इंदौर कमिश्नर के बंगले से कम्प्यूटर और गोपनीय डीवीआर गायब, कौन ले गया इन्हें?

इंदौर कमिश्नर (संभाग आयुक्त) रहे आईएएस माल सिंह भयडिया का तबादला हो गया है। उन्होंने बंगला खाली कर दिया है। अब नए कमिश्नर दीपक सिंह यहां शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं।

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Pratibha ranaa
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IAS Malsingh Bhaydia
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संजय गुप्ता, INDORE. इंदौर में एक रोचक मामला सामने आया है। यहां कमिश्नर बंगले से कम्प्यूटर का सीपीयू और सीसीटीवी का डीवीआर गायब हो गया है। अब ये कौन ले गया? यही बड़ा सवाल है। इसे लेकर पूर्व और वर्तमान कमिश्नर के अलग-अलग बयान आए हैं। 

दरअसल, इंदौर कमिश्नर (संभाग आयुक्त) रहे आईएएस माल सिंह भयडिया का तबादला हो गया है। उन्होंने बंगला खाली कर दिया है। अब नए कमिश्नर दीपक सिंह यहां शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी आवभगत में जुटे कर्मचारियों ने जब सामान का मिलान किया तो कुछ सामान गायब मिला। इन्हीं में कम्प्यूटर का सीपीयू और डीवीआर थे। सीपीयू और सीसीटीवी के डीवीआर में कई गोपनीय कंटेंट होने की बात सामने आ रही है।

'द सूत्र' ने इस मामले में पड़ताल की। पढ़िए ये खास रिपोर्ट...

आईएएस मालसिंह भयडिया ( IAS Malsingh Bhaydia ) इंदौर में संभागायुक्त पद पर थे, लेकिन हरदा ब्लास्ट की जांट रिपोर्ट में उन पर सवाल उठे तो सरकार ने मार्च में उनका तबादला कर दिया। उन्होंने 10 दिन पहले बंगला खाली किया है। बंगला खाली होने के बाद अधिकारियों ने मौके पर सामग्री का मिलान किया तो कम्प्यूटर का सीपीयू गायब था। मौके पर दर्जनभर सीसीटीवी तो मिले, लेकिन डीवीआर नहीं था। आपको बता दें कि सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग डीवीआर में ही सेव होती है।  

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दोनों सामग्री क्यों हैं गोपनीय

दोनों ही सामग्री गोपनीय हैं। कम्प्यूटर के सीपीयू में कई फाइल रहती हैं। कई तरह के गोपनीय पत्र और दूसरा महत्वपूर्ण डाटा होता है। ऐसे में यह किसी के भी हाथ लगना गोपनीयता के लिए खतरा है। क्योंकि इसमें पूरी मेमोरी रहती है। वहीं इसी तरह डीवीआर का मामला है। संभागायुक्त बंगले में हर जगह यह कैमरे लगे हैं और इसमें हर आने-जाने वाले की रिकॉर्डिंग रहती है। ऐसे में बंगले में कौन आ रहा है और कौन जा रहा है, यह पता किया जा सकता है। यह भी गोपनीयता के लिए खतरा है, क्योंकि संभागायुक्त पद पूरे संभाग का प्रशासनिक मुखिया होता है और वहां कई लोगों का आना-जाना लगा होता है। 

आखिर किसे है फायदा यह दोनों गायब होने से

  • यह गायब होने से किसे फायदा है। मैदानी स्टाफ का कहना है कि संभागायुक्त साहब सामग्री अपने साथ ले गए हैं। मामले को कागजों पर नहीं लाकर दबाया जा रहा है। मालसिंह इसे अपने साथ ले गए तो क्यों ले गए? ऐसी क्या गोपनीयता थी, जो वे यहां छोड़कर या फॉर्मेट करके नहीं छोड़ सकते थे? 

    - स्टाफ को इससे क्या फायदा है? क्या किसी ने इन दोनों को निकालकर बाजार में बेच दिया। यह दोनों ही जांच का विषय है, लेकिन मामला हाईप्रोफाइल होने से चलते कागज पर ही नहीं लिया जा रहा है और दबाया गया है।

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बंगला खाली कराने के लिए भी लिखे गए पत्र

संभागायुक्त पद से मालसिंह का ट्रांसफर एमडी मप्र खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड पद पर मार्च में ही चुका था, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने बंगाल खाली करने में लंबा समय लिया। नए संभागायुक्त दीपक सिंह के दफ्तर से उन्हें दो बार इसके लिए उपायुक्त जानकी यादव के जरिए पत्र भेजे गए। इसमें लिखा गया कि आईएएस दीपक सिंह ने ग्वालियर का बंगला खाली कर दिया है और उन्होंने इंदौर सामान शिफ्ट कर लिया है। लिहाजा, बंगला खाली किया जाए। 

क्या बोले मालसिंह

मालसिंह से 'द सूत्र' ने इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि बंगला खाली कर दिया है। मैंने सभी सामान का मिलान कराया था। मुझे नहीं पता कि सीपीयू या डीवीआर क्या गायब है और कहां गया है। उधर इस मामले में संभागायुक्त चुप हैं, क्योंकि मामला बराबर के अधिकारियों का है, इसलिए इसे कागज पर नहीं लिया जा रहा है। 

हरदा ब्लास्ट को लेकर विवादों में आए थे मालसिंह

मालसिंह भयड़िया हरदा ब्लास्ट के बाद विवादों में आए थे। प्रमोटी आईएएस मालसिंह के नर्मदापुरम संभागायुक्त रहते समय फैक्ट्री मालिक को कलेक्टर के आदेश के खिलाफ स्टे मिला था, जिससे फैक्ट्री उसकी संचालित होती रही। इसके बाद जांच रिपोर्ट सबमिट होने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने उनका इंदौर से तबादला कर दिया।

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