एमपी में गजब का जाति घोटाला: स्कॉलरशिप के लिए ओबीसी और नौकरी पाने बने आदिवासी
BHOPAL. मध्यप्रदेश में जाति घोटाले को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इसमें कुछ लोगों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की है।
जांच में यह सामने आया है कि यहां आठ अभ्यार्थियों ने पहले ओबीसी के कोटे से स्कॉलरशिप ली थी। बाद में इन लोगों ने फर्जी आदिवासी प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की है।
26 अधिकारी और कर्मचारियों की मिली-भगत
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इन अधिकारी और कर्मचारी पर हो रही जांच
- डॉ. दिनेश माझी, जीआरएमसी ग्वालियर
- डॉ. रजनीश, जीआरएमसी ग्वालियर
- डॉ. सीमा माझी, जीआरएमसी ग्वालियर
- डॉ. विनोद बाथम, जीआरएमसी ग्वालियर
- रेखा बाथम, शिक्षक, ग्वालियर
- सुनीता रावत, शिक्षक, ग्वालियर
- सरला माझी, शिक्षक, डबरा
- राजेश केवट, शिक्षक, डबरा
- कुसुम माझी, शिक्षक, डबरा
- जवाहर सिंह केवट, शिक्षक, डबरा
- सीताराम केवट, शिक्षक, डबरा
- दशरथ मीणा, शिक्षक, गुना
- महेंद्र बाथम, फर्मासिस्ट, शिवपुरी
- हाकिम बाथम, ईई, बिजली विभाग, बैतूल
- मनीष गौतम, महाप्रबंधक, बिजली विभाग, बैतूल
- यश कुमार सिंह, जेडी, उद्यान विभाग, दमोह
- हेमंत बाथम, आरक्षक, गुना
- बाबूलाल रावत, शिक्षक, ग्वालियर
- अनिल बाथम, सूबेदार, यातायात, श्योपुर
- नाहर सिंह, आरक्षक, शिवपुरी
- लोकेंद्र सिंह, आरक्षक, 25वीं बटालियन, भोपाल
- देवीलाल ढीमर, स्टेनो, न्यायालय, राजगढ़
- भागीरथी माझी, स्टेनो, न्यायालय, गुना
- अनुपम माझी, स्टेनो, न्यायालय, गुना
- उपनिरीक्षक गीतिका बाथम, भोपाल
- महेश बाथम, आरक्षक, शिवपुरी
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क्या है मुख्य आरोप?
जांच में यह पता चला है कि आरोपियों ने फर्जी आदिवासी प्रमाण पत्र बनवाए थे। इन प्रमाण पत्रों से उन्होंने सरकारी नौकरी भी हासिल की थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनका सत्यापन भी धोखाधड़ी से हुआ था। अब इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की जा रही है। इस मामले में और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र की खबर पर एक नजर...
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कोर्ट तर पहुंचा मामला
इसको लेकर एसटीएफ ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला दर्ज किया था। इसके बाद आरोपी पक्ष ने न्यायालय में भी याचिका लगा दी थी। इसकी सुनवाई में पुलिस ने अपना पक्ष रखा है।
पुलिस ने बताया कि जिन प्रमाण पत्रों पर आरोपी सरकारी पदों पर काम कर रहे हैं, वे असली नहीं थे। ये प्रमाण पत्र संबंधित कार्यालयों से जारी नहीं हुए थे, इसलिए यह पूरी तरह से जालसाजी है। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी।
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आदिवासी कोटे में गड़बड़ी
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग फर्जी प्रमाण पत्र इस्तेमाल कर रहे थे। पहले वे ओबीसी प्रमाण पत्र से शिक्षा में लाभ ले रहे थे। बाद में उन्होंने आदिवासी प्रमाण पत्र का उपयोग करके सरकारी नौकरी भी हासिल की थी।
आदिवासी वर्ग के लिए नौकरी में शिक्षा की आर्हताएं ओबीसी से कम होते हैं। इसलिए कुछ ओबीसी उम्मीदवार फर्जी प्रमाण पत्र का सहारा लेते हैं।
आरोपियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
एसटीएफ के एसपी राजेश भदौरिया ने बताया कि जांच की प्रक्रिया अभी जारी है। पुलिस ने भी अपने पक्ष में सबूत पेश किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, इस घोटाले में शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।