अचानक आए सैलाब में बही जलती चिता, शव निकालकर दोबारा करना पड़ा संस्कार
Anjali Dwivedi | Jul 04, 2026, 17:14 IST
धार में बह गई अंतिम संस्कार की चिता
धार के जामला में अंतिम संस्कार के दौरान नाले में अचानक पानी बढ़ने से जलती चिता बह गई। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अधजला शव निकाला और दूसरी जगह चिता सजाकर दोबारा अंतिम संस्कार किया।
मध्य प्रदेश के धार जिले के आदिवासी अंचलजामला गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई। बुजुर्ग बापूसिंह के अंतिम संस्कार के दौरान अचानक नाला उफान पर आ गया।
नाले का बहाव इतना तेज था कि जलती चिता ही बह गई। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अधजला शव बाहर निकाला। इसके बाद दूसरी जगह चिता सजाकर दोबारा अंतिम संस्कार पूरा किया।
यह घटना नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र में घटी है। जहां वर्षों से विकास के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन आज भी ग्रामीणों को सम्मान जनक अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी सुविधा नसीब नहीं हो पा रही है।
बापूसिंह के निधन के बाद परिजन उन्हें गांव के मुक्तिधाम लेकर पहुंचे। वहां उन्हें मुखाग्नि दी गई। कुछ ही देर बाद पास का पहाड़ी नाला अचानक उफान पर आ गया।
देखते ही देखते तेज पानी चिता को अपने साथ बहाने लगा। यह देखकर परिजन और वहां मौजूद ग्रामीण स्तब्ध रह गए। किसी को समझ नहीं आया कि अचानक क्या हो गया।
गम और बेबसी के बीच कुछ ग्रामीण पानी में उतर गए। उन्होंने बहते हुए अधजले शव को बाहर निकाला। इसके बाद सुरक्षित स्थान पर दोबारा चिता तैयार की गई।वहां विधिवत तरीके से अंतिम संस्कार पूरा कराया गया। ग्रामीणों की इस सूझबूझ से बड़ी अनहोनी टल गई।
इस घटना ने आदिवासी क्षेत्र में विकास की असली तस्वीर सामने रख दी है। सवाल उठता है कि मुक्तिधाम उफनते नाले के किनारे क्यों बनाया गया। क्या निर्माण से पहले सुरक्षा और भौगोलिक हालात का आकलन नहीं हुआ। बारिश के मौसम में अगर अंतिम संस्कार भी सुरक्षित नहीं, तो सवाल जायज हैं।
घटना के बाद ग्राम पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधि खामोश नजर आए। सरपंच प्रतिनिधि कैलाश भंवर ने विस्तृत जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि गांव में एक बुजुर्ग की मृत्यु हुई थी। इससे ज्यादा उन्होंने कुछ स्पष्ट नहीं किया।
इस घटना के बाद गांव में लोगों का गुस्सा साफ नजर आया। ग्रामीणों का कहना है कि जीवित रहते सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उनका दर्द है कि मृत्यु के बाद भी सम्मानजनक विदाई नसीब नहीं होती। यह बात उन्हें सबसे ज्यादा आहत कर रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से ठोस मांग रखी है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित मुक्तिधाम बनाया जाए। वे चाहते हैं कि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी पीड़ादायक स्थिति का सामना न करना पड़े। यह घटना सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है।
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नाले का बहाव इतना तेज था कि जलती चिता ही बह गई। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अधजला शव बाहर निकाला। इसके बाद दूसरी जगह चिता सजाकर दोबारा अंतिम संस्कार पूरा किया।
कहां हुई यह घटना
धार में जलती चिता बहा ले गई बाढ़!
मध्य प्रदेश के धार जिले के जामला गांव में अंतिम संस्कार के दौरान भारी बारिश से नाले में अचानक बाढ़ आ गई। उफनते पानी के श्मशान घाट में घुसने से मची अफरा-तफरी, पानी में बहने लगी जलती चिता।#MadhyaPradesh #Dhar #MonsoonUpdate #MPNews pic.twitter.com/YgumyWFCzu
— TheSootr (@TheSootr) July 4, 2026
मुखाग्नि के बाद आया उफान
देखते ही देखते तेज पानी चिता को अपने साथ बहाने लगा। यह देखकर परिजन और वहां मौजूद ग्रामीण स्तब्ध रह गए। किसी को समझ नहीं आया कि अचानक क्या हो गया।
गम और बेबसी के बीच कुछ ग्रामीण पानी में उतर गए। उन्होंने बहते हुए अधजले शव को बाहर निकाला। इसके बाद सुरक्षित स्थान पर दोबारा चिता तैयार की गई।वहां विधिवत तरीके से अंतिम संस्कार पूरा कराया गया। ग्रामीणों की इस सूझबूझ से बड़ी अनहोनी टल गई।
विकास के दावों पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्राम पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधि खामोश नजर आए। सरपंच प्रतिनिधि कैलाश भंवर ने विस्तृत जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि गांव में एक बुजुर्ग की मृत्यु हुई थी। इससे ज्यादा उन्होंने कुछ स्पष्ट नहीं किया।
ग्रामीणों में गहरा आक्रोश
ग्रामीणों ने प्रशासन से ठोस मांग रखी है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित मुक्तिधाम बनाया जाए। वे चाहते हैं कि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी पीड़ादायक स्थिति का सामना न करना पड़े। यह घटना सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है।
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