हौसलों के आगे झुका सूरज और मप्र की बिटिया बन गईं आईएएस रुचिका चौहान
The Sootr | Dec 20, 2024, 11:21 IST
IAS Ruchika Chauhan
देश के दिल में बसने वालीं रुचिका चौहान मूलत: मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी और मालवा की मिट्टी इंदौर में की।
रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
कांटों पे चलके मिलेंगे साये बहार के
सूरज देख रुक गया है, तेरे आगे झुक गया है
देश के दिल में बसने वालीं रुचिका चौहान मूलत: मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी और मालवा की मिट्टी इंदौर में की। 12वीं तक गणित स्ट्रीम में पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंजीनियर बनने का सपना देखा और इसे पूरा करने में खुद को पूरी तरह झोंक दिया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और वे श्रीगोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) इंदौर में दाखिला मिल गया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकॉम इंजीनियरिंग में बीई किया। विज्ञान के प्रति उनकी ललक का ही परिणाम था कि वे बीई में फर्स्ट डिवीजन से पास हुईं, लेकिन यह उनकी मंजिल नहीं थी, महज एक पड़ाव था।
...और पाई पहली मंजिल
IAS Ruchika Chauhan.
आईएएस रुचिका चौहान का सपना सिविल सर्विस में जाने का था। बीई करने के बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी शुरू की। कांटों भरे सफर पर चलते हुए उन्होंने 2010 में यूपीएससी की परीक्षा दी और आईपीएस के लिए चुनी गईं। उन्हें अपनी पहली मंजिल मिल चुकी थी, लेकिन उनके सपनों का सूरज यहां थमने वाला नहीं था। वे आईएएस बनना चाहती थीं। ऐसे में भला वे कैसे रुकतीं।
आईपीएस बनने के बाद भी रुचिका ने पढ़ाई जारी रखी। वे आईएएस बनने तक रुकना नहीं चाहती थीं। साल था 2011 और मध्यप्रदेश से यूपीएससी में शामिल होने वालों की संख्या कम न थी। रुचिका भी परीक्षा में शामिल हुईं और उनके सपनों को मानो पंख लग गए। इस बार परीक्षा में उन्हें 50वीं रैंक मिली। इसी के साथ वे मध्यप्रदेश कैडर में 2011 बैच की आईएएस बन गईं। खास यह रहा कि रुचिका इस साल मध्यप्रदेश से आईएएस बनीं इकलौती प्रतिभागी भी बनीं।
करियर
आईएएस बनने के बाद 29 अगस्त 2011 से मैसूर में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई। 10 मई 2012 तक उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद सीहोर में पहली पोस्टिंग बतौर असिस्टेंट कलेक्टर (जूनियर स्कैल) में हुई। 10 मई 2012 से 13 अगस्त 2013 तक उन्होंने राजधानी भोपाल से लगे सीहोर जिले को समझा। इसके बाद वे महाकौशल की माटी की ओर चल पड़ीं। सरकार ने उन्हें छिंदवाड़ा में एसडीओ (जूनियर स्कैल) की जिम्मेदारी देकर 13 अगस्त 2013 से उन्हें तैनात कर दिया। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के गढ़ में उन्होंने विकास के नए रास्ते ढूंढ़े, किसानों के लिए खासा काम किया। 25 सितंबर 2014 तक उन्होंने कई योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया।
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