रेल यात्रियों के लिए हमारी सवारी भरोसे वाली, अब QR से मिलेगा ऑटो ड्राइवर का पूरा डेटा
Manya Jain | Jan 03, 2026, 15:39 IST
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GRP इंदौर ने मेघनगर में 'हमारी सवारी-भरोसे वाली' अभियान शुरू किया है। QR कोड से ऑटो ड्राइवर की पहचान कर अब यात्री सुरक्षित सफर का आनंद ले सकेंगे।
MP News:भारतीय रेलवे से सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब यात्रा सुरक्षित और पारदर्शी होगी। इंदौर से शुरू किया गया "हमारी सवारी भरोसे वाली" अभियान अब झाबुआ तक पहुंच गया है।
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इस अभियान को इंदौर, उज्जैन, डॉ. अम्बेडकर नगर और रतलाम में सफलता मिल चुकी है। इसके बाद अब मेघनगर के यात्रियों को भी डिजिटल सुरक्षा मिलेगी। चलिए आपको बताते हैं हम ऐसा क्यों कह रहे हैं...
यात्रियों की सुरक्षा के लिए इंदौर जीआरपी ने यह खास अभियान शुरू किया है। इस सिस्टम के तहत पुलिस ने रेलवे स्टेशन के ऑटो ड्राइवरों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है।
इस डेटाबेस में हर ड्राइवर (auto driver rules)का नाम, मोबाइल नंबर, वाहन संख्या, फोटो और उनके परिवार-रिश्तेदारों की जानकारी शामिल है। ये सारी जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज होती है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
अब इन ऑटो पर क्यूआर कोड लगाया जा रहा है। यात्री क्यूआर कोड स्कैन करके ड्राइवर और वाहन की पूरी जानकारी ले सकेंगे, जिससे उनका सफर और भी सुरक्षित हो सकेगा।
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एसपी पद्मविलोचन शुक्ल ने बताया, यह अभियान केवल यात्रियों के लिए नहीं बल्कि चालकों के लिए भी उतना ही जरूरी है। इस व्यवस्था से ईमानदार चालकों को बेवजह के इल्जामों से राहत मिलेगी। यह चालकों को एक 'वेरिफाइड' और 'भरोसेमंद' पहचान दिलाता है, जिससे उनकी सामाजिक छवि में भी सुधार होगा।
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इस अभियान को इंदौर, उज्जैन, डॉ. अम्बेडकर नगर और रतलाम में सफलता मिल चुकी है। इसके बाद अब मेघनगर के यात्रियों को भी डिजिटल सुरक्षा मिलेगी। चलिए आपको बताते हैं हम ऐसा क्यों कह रहे हैं...
क्या है हमारी सवारी-भरोसे वाली अभियान
इस डेटाबेस में हर ड्राइवर (auto driver rules)का नाम, मोबाइल नंबर, वाहन संख्या, फोटो और उनके परिवार-रिश्तेदारों की जानकारी शामिल है। ये सारी जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज होती है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
अब इन ऑटो पर क्यूआर कोड लगाया जा रहा है। यात्री क्यूआर कोड स्कैन करके ड्राइवर और वाहन की पूरी जानकारी ले सकेंगे, जिससे उनका सफर और भी सुरक्षित हो सकेगा।
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यात्रियों के लिए फायदेमंद
- QR कोड से पहचान: रेलवे स्टेशनों पर उतरने के बाद यात्रियों को अक्सर ऑटो चालकों से विवाद, अधिक किराया या सुरक्षा की चिंता होती थी। इसी समस्या को सुलझाने के लिए 'हमारी सवारी-भरोसे वाली' अभियान शुरू किया गया है।
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- सामान की सुरक्षा: यदि कोई यात्री अपना सामान ऑटो में भूल जाता है, तो स्कैन किए गए डेटा के आधार पर पुलिस तुरंत वाहन और ड्राइवर को ट्रैक कर सकती है।
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- विवाद और शिकायत का समाधान: यदि कोई ड्राइवर तय स्थान पर नहीं छोड़ता या दुर्व्यवहार करता है, तो यात्री के पास पुलिस को देने के लिए सटीक जानकारी उपलब्ध होगी।
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- फीडबैक (Rating System): इस प्रणाली में एक फीडबैक मैकेनिज्म भी शामिल किया गया है। यात्री यात्रा समाप्त होने के बाद ऑटो चालक के व्यवहार और सेवा का मूल्यांकन कर सकेंगे। यह ड्राइवरों को बेहतर सेवा देने के लिए प्रेरित करेगा और जीआरपी को अनुशासन बनाए रखने में मदद करेगा।
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ऑटो चालकों को भी राहत
पटरी की पाठशाला: भिक्षावृत्ति छोड़ अब कल संवारेंगे मासूम
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- शिक्षा और जागरूकता: बच्चों को पोस्टर, कहानियों और खेलों के माध्यम से रेल सुरक्षा, साइबर अपराध और नैतिक शिक्षा दी जा रही है।
- सुरक्षा का पाठ: बच्चों को 'गुड टच-बैड टच' और मोबाइल से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
- भिक्षावृत्ति से मुक्ति: रेलवे परिसर में लावारिस घूमने वाले या व्यावसायिक गतिविधियों में लगे बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण और शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उपयोगिता कॉर्नर
- ऑटो में बैठने से पहले स्कैन करें: सुरक्षा की दृष्टि से हमेशा उसी ऑटो का चयन करें जिस पर 'हमारी सवारी-भरोसे वाली' का क्यूआर कोड लगा हो। बैठने से पहले उसे स्कैन जरूर करें।
- हेल्पलाइन नंबर्स को याद रखें: किसी भी आपात स्थिति में रेलवे हेल्पलाइन 139, पुलिस आपातकालीन नंबर 112 और साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 पर तुरंत कॉल करें।
- पटरी से दूरी बनाएं: 'पटरी की पाठशाला' का संदेश है कि रेलवे ट्रैक को रास्ता न समझें। यह जानलेवा हो सकता है। अपने बच्चों को ट्रैक के पास खेलने से रोकें।
- सजग नागरिक बनें: यदि आपको स्टेशन के आसपास कोई बच्चा असुरक्षित स्थिति में दिखे, तो तुरंत जीआरपी को सूचित करें ताकि 'पटरी की पाठशाला' के माध्यम से उसकी मदद की जा सके।
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