सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत पर एमपी हाईकोर्ट सख्त, पूरे प्रदेश के हर जिले के स्कूलों की रिपोर्ट तलब

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की खराब हालत अब हाईकोर्ट की निगरानी में आ गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

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Neel Tiwari
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News in Short

  • एमपी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एमपी स्कूल शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया है।
  • सरकारी और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित सभी स्कूलों की जानकारी मांगी गई है।
  • सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है।
  • मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को होगी।
  • स्वतः संज्ञान लेने के 7 माह बाद हुई मामले की सुनवाई।

News in Detail

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर में गुरुवार 5 मार्च को प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच ने की।

अदालत ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। साथ ही राज्य सरकार को इस संबंध में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है।

राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस

अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार को अपने स्वामित्व वाले और उनके द्वारा चलाए जा रहे सभी सरकारी स्कूलों की मौजूदा स्थिति की जानकारी हलफनामे के जरिए पेश करनी होगी। इस हलफनामे में स्कूलों की स्थिति (मध्य प्रदेश सरकारी स्कूल) से संबंधित आवश्यक जानकारी शामिल करने को कहा गया है।

स्कूलों की जानकारी भी मांगी

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि केवल शिक्षा विभाग के स्कूल ही नहीं बल्कि स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों की स्थिति की जानकारी भी प्रस्तुत की जाए।

इसमें नगर निगम, नगर पालिका और अन्य स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा संचालित स्कूल शामिल हैं। इन सभी संस्थाओं के अंतर्गत आने वाले स्कूलों की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा भी हलफनामे में देना होगा।

जबलपुर संभाग के स्कूलों की रिपोर्ट के बाद मामला सामने आया

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में जबलपुर के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद यह मामला चर्चा में आया। इसके बाद ही कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया था जिसकी सुनवाई 7 माह बाद हो पाई। अब कोर्ट ने पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति को भी इसके दायरे में शामिल कर लिया है।

जबलपुर संभाग के 8 जिलों में हजारों सरकारी स्कूल

स्कूल शिक्षा विभाग के जॉइंट डायरेक्टर कार्यालय में पहुंची रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर संभाग के 8 जिलों में कुल 15 हजार 639 सरकारी प्राइमरी, माध्यमिक, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों की स्थिति का आकलन किए जाने पर कई भवनों की हालत खराब पाई गई थी।

6 सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है। हलफनामे में प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित सरकारी स्कूलों और स्थानीय निकायों के स्कूलों की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की जानी है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल 2026 की तारीख निर्धारित की है।

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