IAS नेहा मारव्या बोलीं- कमरे से बाहर निकालिए इनको, अफसर बोले- हम नहीं निकलेंगे
समझें क्या है पूरा मामला...
- ‘बाहर निकालिए’ पर महिला अफसरों का पलटवार
- बैठक में बहस, अफसरों ने कहा- नहीं निकलेंगे
- 40-50 साल पुराने रिकॉर्ड का हिसाब तलब
- अधिकारियों ने पेन डाउन हड़ताल की
- सोमवार को मुख्य सचिव से मुलाकात लगभग तय
‘कमरे से बाहर निकालिए इनको’ से शुरू हुआ घमासान
जनजातीय क्षेत्रीय विकास परियोजना (TADP) की संचालक IAS नेहा मारव्या की कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। विवाद उस वक्त और बढ़ गया, जब बैठक में IAS अधिकारी ने कथित तौर पर कहा- ‘यह महिला दिन में 10 बार फाइल भेजती है, इसे बाहर निकालिए।’
मौके पर मौजूद दो अपर संचालक रैंक की महिला अधिकारियों ने भी जवाब दे दिया। उनका कहना था- ‘हम नहीं निकलेंगे। यह सरकारी ऑफिस है, हम क्यों निकलें बाहर... आपने ही बुलाया है। आपने ही दो बार टाइम दिया था- एक बजे और चार बजे।’
यहीं से बैठक का माहौल गरमा गया। बताया जा रहा है कि उस समय अन्य अधिकारी भी मौजूद थे और महिला अधिकारियों तथा IAS नेहा मारव्या के बीच तीखी बहस हुई।
2017 की योजना में 2.40 लाख महिलाओं का मामला
विवाद 2017 से चल रही एक योजना की समीक्षा के दौरान हुआ। अधिकारियों के मुताबिक बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय की करीब 2.40 लाख महिलाओं को योजना के तहत हर महीने 1500 रुपए की डीबीटी की जाती है।
एक अपर संचालक ने आरोप लगाया कि अगस्त की करीब 30 करोड़ रुपए की राशि अभी तक हितग्राहियों के खातों में नहीं पहुंची। उनका कहना था कि भुगतान प्रक्रिया से सीधे जुड़े नहीं होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदार ठहराकर नोटिस और इंक्रीमेंट रोकने जैसी कार्रवाई की गई।
इसी दौरान कथित तौर पर फाइलों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की गई। अधिकारियों ने कहा कि जिम्मेदारी जिस अधिकारी की है, जवाबदेही भी उसी की तय होनी चाहिए।
‘50 साल का हिसाब’ मांगने से मचा हड़कंप
IAS नेहा मारव्या ने सरकारी योजनाओं के पुराने रिकॉर्ड को लेकर भी अधिकारियों से जवाब तलब किया है। अधिकारियों के मुताबिक योजना शुरू होने से अब तक केंद्र सरकार से मिली राशि और उससे हुए कामों की पूरी जानकारी मांगी गई है।
कई अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी 40 से 50 साल पुराने रिकॉर्ड को लेकर बताई जा रही है। आरोप है कि पुरानी योजनाओं से जुड़े दस्तावेज और खर्च का ब्योरा बेहद कम समय में उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इतने पुराने रिकॉर्ड अलग-अलग शाखाओं और एजेंसियों में हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत जुटाना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है।
तीन घंटे में रिकॉर्ड देने का दबाव?
अधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में करीब 450 काम चल रहे हैं। इनके तकनीकी रिकॉर्ड, माप पुस्तिकाएं और अन्य दस्तावेज संबंधित एजेंसियों के पास रहते हैं।
इसके बावजूद कई मामलों में कुछ घंटों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इससे नियमित काम प्रभावित होता है और देरी होने पर नोटशीट में प्रतिकूल टिप्पणी या कार्रवाई की आशंका रहती है।
चाय के बिल से सैलरी अप्रूवल तक विवाद
अधिकारियों के मुताबिक IAS नेहा मारव्या और अधीनस्थ अफसरों के बीच मतभेद का यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में डिप्टी डायरेक्टर स्टोर इंचार्ज से चाय के बिल को लेकर सवाल किए जाने की बात भी सामने आई थी। कथित तौर पर पूछा गया कि चाय कितने लोगों ने पी, बिल का अप्रूवल किस आधार पर हुआ और कोटेशन कहां है।
सैलरी अप्रूवल को लेकर भी विवाद की बात कही जा रही है। अधिकारियों के अनुसार कथित तौर पर पूछा गया कि ‘सैलरी किसकी निकालना है, किसकी नहीं, इसका अप्रूवल मुझसे लेना जरूरी है।’
अधिकारियों ने खोला मोर्चा
विवाद बढ़ने के बाद शुक्रवार को अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन पर उतर आए। उन्होंने नारेबाजी की और पेन डाउन हड़ताल कर कामकाज से दूरी बनाई।
इसी बीच विभागीय राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष संजय वाष्णेय ने कहा कि संघ ने पूरे मामले को लेकर मुख्य सचिव से मुलाकात के लिए पत्र लिखा है। उनका कहना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की बेइज्जती नहीं होनी चाहिए।
वाष्णेय ने कहा कि कोई भी काम अधिकारी और कर्मचारी के आपसी सामंजस्य से ही बेहतर तरीके से संभव होता है। किसी बड़े या छोटे अधिकारी को किसी को भी अपमानित करने का अधिकार नहीं है। अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित बेइज्जती के मामले पर अब विराम लगना चाहिए।
राजपत्रित अधिकारी संघ भी आया सामने
विभागीय राजपत्रित अधिकारी संघ ने भी मुख्य सचिव को पत्र भेजकर संचालक की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई है। संघ ने अधिकारियों-कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप काम करने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया है।
संघ अध्यक्ष संजय वाष्णेय के मुताबिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मान के साथ काम करने का माहौल मिलना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी स्तर पर आपसी सामंजस्य बिगड़ने से विभागीय कामकाज प्रभावित होता है।
सोमवार को मुख्य सचिव से मुलाकात लगभग तय
अधिकारियों का कहना है कि मामले की शिकायत पहले भी की जा चुकी है। शुक्रवार को मुख्य सचिव से मिलने का समय मांगा गया था, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
अब संघ पदाधिकारियों की सोमवार को मुख्य सचिव से मुलाकात होना लगभग तय बताया जा रहा है। संघ इस मुलाकात में अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायतें तथा कथित अपमानजनक व्यवहार का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगा।
फिलहाल विवाद का दूसरा पक्ष भी सामने आना बाकी है। IAS नेहा मराव्या की ओर से लगाए गए आरोपों और अधिकारियों के दावों पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
IAS नेहा मारव्या ने रिसीव नहीं किया कॉल
द सूत्र की ओर से आईएएस नेहा मारव्या से पूरे मामले में उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। शुक्रवार रात 9:30 बजे उनके मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया। हालांकि उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया और न ही कॉल का जवाब दिया। उनकी ओर से इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
क्या सख्त प्रशासन या अफसरों के सम्मान की सीमा पार?
मामला अब सिर्फ एक बैठक की बहस नहीं रह गया है। एक तरफ अधिकारी कार्यशैली और कथित व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ योजनाओं और पुराने रिकॉर्ड की जवाबदेही तय करने की कोशिश हो रही है।
अब सबकी नजर सोमवार को मुख्य सचिव के साथ होने वाली प्रस्तावित मुलाकात और उसके बाद सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसले पर है।
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