मप्र के सीएम पर फैसला सोमवार को, बीजेपी क्या नए चेहरे पर लगाएगी दांव?, विजयवर्गीय का शिवराज से मिलने से बढ़ा सस्पेंस
Jitendra Shrivastava | Dec 10, 2023, 24:00 IST
मप्र के सीएम पर फैसला सोमवार को, बीजेपी क्या नए चेहरे पर लगाएगी दांव?, विजयवर्गीय का शिवराज से मिलने से बढ़ा सस्पेंस
मध्यप्रदेश बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायक सोमवार को विधायक दल की बैठक में सीएम के नाम का चुनाव करेंगे।
BHOPAL. मध्यप्रदेश बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायक सोमवार को सीएम के फैसले पर बैठक करेंगे। विधायक दल की बैठक में नेता का चुनाव किया जाएगा। बैठक सोमवार शाम 3.50 बजे शुरू होगी। बैठक के तत्काल बाद सीएम के नाम की घोषणा हो सकती है। इसी बीच विधायक दल की बैठक से एक दिन पहले ही विजयवर्गीय अचानक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने सीएम आवास पहुंच गए। बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के शिवराज सिंह चौहान से मिलने से अटकलें तेज हो गई हैं।
बीजेपी की जीत के पीछे मोदी मैजिकः विजयवर्गीय
इस मुलाकात के कई मायने निकाले जाने के साथ ही सस्पेंस बढ़ गया है कि क्या बीजेपी सीएम पद पर शिवराज के चेहरे पर ही भरोसा जताएगी या किसी नए चेहरे को आजमाएगी। बता दें कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी की जीत के तुरंत बाद एक बयान देकर चौंका दिया था। विजयवर्गीय ने कहा था कि बीजेपी की जीत के पीछे मोदी मैजिक है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना को जीत का क्रेडिट देने से इनकार करते हुए सवाल किया था कि क्या लाड़ली बहना योजना छत्तीसगढ़, राजस्थान में थी? छत्तीसगढ़ की जीत तो बहुत बड़ी है। विजयवर्गीय ने शिवराज के योगदान पर भी बात नहीं की थी।
एमपी में 48 फीसदी ओबीसी आबादी पर लेंगे फैसला?
BJP ने शिवराज सिंह चौहान को अपने सीएम चेहरे के रूप में पेश किए बिना चुनाव लड़ा था। शिवराज सिंह चौहान चार बार से सीएम हैं। वह 2005, 2008, 2013 और 2020 में सीएम पद की शपथ ले चुके हैं। शिवराज सिंह चौहान अन्य पिछड़ा वर्ग से रहे हैं। एमपी में ओबीसी की आबादी करीब 48 फीसदी है। यही वजह है कि शिवराज सिंह चौहान को अभी भी सीएम पद की रेस में प्रमुखता से गिना जा रहा है। सीएम पद की रेस में नरेंद्र तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, वीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी माना जा रहा है। तोमर, विजयवर्गीय, शर्मा और सिंधिया पहले ही दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं।
2005 में राजनाथ सिंह पर्यवेक्षक के रूप में आए थे
साल 2004 के बाद से यह तीसरी बार है जब बीजेपी ने एमपी में केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजे हैं। अगस्त 2004 में जब उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था तब पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रमोद महाजन और अरुण जेटली को राज्य में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में भेजा गया था। इसके बाद नवंबर 2005 में जब बाबूलाल गौर ने सीएम पद छोड़ा था तो विधायकों को नया मुख्यमंत्री चुनने में मदद करने के लिए राजनाथ सिंह को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में भेजा गया था। उस वक्त शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना गया था।
बीजेपी की जीत के पीछे मोदी मैजिकः विजयवर्गीय
इस मुलाकात के कई मायने निकाले जाने के साथ ही सस्पेंस बढ़ गया है कि क्या बीजेपी सीएम पद पर शिवराज के चेहरे पर ही भरोसा जताएगी या किसी नए चेहरे को आजमाएगी। बता दें कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी की जीत के तुरंत बाद एक बयान देकर चौंका दिया था। विजयवर्गीय ने कहा था कि बीजेपी की जीत के पीछे मोदी मैजिक है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना को जीत का क्रेडिट देने से इनकार करते हुए सवाल किया था कि क्या लाड़ली बहना योजना छत्तीसगढ़, राजस्थान में थी? छत्तीसगढ़ की जीत तो बहुत बड़ी है। विजयवर्गीय ने शिवराज के योगदान पर भी बात नहीं की थी।
एमपी में 48 फीसदी ओबीसी आबादी पर लेंगे फैसला?
BJP ने शिवराज सिंह चौहान को अपने सीएम चेहरे के रूप में पेश किए बिना चुनाव लड़ा था। शिवराज सिंह चौहान चार बार से सीएम हैं। वह 2005, 2008, 2013 और 2020 में सीएम पद की शपथ ले चुके हैं। शिवराज सिंह चौहान अन्य पिछड़ा वर्ग से रहे हैं। एमपी में ओबीसी की आबादी करीब 48 फीसदी है। यही वजह है कि शिवराज सिंह चौहान को अभी भी सीएम पद की रेस में प्रमुखता से गिना जा रहा है। सीएम पद की रेस में नरेंद्र तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, वीडी शर्मा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी माना जा रहा है। तोमर, विजयवर्गीय, शर्मा और सिंधिया पहले ही दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं।
2005 में राजनाथ सिंह पर्यवेक्षक के रूप में आए थे
साल 2004 के बाद से यह तीसरी बार है जब बीजेपी ने एमपी में केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजे हैं। अगस्त 2004 में जब उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था तब पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रमोद महाजन और अरुण जेटली को राज्य में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में भेजा गया था। इसके बाद नवंबर 2005 में जब बाबूलाल गौर ने सीएम पद छोड़ा था तो विधायकों को नया मुख्यमंत्री चुनने में मदद करने के लिए राजनाथ सिंह को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में भेजा गया था। उस वक्त शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना गया था।
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