EWS आरक्षण गलत तरीके से लागू हुआ, भोपाल के शख्स का राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को पत्र
Pawan Modiya | Jun 19, 2026, 23:34 IST
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भोपाल के आर.बी. प्रजापति ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने EWS आरक्षण की गणना और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में 103वें संविधान संशोधन और केंद्र सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए नियमों की समीक्षा की मांग की गई है।
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के आर.बी. प्रजापति ने 8 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है।
- उन्होंने आरोप लगाया है कि EWS आरक्षण संविधान के अनुसार नहीं, बल्कि गलत तरीके से लागू किया गया।
- उनका कहना है कि SC, ST और OBC को भी इस 10% कोटे में हिस्सा मिलना चाहिए था।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में इस आरक्षण को वैध माना था और कहा था कि अनुसूचित जातियों को बाहर नहीं किया जा सकता।
- तीन साल में तीन बार शिकायत कर चुके प्रजापति को अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
भोपाल निवासी ने उठाई आवाज
प्रजापति का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 16(6) और 103वें संशोधन अधिनियम 2019 के तहत EWS आरक्षण को हर श्रेणी में अलग-अलग लागू किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार सही गणना इस तरह होनी चाहिए थी। SC (Scheduled Castes) से 1.50%, ST (Scheduled Tribes) से 0.75%, SEBC (Socially and Educationally Backward Classes) से 2.70% और अनारक्षित वर्ग से 5.05%, इस तरह कुल 10% का आंकड़ा पूरा होता।
लेकिन उनका आरोप है कि नौकरशाही ने इसे केवल अनारक्षित वर्ग के लिए 10% के रूप में लागू किया। उनके मुताबिक यह संसद की मंशा के खिलाफ है और संविधान का उल्लंघन भी है।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला
तीन बार पत्र, जवाब एक भी नहीं
क्या होगा आगे
जरूरी FAQ*
EWS आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10% कोटा है। यह 103वें संविधान संशोधन अधिनियम 2019 के तहत लागू किया गया। इसका लाभ उन्हें मिलता है जिनकी पारिवारिक आय 8 लाख रुपये सालाना से कम है।
प्रजापति का आरोप क्या है और वे क्या चाहते हैं?
प्रजापति का कहना है कि EWS कोटे को केवल सामान्य वर्ग तक सीमित रखा गया, जबकि संविधान के अनुसार SC, ST और OBC को भी इसमें हिस्सा मिलना चाहिए था। वे DOPT और सामाजिक न्याय मंत्रालय के 31 जनवरी 2019 के ज्ञापन में संशोधन चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण पर क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2022 में EWS आरक्षण को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि SC, ST और SEBC को इस कोटे से बाहर नहीं किया जा सकता।
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