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News in Short
- सात दिन तक लगातार अनुपस्थिति के बाद सेवाएं समाप्ति के संबंध में जारी किया था आदेश।
- आदेश के विरोध में अतिथि शिक्षकों के एकजुट होने के बाद सरकार ने 6 दिन बाद ही इसे वापस ले लिया है।
- लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश को रद्द कर नए निर्देश जारी करने की तैयारी कर ली है।
- 20 फरवरी का आदेश अनुपस्थिति दर्ज करने के लिए ई-अटेंडेंस प्रणाली पर आधारित था।
- अतिथि शिक्षक संगठनों ने इसे "तुगलकी फरमान" करार दिया था और विरोध किया था।
News in Detail
BHOPAL. लगातार सात दिन ई-अटेंडेंस न लगाने पर अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्ति के आदेश को सरकार ने वापस ले लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने छह दिन पहले यह आदेश जारी किया था। जिसके बाद प्रदेश के अतिथि शिक्षक विरोध कर रहे थे।
बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार के आदेश पर स्कूल शिक्षा विभाग यू टर्न लेने पर मजबूर हो गया है। इस संबंध में अब नया आदेश जारी कर पुराने आदेश को रद्द कर दिया गया है।
इसके साथ ही एज्युकेशन पोर्टल 3.0 पर नई गाइडलाइन जारी की जाएगी। 'द सूत्र' ने ई- अटेंडेंस पर स्कूल शिक्षा विभाग के इस आदेश से अतिथि शिक्षकों की नाराजगी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
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अतिथि शिक्षकों को चेतावनी: ई-अटेंडेंस में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
20 फरवरी को जारी हुआ था आदेश
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 20 फरवरी को आदेश जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि लगातार 7 दिन तक ई-अटेंडेंस दर्ज न करने पर अतिथि शिक्षक की सेवा समाप्त की जा सकती है। आदेश के अनुसार, जिन शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इससे पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।
अतिथि शिक्षकों को ई-अटेंडेंस (e attendance) प्रणाली के माध्यम से अपनी दैनिक उपस्थिति दर्ज करनी होती है। वेतन भी इसी आधार पर जारी किया जाता है। विभाग के अनुसार तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या या अन्य कारण बताकर बड़ी संख्या में शिक्षक अनुपस्थित पाए गए हैं। इस आदेश के सामने आने के बाद से ही अतिथि शिक्षक विरोध कर रहे थे।
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विरोध देख बदलना पड़ रुख
डीपीआई संचालक केके द्विवेदी के अनुसार 20 फरवरी को जारी किए गए आदेश को वापस लिया गया है। इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रभारियों को निर्देश दिए हैं। अब स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति के संबंध में नई गाइडलाइन जारी की जाएगी। इसके साथ ही उन अतिथि शिक्षकों की मुश्किल टल गई है जो दूरस्थ अंचल में पदस्थ हैं। इन क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण अकसर उपस्थिति दर्ज करने में दिक्कत खड़ी होती हैं। वहीं ऐसे अतिथि शिक्षकों को फायदा हुआ है जो स्कूल में पढ़ाने से जी चुराते हैं।
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प्रदेशभर में हो रहा था विरोध
शिक्षक संगठनों द्वारा इस आदेश का विरोध किया जा रहा था। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने इसे तुगलकी फरमान करार दिया। उनका कहना था कि जो शिक्षक जानबूझकर अनुपस्थित रहते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई उचित है। इस आदेश से उन अतिथि शिक्षकों पर भी संकट खड़ा हो जाएगा जो बीमारी या अन्य आकस्मिक स्थितियों के कारण अनुपस्थित होंगे। यह नियम किसी भी तरह की अनिवार्य अनुपस्थिति जैसे बीमारी या अन्य अप्रत्याशित कारणों को ध्यान में नहीं रखता था।
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