एमपी में आदिवासी भूमि को लेकर बड़ा खुलासा, इन आईएएस अफसरों की मंजूरी से हो गया खेल!

मध्य प्रदेश में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें आदिवासियों की लाखों रुपए की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई। खुलासा गुरुवार को विधानसभा में हुआ, जब कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने इस बारे में सवाल किया था।

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Sourabh Bhatnagar
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भोपाल: कांग्रेस विधायक बाला बच्चन के सवाल के जवाब में मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने एमपी विधानसभा में इसकी जानकारी दी। जानिए, इस पूरे घटनाक्रम में क्या हुआ और कौन से अधिकारी शामिल थे।

क्या है मामला?

बताया गया कि मध्य प्रदेश के 9 आईएएस अफसरों ने आदिवासियों की करीब 1500 एकड़ जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी थी। इनमें से इंदौर जिले में लगभग 500 एकड़ जमीन को गैर आदिवासियों को बेचे जाने की अनुमति दी गई।

खास बात यह है कि इन अनुमतियों को इंदौर में कलेक्टर रहे 6 आईएएस अफसरों ने दी थी। इनमें से 28 मामलों में कलेक्टर ने सीधे अनुमति दी, जबकि 72 मामलों में अपर कलेक्टर ने अनुमति दी।

 आंकड़ों पर एक नजर:

  • खंडवा जिले में 2009 से 2023 तक सबसे ज्यादा, लगभग 288.631 हैक्टेयर जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई।

  • बड़वानी में 4, खरगौन में 11 और धार में 143 प्रकरणों में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी गई।

  • इन मामलों में किन कलेक्टरों ने अनुमति दी, यह जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है।

कौन-कौन से अधिकारियों ने दी अनुमति?

  • राकेश श्रीवास्तव (9.94 हैक्टेयर)

  • राघवेंद्र सिंह (2.25 हैक्टेयर)

  • पी नरहरि (6.20 हैक्टेयर)

  • IAS अधिकारी इलैया राजा टी. (1 हैक्टेयर)

  • आईएएस निशांत वरवड़े (2.5 हैक्टेयर)

  • आनंद शर्मा (1.25 हैक्टेयर)

  • रवींद्र सिंह (1.92 हैक्टेयर)

  • आशुतोष अवस्थी (192 हैक्टेयर)

  • जेपी आइरिन (4 हैक्टेयर)

मंत्री का बयान:

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने विधानसभा में बताया कि इन 9 आईएएस अफसरों के द्वारा दी गई अनुमति से आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों के पास पहुंच गई। उन्होंने यह भी बताया कि जिन कलेक्टरों ने इन अनुमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए, उनके नाम नहीं दिए गए हैं, जो सवालों के घेरे में हैं।

क्यों हो रहा है विरोध?

इस मामले को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया है। उनका कहना है कि आदिवासी समुदाय की जमीन को इस तरह गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति देना, उनकी पहचान और अधिकारों के खिलाफ है। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने इसे आदिवासियों के साथ अन्याय बताया और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

आगे क्या होगा?

इस मामले में अब विधानसभा में चर्चा तेज़ हो गई है और जनता की उम्मीद है कि सरकार इस पर कड़ी कार्रवाई करेगी। आदिवासियों के हक में फैसला लेने की मांग जोर पकड़ रही है। इस मामले के राजनीतिक और सामाजिक असर भी बड़े हो सकते हैं।

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