1 मई से शरू होगी डिजिटल जनगणना, गलत जानकारी देने पर तीन साल की सजा

राजधानी भोपाल समेत पूरे राज्य में 1 मई से डिजिटल जनगणना शुरू होने जा रही है। इसमें भाग लेना कानूनी तौर पर अनिवार्य होगा। जानकारी देने से मना करने पर 3 साल की सजा या जुर्माना हो सकता है।

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Aman Vaishnav
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digital census bhopal mp may 2026

News In Short

  • 1 मई से भोपाल समेत पूरे प्रदेश में डिजिटल जनगणना शुरू होगी।
  • इस बार जनगणना पेपरलेस होगी, मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा किया जाएगा।
  • गलत जानकारी देने पर 1 हजार रुपए जुर्माना या 3 साल की सजा हो सकती है।
  • तीन डेटा सेंटर बनाए गए हैं, जहां आपकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

News IN Detail

राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में 1 मई से डिजिटल जनगणना शुरू होने जा रही है। इसमें हिस्सा लेना सिर्फ जरूरी नहीं बल्कि कानूनी तौर पर अनिवार्य है। कोई व्यक्ति जानकारी देने से मना करता है या झूठी जानकारी देता है, तो उसे जनगणना कानून के तहत 3 साल की सजा या जुर्माना हो सकता है।

भोपाल में इस जनगणना पर काम करने वाले अधिकारियों की ट्रेनिंग 16 फरवरी से शुरू हो जाएगी। इस महाभियान की जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर भुवन गुप्ता को सौंपी गई है।

सरकारी कर्मचारी (प्रगणक) मोबाइल ऐप के जरिए तीन चरणों में मकान, परिवार और व्यक्तिगत जानकारी लेंगे। इस डेटा को रियल-टाइम में सुरक्षित पोर्टल्स पर अपलोड किया जाएगा।

पहली बार पेपरलेस प्रक्रिया होगी

जनगणना के दौरान हर 1000 लोगों पर एक प्रगणक (गिनती करने वाला) होगा जो घर-घर जाकर जानकारी जुटाएगा। प्रगणक सबसे पहले मकान की जानकारी दर्ज करेगा। इसके बाद परिवार से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। आखिरी में व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाएगी।

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए जानकारी दर्ज होगी। डेटा रियल-टाइम में पोर्टल पर अपलोड होगा। यह पहली बार पूरी तरह पेपरलेस तरीके से होने वाली जनगणना है। प्रक्रिया पेपरलेस यानी कागज रहित रहेगी। जाति से जुड़ा डेटा भी इसी तरीके से अपडेट किया जाएगा।

ऐसे पता करें प्रगणक कौन है

आपको पता करना है कि आपके प्रगणक कौन है तो, इनकी पहचान के लिए हर इलाके के तहसीलदार एक खास फॉर्मेट का आईडी कार्ड देंगे। इससे पहचान करना आसान हो जाएगा। जनगणना में काम करने वाले कर्मचारियों को अलग से मानदेय भी मिलेगा।

सवालों का जवाब देना जरूरी

जनगणना के लिए 33 जरूरी सवालों के जवाब लिए जाएंगे। इसके अलावा, मकान की सूची बनाने के लिए भी कुछ सवाल पूछे जाएंगे। हर व्यक्ति को इन सवालों का जवाब देना जरूरी होगा। जनगणना अधिनियम 1948 के नियम 1990 की धारा-11 के तहत सभी को यह जानकारी देना अनिवार्य है।

गलत जानकारी देने पर क्या होगा?

यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देता है तो उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम 1990 के तहत दंड का प्रावधान किया गया है। गलत जानकारी देने वाले व्यक्ति को 3 साल की कैद या एक हजार रुपए जुर्माना या फिर दोनों ही सजा मिल सकती है।

जानकारी सुरक्षित रहे इसलिए तीन डेटा सेंटर बनाए

आपसे जो भी जानकारी ली जाएगी वह पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। आपकी जानकारी किसी भी व्यक्ति से शेयर नहीं की जाएगी। इसके लिए देश में तीन जगहों पर डेटा सेंटर बनाए गए हैं। एक बेंगलुरु, दूसरा लखनऊ और तीसरा नई दिल्ली में है।अच्छी बात ये है कि यह डेटा सिर्फ संबंधित विभाग के अफसर ही देख सकते हैं। बाकी लोगों को इसका एक्सेस नहीं मिलेगा।

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एमपी न्यूज डिप्टी कलेक्टर डेटा सेंटर राजधानी भोपाल डिजिटल जनगणना
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