सीएम मोहन यादव की घोषणा से पहले इंदौर में दो प्रोजेक्ट में ऐसे दिया 4 गुना मुआवजा
Sanjay Gupta | Apr 25, 2026, 13:12 IST
indore 4x land compensation projects case
सीएम मोहन यादव की चार गुना मुआवजा नीति से पहले ही इंदौर में दो बड़े प्रोजेक्ट में किसानों को इससे अधिक मुआवजा दिया जा चुका है। खास नियमों और स्कीम के जरिए जमीन अधिग्रहण में किसानों को फायदा मिला है।
News In Short
- सीएम मोहन यादव ने चार गुना मुआवजा नीति घोषित की है।
- इंदौर में पहले ही दो प्रोजेक्ट में ज्यादा मुआवजा दिया गया है।
- ग्रीन फील्ड कॉरिडोर और वेस्टर्न रिंग रोड में बड़ा भुगतान किया गया है।
- खास नियम से जमीन की कीमत तय की गई है।
- लैंड पूल और अन्य स्कीमों से किसानों को लाभ मिला है।
News In Detail
इंदौर जिले में दो अहम प्रोजेक्ट में पहले ही इस नीति को लागू कर किसानों को चार गुना से भी अधिक मुआवजा दिया गया है।
जिले में बीते सालों में कई अहम प्रोजेक्ट के लिए 10 हजार से ज्यादा किसानों से आठ हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन ली गई है। इंदौर में मप्र में जमीन की कीमत सर्वाधिक मानी जाती है। ऐसे में यहां जमीन अधिग्रहण को लेकर हमेशा विवाद होते हैं। इसे सुलझाने के लिए इंदौर में कई अहम नियम लागू किए गए।
इन प्रोजेक्ट में दिया गया चार गुना से अधिक
इस नियम का पहली बार किया प्रयोग
इस नियम के मुताबिक, जहां जमीन ली जा रही है, वहां की गाइडलाइन से ज्यादा कीमत पर जो रजिस्ट्री हुई है, उसका 50 फीसदी रजिस्ट्री को लिया जाता है। जैसे अगर गाइडलाइन 50 लाख प्रति हेक्टेयर है और जमीन 70 से 80 लाख में बिकी है, तो वही रजिस्ट्री ली जाती है। इसमें सबसे ऊंची 50 फीसदी रजिस्ट्री को ही शामिल किया जाता है।
फिर इन रजिस्ट्री का औसत निकाला जाता है और जो कीमत आती है, उसका दोगुना मुआवजा दिया जाता है।
मान लो, अगर औसत कीमत 50 लाख की गाइडलाइन वाली जमीन का 70 लाख है, तो इसका दोगुना यानी 1 करोड़ 40 लाख मुआवजा मिलेगा। जबकि सामान्य नियम से यह सिर्फ 1 करोड़ होता।
लैंड पूलिंग स्कीम भी इंदौर में की लागू
इसमें किसान से ली जाने वाली जमीन की कीमत का उसे 20 फीसदी कैश दिया गया और 80 फीसदी मूल्य की डेवलप जमीन उस निवेश योजना में देने का प्रावधान किया गया। इसे वह किसान अपने हिसाब से बाजार में बेच सकता है। जैसे एक हेक्टेयर जमीन कीमत 1 करोड़ है तो किसान को 20 लाख नकद मिलेगा और बाकी 80 लाख की कीमत का डेवलप प्लॉट दिया गया।
इकोनॉमिक कॉरिडोर में यह स्कीम लागू की गई
इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे जैसे सड़क आदि में गई जमीन को छोड़कर। जैसे एक किसान से 1 लाख वर्गफीट जमीन ली तो इसमें 20 हजार वर्गफीट करीब सड़क आदि में जाएगी। तो बाकी बची 80 हजार वर्गफीट में से 60 फीसदी यानी 48 हजार वर्गफीट डेवलप प्लॉट मिलेगा, जिसे वह बाजार में बेच सकेगा। इसमें कैश का प्रावधान नहीं है।
सुपर कॉरिडोर में यह स्कीम लागू की गई
इंदौर में हाल के समय में बंटा 2352 करोड़ मुआवजा
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