इस स्तर की बैठक की अगुवाई करेंगे। उनके सामने प्रशासनिक सुधार को गति देने की चुनौती रहेगी। सूत्रों के मुताबिक हर विभाग को अपने काम का हिसाब देना होगा। जो विभाग पिछड़े मिलेंगे, उनसे सख्त सवाल पूछे जा सकते हैं। सरकार का मकसद है कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें। अफसरों को जमीनी हकीकत के साथ रिपोर्ट देनी होगी।



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