मालवा-निमाड़ की 8 सीटों की 64 विधानसभा में कहां से बीजेपी-कांग्रेस का पलड़ा भारी

धार की तरह खरगोन भी आदिवासी सीट है, यहां भी कांग्रेस का होल्ड है। अभी कांग्रेस के पास यहां 5 विधानसभा सीट है और BJP के पास 3 सीट है। 2019 के दौरान BJP का यहां विधासनभा में 6 कांग्रेस और बडवानी की एक सीट BJP व भगवानपुरा की एक सीट निर्दलीय के पास थी।

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Pratibha ranaa
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मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय, जीतू पटवारी

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संजय गुप्ता, INDORE. मालवा-निमाड़ की आठ लोकसभा सीटों ( lok sabha election 2024 ) में विधासनभा की 64 सीट शामिल है। साल 2019 के चुनाव में स्कोर था बीजेपी 8, कांग्रेस 0 यानी क्लीन स्वीप। चुनाव के चौथे चरण में अब इन 8 सीटों पर नामांकन 18 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं और वोटिंग 13 मई को। इन सीटों पर देखते हैं बीजेपी और कांग्रेस का कितना पलड़ा भारी रहता है।

कांग्रेस के केवल 4 विधायक धार, खरगोन में दिला सके लीड

8 लोकसभा सीट इंदौर, देवास, उज्जैन, धार, मंदसौर, रतलाम-धाबुआ, खरगोन और खंडवा की बात करें तो यहां की 64 में से केवल 4 विधानसभा सीट पर ही सिटिंग कांग्रेस विधायक पार्टी को 2019 लोकसभा चुनाव में लीड दिला सके थे। 

-    इसमें रतलाम लोकसभा की सैलाना सीट और जोबट सीट थी। यहां से कांग्रेस को झाबुआ में भी लीड मिली थी, लेकिन 2019 में यहां विधायक बीजेपी का था। यानी यहां बीजेपी विधायक का रिकार्ड खराब था। 

-    धार लोकसभा सीट पर कांग्रेस के विधायक केवल गंधवानी और कुक्षी में ही लीड दिला सके थे।

8 सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के विधानसभा पर यह है हाल

इंदौर- सभी सीट पर बीजेपी को मिली लीड 

इस लोकसभा सीट की बात करें तो अभी सभी नौ सीट बीजेपी के पास है। लेकिन साल 2019 के चुनाव में कांग्रेस के पास इंदौर एक, देपालपुर, सांवेर, राऊ होने के बाद भी सभी जगह बीजेपी ने लीड ली थी। इंदौर एक में कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला होने के बाद भी बीजेपी 1.03 लाख की लीड ले गई थी। इसी तरह कांग्रेस विधायक वाली सांवेर सीट से भी 67 हजार की लीड, कांग्रेस विधायक विशाल पटेल की देपालपुर सीट से 55 हजार की लीड बीजेपी को मिली थी। राउ जीतू पटवारी के क्षेत्र से 80 हजार की लीड बीजेपी ने ली थी। 

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धार- कांग्रेस हावी लेकिन धार, महू की लीड ही बीजेपी की जीत के लिए काफी

इस सीट पर अभी की स्थिति में बीजेपी के पास तीन विधासनभा सीट धार, महू और धरमपुरी है और कांग्रेस के पास 5 सीट गंधवानी, सरदारपुर, बदनावर, कुक्षी और मनावर है। साल 2019 में 6 सीट कांग्रेस के पास थी, लेकिन केवल गंधवानी से कांग्रेस के उमंग सिंघार कांग्रेस को 11 हजार की और कुक्षी से हनी बघेल कांग्रेस को 35 हजार की लीड दिला सके थे। बाकी 6 सीट पर बीजेपी ने लीड हासिल की थी। सबसे बड़ा वोट का गड्‌ढा कांग्रेस के लिए धार और महू सीट बनी थी, धार से बीजेपी ने 72 हजार करीब और महू से 60 हजार करीब की लीड ली थी, जो आखिर में बहुत भारी साबित हुई। 

खरगोन- यहां भी कांग्रेस हावी लेकिन लीड बीजेपी को मिली

धार की तरह खरगोन भी आदिवासी सीट है, यहां भी कांग्रेस का होल्ड है। अभी कांग्रेस के पास यहां 5 विधानसभा सीट है और बीजेपी के पास 3 सीट है। 2019 के दौरान बीजेपी का यहां विधासनभा में 6 कांग्रेस और बडवानी की एक सीट बीजेपी व भगवानपुरा की एक सीट निर्दलीय के पास थी। इसके बाद भी कांग्रेस एक भी सीट पर लीड नहीं ले सकी। सभी जगह बीजेपी ने भार लीड ली। सबसे ज्यादा खरगोन से बीजेपी को 34 हजार और बड़वानी से 45 हजार की लीड मिली थी।  

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रतलाम-झाबुआ- कांग्रेस की लीड रतलाम सिटी, ग्रामीण कर देती है खत्म

रतलाम-झाबुआ में भी इस बार मुकाबला कड़ा बताया जा रहा है। यह भी आदिवासी सीट है। यहां की झाबुआ, थांदला और जोबट सीट कांग्रेस के पास है और सैलाना बाप पार्टी के पास है। बीजेपी के पास चार सीट है। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान कांग्रेस केवल झाबुआ, सैलानी और जोबट में ही लीड ले सकी थी, लेकिन यह लीड भी बहुत कम थी, सबसे ज्यादा लीड जोबट से 18 हजार वोट की मिली थी। लेकिन बीजेपी ने रतलाम सिटी से 53 हजार और ग्रामीण से 45 हजार की लीड ले ली थी। यानि कांग्रेस को उन्ही की सीट भारी लीड नहीं दिला सकी। 

उज्जैन सीट- हर जगह कांग्रेस के लिए वोटों की खाई

इस एससी लोकसभा सीट में कांग्रेस के पास केवल महिदपुर और तराना सीट है। साल 2019 के दौरान चार विधानसभा सीट थी, इसके बाद भी एक भी सीट ऐसी नहीं थी, जहां कांग्रेस को लीड मिल सकी हो। कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा वोटों की खाई उज्जैन दक्षिण जो अभी खुद सीएम डॉ. मोहन यादव की विधानसभा है वहां से 70 हजार की मिली थी, आलोट से 50 हजार की तो कांग्रेस के पास मौजूद सीट महिदपुरह से 50 हजार, तराना से 30 हजार की लीड मिली थी। कांग्रेस किसी भी जगह पर लोकसभा में मुकाबले में ही नजर नहीं आई। 

देवास, मंदसौर, खंडवा में भी आंकड़े कांग्रेस के लिए निराश करने वाले

देवास- यहां की सभी विधानसभा सीट बीजेपी के पास ही मौजूद है। देवास भी धीरे-धीरे बीजेपी का गढ़ बनता जा रहा है। यहां की हर सीट ने 2019 चुनाव में बीजेपी को भारी लीड दिलाई थी। उस समय कांग्रेस के पास मौजूद कालापीपल, सोनकच्छ, हाटपिप्लया भी कांग्रेस को लीड नहीं दिला सके थे। 

मंदसौर- यहां भी हालत वही देवास जैसी है, जवारा, मंदसौर से लेकर जावद तक हर सीट पर बीजेपी को भारी लीड 2019 में मिली थी। अभी यहां केवल मंदसौर विधानसभा सीट ही कांग्रेस के पास है यहां भी बीजेपी ने 2019 में 46 हजार वोट की लीड ली थी।

खंडवा- यहां भी तस्वीर ऐसी ही है, बीजेपी के पास सभी विधानसभा सीट है। साल 2019 में केवल बुरहानपुर में ही बीजेपी और कांग्रेस के बीच बरबारी का मुकाबला था यहां बीजेपी को एक हजार वोट की ही लीड मिली थी लेकिन बाकी जगह बागली हो या ब़ड़वाह, खंडवा, पंधाना, नेपानगर हर सीट पर बीजेपी ने भारी लीड ली थी।

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