गैस पाइपलाइन को फास्ट ट्रैक, नियमों पर ब्रेक? PWD के आदेश से उठे नए सवाल

Ramanand Tiwari | Apr 06, 2026, 22:34 IST
gas pipeline
मध्यप्रदेश में गैस पाइपलाइन के काम को तेज करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने नए निर्देश जारी किए हैं। इसमें 24 घंटे में मंजूरी, निगरानी शुल्क का समाप्त होना और बैंक गारंटी की सीमित राशि शामिल हैं।

News in short

  • मध्यप्रदेश में शहरी गैस पाइपलाइन बिछाने के नियम आसान किए गए।
  • 24 घंटे में नए आवेदनों का निपटारा होगा, सुपरविजन चार्ज खत्म किया गया।
  • सड़क कटने पर बैंक गारंटी 10 लाख रुपए प्रति किमी तय की गई।
  • ड्रिलिंग तकनीक (HDD) को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे सड़कों को कम नुकसान हो।
  • नए नियम 30 जून 2026 तक लागू रहेंगे, परिणामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

News in Detail

मध्यप्रदेश में अब शहरों में गैस पाइपलाइन ( Gas pipeline ) बिछाने का काम तेजी से होगा। इसके लिए सरकार ने नियम आसान कर दिए हैं। लेकिन इसी तेजी के बीच सवाल भी उठ रहे हैं कि कहीं जल्दबाजी में गुणवत्ता और निगरानी से समझौता तो नहीं हो रहा?



क्या है पूरा मामला?

लोक निर्माण विभाग (PWD) ने शहरी गैस वितरण (CGD) प्रोजेक्ट्स के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। मकसद है काम को तेज करना और कंपनियों को राहत देना। लेकिन फैसलों की टाइमिंग और प्रकृति को लेकर सिस्टम के अंदर ही चर्चा शुरू हो गई है।



24 घंटे में मंजूरी

CGD से जुड़े नए आवेदनों का निपटारा अब एक दिन में करना होगा।



सुपरविजन चार्ज खत्म

विभाग द्वारा लिया जाने वाला निगरानी शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।



बैंक गारंटी सीमित

सड़क कटिंग के मामलों में गारंटी अधिकतम 10 लाख रुपए प्रति किमी तय कर दी गई है।



HDD तकनीक पर जोर

सड़कों को कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए ड्रिलिंग तकनीक को प्राथमिकता दी गई है।



नोडल अधिकारी की नियुक्ति

हर जिले में समन्वय के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी तय किया जाएगा।



मरम्मत की जिम्मेदारी एजेंसी पर

सड़क कटने की स्थिति में सुधार का काम संबंधित कंपनी को करना होगा।



सवाल क्यों उठ रहे हैं?

सबसे बड़ा सवाल 24 घंटे की समयसीमा को लेकर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी जल्दी में तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों की पूरी पड़ताल मुश्किल हो सकती है। वहीं, सुपरविजन चार्ज खत्म होने से विभाग की सीधी निगरानी कमजोर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।



राहत या जोखिम?

सरकार का तर्क है कि इससे निवेश बढ़ेगा और काम में रफ्तार आएगी। दूसरी तरफ यह भी चर्चा है कि कम गारंटी और ढीली निगरानी से सड़कों की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।



कब तक लागू रहेंगे नियम?

ये नई व्यवस्था 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। तब तक यह साफ हो जाएगा कि यह फैसला वाकई सुधार लाता है या फिर सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बनाता है।



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