राहुल गांधी से बोले कांग्रेस जिलाध्यक्ष- संगठन चलाने में सांसद, विधायकों के वेतन से दें हिस्सा
Sanjay Gupta | Apr 04, 2025, 12:51 IST
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कांग्रेस पार्टी ने 2025 को संगठन वर्ष के रूप में घोषित किया है, और इसके तहत राहुल गांधी ने सात राज्यों के जिलाध्यक्षों से दिल्ली में लंबी बैठक की। बैठक में जिलाध्यक्षों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए...
लोकसभा में विपक्ष केनेता राहुल गांधी ने साल 2025 को कांग्रेस के संगठन साल के रूप में तय किया है। इस संबंध में उन्होंने सात राज्यों के जिलाध्यक्षों से दिल्ली में गुरुवार को दो घंटे तक लंबी चर्चा की। इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष कांग्रेस मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव केसी वेणुगोपाल व अन्य तीन से चार घंटे तक बैठे। इसमें दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान, मप्र, गुजरात, महाराष्ट्र के तीन सौ से ज्यादा जिलाध्यक्ष शामिल हुए। इसमें खुलकर उन्होंने सुझाव दिए। इंदौर से शहराध्यक्ष सुरजीत सिंह चड्ढा और जिलाध्यक्ष सदाशिव यादव शामिल हुए।
जिलाध्यक्षों ने साफ कहा कि जो चले गए वह गए, वे गद्दार थे, उन्हें अब वापस नहीं लिया जाए। जो यहां बैठे हैं वही बची हुई सही कांग्रेस हैं। उन्हें लेंगे तो हम विरोध करेंगे। यह भी कहा कि गठबंधन चुनाव के समय नहीं किया जाए, इससे हमारे लोगों को हिस्सा नहीं मिलता है। महाराष्ट्र चुनाव में अधिकांश हिस्सा एनसीपी ले गई।
जिलाध्यक्ष ने यह मांग भी उठाई कि एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस में इलेक्शन सिस्टम से अध्यक्ष पदाधिकारी बनाने का सिस्टम तत्काल रद्द हो। इसके चलते वह किसी की सुनते नहीं हैं और अपने हिसाब से ही चलते हैं।
बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी को कहा कि यह बैठक में आए सुझावों पर कांग्रेस काम करेगी। इस साल कोई चुनाव नहीं है और कांग्रेस साल 2025 में पूरा समय संगठन के लिए दे रही है। हर 15 दिन में कोई ना कोई कार्यक्रम आपके पास आएगा, पूरा सिस्टम से संगठन चलेगा। कांग्रेस अपनी संपत्तियों की भी जानकारी जुटा रही है। इससे आगे जाकर आय के भी संसाधन जुटाए जाएंगे।
जिलाध्यक्षों ने यह दिए सुझाव
- जिलाध्यक्ष को अधिकार संपन्न किया जाए और वह अपनी कार्यकारिणी, ब्लॉक अध्यक्ष, वार्ड अध्यक्ष नियुक्त कर सकें।
- संगठन चलाने में समस्या आती है, फंड की कमी है, सांसद और विधायक वेतन से एक हिस्सा संगठन को उपलब्ध कराएं।
- कोई भी बड़ा नेता, पीसीसी संगठन को लेकर कभी यह नहीं पूछता है कि कोई जरूरत तो नहीं है। जिलाध्यक्ष को ही सभी व्यवस्थाएं खुद करना होती है।
- विधानसभा चुनाव में टिकट तय करते समय जिलाध्यक्ष की राय अहम हो।
- पार्षद टिकट तय करने में भी सबसे अहम भूमिका जिलाध्यक्ष की हो।
- जिलाध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल किया जाए, जिस तरह सांसद, विधायक का होता है।
- जिसे चुनाव नहीं लड़ना हो उन्हें ही जिलाध्यक्ष पद दिया जाए।
गद्दारों को ना लें, चुनाव में गठबंधन नहीं करें
एनएसयूआई , यूथ कांग्रेस में इलेक्शन सिस्टम खत्म हो
इन सभी पर काम करेगा संगठन
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