GAD के एक आदेश से छात्रों की मुश्किलें बढ़ीं, कई कॉलेजों की फीस तय नहीं, काउंसलिंग में हो रही परेशान
निजी आयुष कॉलेजों की फीस तय नहीं होने से छात्रों को काउंसलिंग में परेशानी हो रही है। अब सभी को AFRC की बैठक का इंतजार है।
एएफआरसी की बैठक क्यों नहीं हुई
मध्यप्रदेश के निजी प्रोफेशनल कॉलेजों की फीस तय करने वाली व्यवस्था फंस गई है। वजह जीएडी (General Administration Department) का एक अस्पष्ट आदेश है। इस आदेश के बाद AFRC meeting अब तक नहीं हो सकी है।
आदेश 16 सितंबर को जारी हुआ था। इसमें प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति (एएफआरसी) के पुनर्गठन की बात थी। एएफआरसी (Admission and Fee Regulatory Committee) निजी कॉलेजों की फीस तय करती है। पुनर्गठन के आदेश को एक महीना बीत चुका है। एएफआरसी की बैठक नहीं हुई, इसलिए फीस निर्धारण समिति ठप है।
एक्ट में नहीं, फिर भी जुड़ा पद
आदेश में सबसे बड़ी गड़बड़ी सदस्य-सचिव का पद है। प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति एक्ट 2007 में यह पद है ही नहीं। फिर भी जीएडी ने समिति में यह पद जोड़ दिया था।
यह पद तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक या अतिरिक्त संचालक के लिए रखा गया है। पहले समिति में सिर्फ सदस्य हुआ करता था।
अब तक ओएसडी (OSD - Officer on Special Duty) सचिव का काम देखते रहे हैं। ये तकनीकी शिक्षा विभाग से नियुक्त होते हैं। 16 सितंबर के आदेश में शासन ने संचालक को सीधे सदस्य-सचिव लिख दिया था।
गलती पकड़ में आई, फिर क्या हुआ
गलती सामने आने के बाद जीएडी को पत्र भेजे गए थे। पहले समिति के नवनियुक्त चेयरमैन ने पत्र लिखा था। फिर चेयरमैन के ओएसडी ने भी पत्र भेजा था। लेकिन अब तक आदेश में सुधार नहीं हुआ है। समिति की बैठक भी अटकी हुई है।
कानूनी अड़चन कहां फंसी
विधि और वित्त विभाग के प्रतिनिधियों को लेकर भी आदेश साफ नहीं है। आदेश में सचिव या अतिरिक्त सचिव, दोनों विकल्प दे दिए गए। इसलिए तय नहीं है कि बैठक में अधिकृत सदस्य कौन होगा।
वित्त विभाग की तरफ से अतिरिक्त सचिव भेजने पर सहमति आ गई है। पदों की उलझन दूर किए बिना बैठक हुई, तो अड़चन आ सकती है।
ओएसडी का बयान
समिति के ओएसडी डॉ. अनिल शिवानी ने देरी की वजह तकनीकी बताई है। उन्होंने कहा:
अब सबकी नजर जीएडी के जवाब पर है। रास्ता खुलने तक बैठक का इंतजार रहेगा।
छात्रों और अभिभावकों पर असर
इस देरी का सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को हो रहा है। उलझन का असर सीधे दाखिला प्रक्रिया पर पड़ा है। आयुष विभाग के अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए काउंसलिंग चल रही है। इसमें शामिल होने वाले विद्यार्थी परेशान हैं।
सबसे गंभीर बात है कि कई निजी आयुष कॉलेजों की फीस तय नहीं हुई है। निजी आयुष कॉलेज फीस का पता न होने से छात्र उलझन में हैं। उन्हें पता ही नहीं कि कितना पैसा देना होगा।
बिना फीस जाने छात्र च्वाइस लॉकिंग और रिपोर्टिंग करने को मजबूर हैं। यानी वे कॉलेज चुन रहे हैं। लेकिन खर्च का अंदाजा उन्हें नहीं है।
छात्रों और अभिभावकों को डर सता रहा है। उन्हें लगता है कि दाखिले के बाद प्रबंधन मनमानी फीस थोप सकता है।
सोचिए, फीस पता ही न हो तो परिवार पैसे का इंतजाम कैसे करेगा।
आगे क्या होगा
अब गेंद सामान्य प्रशासन विभाग के पाले में है। फैसला वहीं से आना है। वहां से मार्गदर्शन आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। समिति की बैठक भी उसी के बाद संभव है।
MP fee regulatory committee की बैठक होगी, तभी मध्यप्रदेश निजी कॉलेज फीस निर्धारण बढ़ेगा। तब तक MP private college fee का सवाल अनसुलझा रहेगा।