इंदौर में बरलाई जागीर शुगर मिल पर टेक्सटाइल पार्क उलझा; किसानों की आपत्ति, हमारे पास इसके शेयर

इंदौर के बरलाई जागीर शुगर मिल पर टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन ट्रांसफर हो रही है। किसानों ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि मिल के पुराने शेयरधारकों को पहले मुआवजा दिया जाए।

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Sanjay Gupta
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News in Short

  • बरलाई शुगर मिल पर टेक्सटाइल पार्क प्रोजेक्ट लाने के लिए जमीन ट्रांसफर की जा रही है।
  • किसानों ने मिल के पुराने शेयरधारक होने का दावा करते हुए आपत्ति जताई।
  • मिल 1976 में शुरू हुई थी, 2002 में बंद हुई थी, अब टेक्सटाइल पार्क लाने का प्रस्ताव है।
  • कांग्रेस के पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल ने भी आपत्ति उठाई, मुआवजा न मिलने का आरोप।
  • प्रशासन को अब पुराने शेयरों की विधिक स्थिति और किसानों के दावे की जांच करनी होगी।

News in Detail

इंदौर के पास सांवेर तहसील की बरलाई जागीर शुगर मिल  (The Malwa S.S.K. Ltd.) पर टेक्सटाइल पार्क खोलने का प्रोजेक्ट है। इसके लिए जमीन को MPIDC को ट्रांसफर किया जा रहा है। लेकिन इसके पहले किसानों ने आपत्ति लगा दी है। इनका आरोप है कि जब मिल शुरू हुई थी तब सोसायटी ने 500-500 रुपए में इसके शेयर बेचे थे। ऐसे में हम सभी इसमें अंशधारक है और पहले हमारा हिसाब किया जाए। 

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मिल के पास करोड़ों की 33 हेक्टेयर जमीन

मिल के पास 33 हेक्टेयर जमीन है। मप्र शासन यहां पर अहिल्या टेक्सटाइल पार्क प्रोजेक्ट ला रही है। यह प्रोजेक्ट एमपीआईडीसी लेकर आएगा। इसके लिए जमीन को उद्योग विभाग से एमपीआईडीसी को शिफ्ट हो रही है। इसे लेकर प्रशासन ने दावे-आपत्ति बुलाए थे। जिसमें किसानों ने यह आपत्तियां लगा दी है। यह मिल कभी मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी शुगर मिल थी। यह 1976 में स्थापित हुई, लेकिन घाटे के कारण 2002 में बंद हो गई। 

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किसान मोर्चा ने लगाई आपत्तियां

शुगर मिल (sugar mill ) हस्तांतरण के विरोध में शेयरधारक किसान सांवेर तहसील पहुंचे। एसडीएम घनश्याम धनगर को आपत्तियां दर्ज कराई। इनकी आपत्ति है कि बिना अंशधारक किसानों के जमीन ट्रांसफर नहीं हो सकती है। संयुक्त किसान मोर्चा नेता चंदनसिंह, बलराम नरवलिया, रामस्वरू मंत्री, बबलू जाधव, शैलेंद्र पटेल आदि साथ थे। इनका कहना था कि पहले शेयर के बदले मुआवजा तय हो फिर जमीन हस्तांतरण की जाए। 

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कांग्रेस ने भी ली आपत्ति

वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल ने भी इसमें आपत्ति ली है। उन्होंने कहा कि कारखाना बंद होने के बाद किसी भी किसान को शेयर के बदले मुआवजा नहीं मिला। जमीन को टेक्सटाइल पार्क के नाम पर निजी को दी जाएगी। 

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शेयर की विधिक स्थिति देखना होगी

वहीं इन आपत्तियों के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। शेयर जारी करने की क्या उस समय मप्र शासन से कोई विधिवत मंजूरी हुई थी। उनकी अब वर्तमान स्थिति में क्या वैधानिकता है यह देखना होगा।

यह शेयर जमीन को लेकर था या फिर मिल संचालन को लेकर था, यह सभी सवाल देखने होंगे। इसके बाद ही इन दावे-आपत्तियों का निराकरण हो सकेगा। सिंहस्थ 2028 के तहत मप्र शासन इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द लाना चाहती है ताकि टेक्सटाइल सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश और रोजगार आ सके।

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