भोपाल के हमीदिया में खुले में शव की सिलाई करते दिखे कर्मचारी, इंसानियत शर्मसार
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव को खुले में रखा गया।
- बजरिया थाना क्षेत्र में मिले लावारिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था।
- बुधवार को कर्मचारियों ने खुले आसमान के नीचे शव की सिलाई की।
- बिना कपड़ों के करीब आधे घंटे तक शव स्ट्रेचर पर पड़ा रहा।
- अस्पताल अधीक्षक सुनीत टंडन ने मामले पर जांच के आदेश दिए हैं।
भोपाल में इंसानियत शर्मसार
मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल हमीदिया, भोपाल की पहचान है। वहीं, बुधवार को यहां जो हुआ उसने सबको शर्मसार कर दिया है। बजरिया थाना क्षेत्र में सोमवार को एक 50 वर्षीय व्यक्ति का शव मिला था। पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम (PM) के लिए हमीदिया भेजा था।
बुधवार, 27 मई को अस्पताल का नजारा हैरान कर देने वाला था। दो कर्मचारी खुले आसमान के नीचे शव की सिलाई कर रहे थे। शव बिना कपड़ों के स्ट्रेचर पर पड़ा था। यह सिलसिला करीब आधे घंटे तक चलता रहा।
जब कर्मचारियों से इसको लेकर सवाल पूछा गया तो जवाब मिला कि शव लावारिस है, इसका किसी से कोई लेना-देना नहीं है।
क्या कहता है नियम
नियम बिल्कुल साफ है। पोस्टमार्टम कक्ष के अंदर ही पीएम और शव की सिलाई होनी चाहिए। यह प्रक्रिया डॉक्टरों की निगरानी में होती है। इससे बाहर शव की सिलाई करने की कोई जानकारी नहीं है। मृतक के देह के सम्मान से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार प्राकृतिक आपदा, महामारी या सामूहिक दुर्घटना जैसी स्थिति में मॉर्चुरी की जगह न हो तो खुले में पोस्टमार्टम हो सकता है। वहीं, ऐसे में भी गोपनीयता, वैज्ञानिक प्रक्रिया और शव की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। हमीदिया में ऐसी कोई असाधारण स्थिति नहीं थी।
अधीक्षक ने क्या कहा
हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक सुनीत टंडन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम हाउस में ही पीएम करने का नियम है। मॉर्चुरी के बाहर शव की सिलाई करने की कोई जानकारी नहीं है। ऐसा हुआ है तो कार्रवाई होगी।
यह पहली बार नहीं
यह घटना कोई अकेली नहीं है। इससे पहले भी देश में ऐसी शर्मनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
29 मई 2017 को मध्यप्रदेश के गाडरवारा में एक सरकारी अस्पताल में 14 साल की किशोरी का पोस्टमार्टम खुले आसमान के नीचे किया गया था। जांच में स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही पाई थी।
26 सितंबर 2018 को राजस्थान के बाड़मेर में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम हाउस न होने की वजह से दो महिलाओं के शव का पोस्टमार्टम सड़क किनारे खुले में किया गया था। उसमें भी जांच के आदेश दिए गए थे।
सवाल जो उठते हैं
आधे घंटे तक बिना कपड़ों के शव खुले में पड़ा रहा। क्या एक मृत इंसान की गरिमा इतनी भी नहीं कि उसे इज्जत से ढककर रखा जाए? लावारिस होना इंसान की गरिमा को खत्म नहीं कर देता।
यह घटना सिर्फ एक अस्पताल की लापरवाही नहीं है। यह उस पूरे तंत्र पर सवाल है जो मृत देह की गरिमा को लेकर भी संवेदनहीन हो गया है।
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