ग्वालियर में अंबेडकर विवाद: कोर्ट ने अनिल मिश्रा सहित चार को भेजा जेल

Ramanand Tiwari | Jan 03, 2026, 24:07 IST
anil mishra four jail
ग्वालियर में डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर जलाने पर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्हें जेल भेजा गया। दलित संगठनों ने NSA की मांग की है।

BHOPAL. मध्यप्रदेश के ग्वालियर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने और आपत्तिजनक नारेबाजी का मामला बढ़ता जा रहा है। इस घटना ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी और सामाजिक तनाव को गहरा कर दिया है।



पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा भी शामिल हैं। आरोपियों पर FIR दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने अनिल मिश्रा समेत चार आरोपियों को जेल भेज दिया।



पुलिस का तर्क है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित हिंसा रोकने के लिए जरूरी थी। हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कदम पर्याप्त है या फिर देर से उठाया गया।



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कोर्ट पेशी के दौरान शहर हाई अलर्ट

शुक्रवार को आरोपियों की कोर्ट पेशी के दौरान ग्वालियर में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। संवेदनशील हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर रहे। शहर में अतिरिक्त बल तैनात किया गया।



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दलित संगठनों का आक्रोश

दलित संगठनों और BSP ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। आरोपियों पर NSA लगाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह घटना बाबा साहब के सम्मान पर हमला है। यह संविधानिक मूल्यों पर भी हमला है।



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BSP का प्रदर्शन: राज्यपाल के नाम ज्ञापन

BSP ने ग्वालियर कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों पर NSA लगाने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामले फिर से होंगे।



पुराने घटनाक्रमों से जुड़ा है विवाद

यह विवाद अचानक नहीं भड़का। 26 दिसंबर को आकाशवाणी चौराहे पर डॉ. अंबेडकर का पुतला जलाने का प्रयास हुआ। 01 जनवरी को ग्वालियर व्यापार मेले में बाबा साहब की प्रदर्शनी में तोड़फोड़ के आरोप लगे। लगातार घटनाओं ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



वर्ण बनाम अंबेडकर समर्थक

इस मामले ने समाज को दो खेमों में बांट दिया है। सवर्ण संगठनों में पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी है। अंबेडकर समर्थक नेताओं में गुस्सा है कि अब तक NSA जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।



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प्रशासन का जवाब: जांच के बाद निर्णय

ADM सीबी प्रसाद ने ज्ञापन लेते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। प्रशासन का दावा है कि वह संतुलन बनाए रखते हुए कानून के अनुसार फैसला करेगा।



बड़ा सवाल: क्या फैसला सही दिशा में जाएगा?

अब सवाल यह है कि क्या पुलिस की मौजूदा कार्रवाई सामाजिक तनाव को कम कर पाएगी? या फिर NSA जैसे कठोर कदम ही हालात को संभाल सकते हैं? ग्वालियर की यह घटना सिर्फ एक शहर का मुद्दा नहीं है। यह सामाजिक समरसता और कानून के भरोसे की परीक्षा बन चुकी है।



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