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News Inshort
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में शुक्रवार को उल्टी-दस्त के 12 नए मरीज मिले।
4 मरीजों को अस्पताल रेफर किया गया।
56 मरीजों का इलाज अभी भी अस्पतालों में जारी।
डिस्चार्ज मरीजों की तबीयत फिर बिगड़ रही है।
बैठक में उठा अधूरे उपचार का मुद्दा।
News In Detail
इंदौर.9 जनवरी शुक्रवार को भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त के 12 नए मरीज सामने आए हैं। इनमें से चार मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल रेफर करना पड़ा। वर्तमान में 56 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।
चिंताजनक बात यह है कि जिन मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। उनमें से कई की तबियत घर पहुंचने के बाद दोबारा बिगड़ रही है। वे फिर डिस्पेंसरी या अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ होने से पहले ही घर तो नहीं भेज दिया गया।
बैठक में भी उठा मुद्दा
मरीजों के अधूरे उपचार का मुद्दा शुक्रवार शाम संभागायुक्त कार्यालय में आयोजित बैठक में भी उठा। बैठक की अध्यक्षता एसीएस नीरज मंडलोई ने की।बैठक में सामने आया कि भले ही नए मरीजों की संख्या में कमी आ रही हो, लेकिन पुराने मरीज बार-बार बीमार होकर दोबारा इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। यह स्थिति इलाज की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े करती है।
Sootr Expert
सीएमएचओ डॉक्टर हसानी का कहना है कि क्षेत्र में कई मरीज राहत मिलते ही दवाइयों का कोर्स पूरा नहीं करते। दवा बीच में छोड़ देने के कारण उल्टी-दस्त की शिकायत दोबारा उभर रही है।डिस्पेंसरी में पहुंचने वाले करीब 80 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिन्होंने दवाइयों का पूरा कोर्स नहीं लिया, जिससे संक्रमण दोबारा सक्रिय हो रहा है।
पानी की स्थिति
8 जनवरी गुरुवार के बाद शुक्रवार रात भी भागीरथपुरा की पानी की टंकी से क्लोरीरेशन युक्त जलप्रदाय की दोबारा टेस्टिंग की गई। निगमायुक्त क्षीतिज सिंघल ने उम्मीद जताई है कि अगले दो-तीन दिनों में टंकी से नियमित जल सप्लाई शुरू की जा सकती है।
अभी और होंगे ट्रायल
निगमायुक्त क्षीतिज सिंघल के अनुसार अभी कुछ और ट्रायल किए जाएंगे। पानी सप्लाय के साथ-साथ सैंपलिंग भी जारी है। सभी पैरामीटर ठीक पाए जाने के बाद ही टंकी से नियमित पानी की सप्लाई शुरू की जाएगी।”
Sootr Alert
उल्टी-दस्त में राहत मिलने के बाद भी दवाइयों का पूरा कोर्स करना जरूरी है। अधूरा इलाज बीमारी को दोबारा गंभीर रूप दे सकता है। साथ ही संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा देता है।
निष्कर्ष
भागीरथपुरा में हालात सामान्य होने की आधिकारिक घोषणाओं के बीच बार-बार बीमार पड़ते मरीज यह साफ संकेत दे रहे हैं कि, समस्या अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। जब तक इलाज पूरा, पानी पूरी तरह सुरक्षित और निगरानी सख्त नहीं होगी, तब तक यह संकट टलने वाला नहीं है। राहात की बात ये जरूर है कि स्थति पहले बहुत कुछ सुधरी है।
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