दतिया विधायक घनश्याम सिंह के चुनाव पर सवाल, हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस, FIR की जानकारी छिपाने का आरोप

Arohi Raj | Oct 16, 2026, 16:03 IST
भाजपा नेता और वकील दीपक बेलपत्री ने हाईकोर्ट में दतिया विधायक घनश्याम सिंह के चुनाव पर सवाल उठाया है।
मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके चुनाव को ग्वालियर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। आरोप है कि उन्होंने चुनावी शपथ पत्र में पुराने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। शुक्रवार को जस्टिस अमित सेठ की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने विधायक घनश्याम सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
Trouble may be mounting for Congress MLA Ghanshyam Singh from Datia, Madhya Pradesh. His election has been challenged in the Gwalior High Court.

चुनावी शपथ पत्र में जानकारी छिपाने का आरोप

भाजपा नेता और वकील दीपक बेलपत्री ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच में याचिका दायर की है। इसमें घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप है कि जुलाई 2026 के विधानसभा उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने पूरी जानकारी नहीं दी। उन्होंने अपने चुनावी शपथ पत्र में 1991 के दो कथित आपराधिक मामलों का जिक्र नहीं किया।



याचिकाकर्ता का दावा है कि इन मामलों की जानकारी देना जरूरी था। इसके बावजूद विधायक ने अपने शपथ पत्र में इनका उल्लेख नहीं किया।



1991 में दर्ज FIR को लेकर क्या है विवाद?

याचिका के मुताबिक, 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान चक्काजाम भी किया गया था। आरोप है कि इस मामले में एक FIR दर्ज हुई थी। इसमें करीब 22 लोगों के नाम शामिल थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि घनश्याम सिंह का नाम भी इनमें था।



याचिका में कहा गया है कि इस मामले का चालान अदालत में पेश हो चुका था। इसके बावजूद जुलाई 2026 के उपचुनाव में इसकी जानकारी नहीं दी गई।



हालांकि, घनश्याम सिंह ने उपचुनाव के शपथ पत्र में दो लंबित आपराधिक मामले घोषित किए थे। अब सवाल यह है कि दूसरे कथित मामलों की जानकारी देना जरूरी था या नहीं।



2020 के मामले की जानकारी छिपाने का भी आरोप

याचिका में साल 2020 के एक अन्य आपराधिक मामले का भी जिक्र है। आरोप है कि इस मामले की जानकारी 2023 के विधानसभा चुनाव में नहीं दी गई थी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, घनश्याम सिंह ने उस समय दाखिल इलेक्शन एफिडेविट में इसका उल्लेख नहीं किया था।



इन्हीं आरोपों को लेकर विधायक के निर्वाचन पर सवाल उठाए गए हैं। अब हाईकोर्ट ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है।



पहले जबलपुर हाईकोर्ट में थी याचिका

घनश्याम सिंह के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पहले जबलपुर हाईकोर्ट में दाखिल हुई थी। बाद में इसे ग्वालियर खंडपीठ भेज दिया गया। अब ग्वालियर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है। शुक्रवार को जस्टिस अमित सेठ की बेंच ने विधायक से जवाब मांगा। कोर्ट आगे उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला करेगा।



भाजपा प्रत्याशी को 6,016 वोटों से हराया था

दतिया विधानसभा सीट पर जुलाई 2026 में उपचुनाव हुआ था। इसके लिए 30 जुलाई को मतदान कराया गया था। वहीं 3 अगस्त को चुनाव परिणाम घोषित हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया था। भाजपा की ओर से आशुतोष तिवारी चुनाव मैदान में थे।



घनश्याम सिंह ने आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया था। इसके बाद वे दतिया से विधायक चुने गए थे।



क्या घनश्याम सिंह की विधायकी पर पड़ेगा असर?

फिलहाल घनश्याम सिंह की विधानसभा सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ा है। हाईकोर्ट ने केवल नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। अदालत को अब यह तय करना है कि शपथ पत्र में जानकारी छिपाने के आरोप सही हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कथित जानकारी नहीं देने से चुनाव की वैधता प्रभावित होती है या नहीं।



FAQs



  1. दीपक बेलपत्री ने हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की है?
    दीपक बेलपत्री ने आरोप लगाया है कि घनश्याम सिंह ने अपने चुनावी शपथ पत्र में 1991 के दो कथित आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई है, जिसके कारण उनके निर्वाचन को चुनौती दी गई है।
  2. घनश्याम सिंह पर कौन-से आपराधिक मामले का आरोप है?
    घनश्याम सिंह पर 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए प्रदर्शन से संबंधित एक FIR में नाम होने का आरोप है, जिसमें 22 लोगों के नाम शामिल थे।
  3. हाईकोर्ट ने घनश्याम सिंह को क्या निर्देश दिया है?
    हाईकोर्ट ने घनश्याम सिंह को नोटिस जारी किया है और उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए जवाब देने का निर्देश दिया है। अदालत यह तय करेगी कि शपथ पत्र में जानकारी छिपाने के आरोप सही हैं या नहीं।
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