MP बिजली कंपनी में करंट चार्ज का खेल! पुराने विवाद के बाद भी नहीं बदली व्यवस्था, इंजीनियरों में घमासान
Ramanand Tiwari | Aug 14, 2026, 21:48 IST
बिजली कंपनी में करंट चार्ज पर घमासान
मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में प्रमोशन और करंट चार्ज को लेकर इंजीनियर लामबंद हैं। यूनियनों ने कंपनी पर अपने लोगों को भलाई करने और बोर्ड के आरक्षित पदों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- बिजली कंपनी में प्रमोशन प्रक्रिया पर विवाद बढ़ा।
- 57 अधिकारियों में 21 को ही प्रमोशन मिला।
- पांच साल चार्ज वाले अधिकारियों पर सवाल उठे।
- 38 खाली पदों पर पात्र इंजीनियर बाहर रहे।
- यूनियन ने करंट चार्ज व्यवस्था का विरोध किया।
मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की भर्राशाही को लेकर इंजीनियर लामबंद हैं। कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों का आरोप है कि कंपनी अपने नुमाइंदों को भलाई कर रही है। जबकि बोर्ड से आए कर्मचारियों के लिए आरक्षित पदों की अनदेखी की जा रही है। प्रमोशन में 57 अधिकारियों में सिर्फ 21 को मौका मिलने और करंट चार्ज की व्यवस्था पर उठे सवालों ने कंपनी की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रमोशन सिस्टम पर सीधे सवाल
संबंधित कर्मचारी संगठनों का दावा है कि कई अधिकारी पांच साल से ज्यादा समय तक करंट चार्ज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे। अब प्रमोशन के वक्त अनुभव को ही बाधा बताया जा रहा है।
सवाल उठ रहा है कि जिस अनुभव के आधार पर वर्षों तक अधिकारियों से काम लिया गया, वही अनुभव पदोन्नति के समय अचानक कम कैसे पड़ गया?
2011 के आरक्षित पदों पर टकराव
यूनियनों का दावा है कि 9 जून 2011 के गजट नोटिफिकेशन में पद और वेतन से जुड़ी व्यवस्था स्पष्ट की गई थी। इसी आधार पर संगठन अब पुराने नियमों को सामने रखकर जवाब मांग रहे हैं।
50 एई को डीजीएम का चार्ज देने पर सवाल
आरोप यह भी है कि पहले ऐसे अधिकारियों को करंट चार्ज दिया गया, जिनके पास संबंधित पद का नियमित वेतनमान नहीं था। यही बिंदु अब नियमों की निष्पक्षता पर सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
38 पद खाली, फिर पात्रों को इंतजार क्यों?
नियमों की हो रही अनदेखी
पदोन्नति व्यवस्था का पालन होना चाहिए
आरक्षित पदों की व्यवस्था पर आपत्ति
कंपनी पर दोहरे रवैये का आरोप
फिलहाल इंजीनियर संगठनों का आक्रोश बढ़ रहा है। वे प्रमोशन, करंट चार्ज और आरक्षित पदों की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
सीएमडी से जवाब लेने की कोशिश
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