विधानसभा में खुलासा: सरकारी जमीन पर आनंदपुर ट्रस्ट का कब्जा, राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश विधानसभा में आनंदपुर ट्रस्ट के जमीन अतिक्रमण का खुलासा हुआ है। राजस्व मंत्री ने स्वीकार किया कि ट्रस्ट ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है। साथ ही सिंगरौली में अडानी कोल ब्लॉक मुआवजे पर भी भारी हंगामा हुआ है।

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Aman Vaishnav
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विधानसभा बजट सत्र के नौवें दिन (गुरुवार) एमपी राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि अशोकनगर जिले में आनंदपुर ट्रस्ट के पास 5 हजार 200 एकड़ से ज्यादा जमीन है।

मंत्री ने यह भी माना कि इस जमीन में कुछ हिस्से पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। यह जानकारी विधायक हरिबाबू राय के सवाल के जवाब में दी गई।

सरकारी जमीन पर कब्जा

मंत्री वर्मा ने बताया कि अशोकनगर के ग्राम बांसाखेड़ी में 0.618 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर ट्रस्ट ने कब्जा किया है। साथ ही आनंदपुर वन खंड ईसागढ़ क्षेत्र की 3.52 हेक्टेयर जमीन पर भी ट्रस्ट ने कब्जा किया है। कुल मिलाकर करीब 10 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है।

ट्रस्ट के नाम 1948 हेक्टेयर जमीन दर्ज

आनंदपुर ट्रस्ट के नाम पर ईसागढ़ तहसील के 11 गांवों में लगभग 4811 एकड़ (1948 हेक्टेयर) जमीन दर्ज है। इनमें आनंदपुर, नैथाई, दयालपुर, जमडेरा, शांतपुर, कुलवार, सकर्य, गोपालपुर, ईसागढ़, बहेरिया और आकलोन गांव शामिल हैं। इसके अलावा अशोकनगर तहसील के बांसाखेड़ी, पवारगढ़ और कस्बे में भी 157.77 हेक्टेयर जमीन ट्रस्ट के नाम है।

सबसे ज्यादा जमीन आनंदपुर, दयालपुर, शांतपुर, गोपालपुर और जमडेरा में स्थित है। विधायक ने सरकार से यह भी पूछा है कि ट्रस्ट ने आदिवासी लोगों से कितनी जमीन खरीदी है। इस सवाल का भी सरकार ने लिखित जवाब दिया है।

ट्रस्ट पहले भी विवादों में रहा

कुछ समय पहले भी आनंदपुर ट्रस्ट विवादों में घिर गया था। उस समय ट्रस्ट पर यौन शोषण के आरोप लगे थे। इसके अलावा सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला भी सामने आया है। इससे मामला और भी गंभीर हो गया है। इसी पर विधानसभा में सवाल उठाया गया है।

धिरौली में अडानी कोल ब्लॉक का उठा मुद्दा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली में अडानी के कोल ब्लॉक का मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया था कि इस परियोजना के लिए 8 गांवों की जमीन ली जा रही है। कलेक्टर की सूची के मुताबिक, 12 हजार 998 परिवार इससे प्रभावित हो रहे हैं।

नहीं मिला मुआवजा

सिंघार ने आरोप लगाया कि जिन आदिवासी परिवारों को नुकसान हुआ है उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला है। वहीं कुछ बाहरी लोगों को पैसे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15 लाख 94 हजार 990 रुपए का मुआवजा दिया गया है।

साथ ही यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह को 14 लाख 42 हजार 482 रुपए मुआवजा दिया गया है। सिंघार ने इस मामले की जांच विधानसभा समिति से कराने की मांग की है।

हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित

कांग्रेस विधायक जांच समिति बनाने की मांग को लेकर अड़े रहे हैं। अध्यक्ष के आश्वासन के बावजूद वे संतुष्ट नहीं हुए और विरोध जारी रखा। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया था। हंगामे के कारण दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।

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