एमपी की गोशालाओं में 270 करोड़ का निवेश, फिर भी सड़कों पर भटक रहे लाखों पशु
BHOPAL. मध्यप्रदेश में सरकार ने गोशालाओं के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हैं। फिर भी, सड़कों पर अनाथ पशुओं की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। सरकार ने योजनाएं बनाई और बजट भी दिया, लेकिन असर नहीं दिख रहा है।
जमीन पर इन योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाया है। नतीजा ये हुआ कि सड़कों पर पशु घूमते रहते हैं। सरकार के प्रयासों और जमीन पर असल काम में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है।
270 करोड़ का निवेश, फिर भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं
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सड़कों पर सजा की तरह भटक रहे पशु
विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8.50 लाख अनाथ पशु सड़कों पर भटक रहे हैं। ये पशु सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। राज्य सरकार ने इन घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने की योजना बनाई थी। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से अनुबंध हुआ था। योजना के तहत हर 50 किमी पर हाइड्रोलिक लिफ्टर और गोठान बनाने थे।
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नर्मदापुरम में सफल, वहीं बाकी जगह पर सुस्त
यह योजना नर्मदापुरम रोड पर कुछ हद तक सफल रही है। वहीं, बाकी प्रदेशों में इसे लागू नहीं किया जा सका है। विभागीय मंत्री लखन सिंह पटेल ने कहा कि सरकार जल्द ही स्वावलंबी गोशालाओं का निर्माण करेगी। इससे अनाथ पशुओं की समस्या का ठोस समाधान निकाला जा सकेगा। हालांकि, फिलहाल यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
125 एकड़ जमीन पर गोशाला बनाने का था लक्ष्य
राज्य सरकार ने अप्रैल 2025 में स्वावलंबी गोशालाओं बनाने का काम शुरू किया था। अगस्त में इस योजना को लॉन्च किया गया था। योजना के तहत हर जिले में 125 एकड़ जमीन पर गोशाला बनाने का लक्ष्य था। वहीं, अब तक केवल 20 जिलों में ही भूमि का चयन हो पाया है। भोपाल, जबलपुर, दमोह, राजगढ़, मंदसौर और रतलाम में काम शुरू हो चुका है। बाकी जिलों में अभी जमीन की तलाश जारी है।
टैग लगाने का प्रयोग नाकाम
पशुपालन विभाग एमपी ने एक अभियान शुरू किया था। इसमें अनाथ पशुओं के कानों पर टैग लगाया गया था। इसका मकसद था कि पशुओं के मालिकों का पता लगाया जा सके। हालांकि, टैग लगाने पर मालिकों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान था। इसका ग्रामीणों और पशु मालिकों ने विरोध किया था। इसके बाद इस योजना को रोक दिया गया था।