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Indore. इंदौर में भूमाफिया से घिरी संस्था हरियाणा गृह निर्माण सहकारी संस्था के मामले में तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी को हटाया गया है। द सूत्र को मिले दस्तावेज से साफ होता है कि इसमें कारगुजारी तो सहकारिता विभाग से हुई है।
संस्था में सहकारिता विभाग से नियुक्त प्रशासक केके जमरे ने ही कलेक्टोरेट में सीमांकन का आवेदन लगाया था। यहां तक कि जमरे ने प्रशासन को पत्र लिखकर इस सीमाकंन काम में विवाद होने की आशंका जताते हुए सुरक्षा तक मांगी थी।
पहले बताते हैं मामला क्या है
हरियाणा गृह संस्था के खजराना की जमीन का सर्वे नंबर 1179 है। ये तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के 4 नवंबर 2022 के सबसे अहम आदेश के तहत विवादित श्रेणी में दर्ज है। इसमें बिना सक्षम मंजूरी के इन सर्वे नंबर में कुछ भी नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सीमांकन का आवेदन जनवरी माह में लगा था।
इस आवेदन को राजस्व निरीक्षक मनीष चतुर्वेदी व पटवारी अक्षय शांडिल्य ने तहसीलदार प्रीति भिस्से के पास पुटअप किया था। इसे तहसीलदार ने सीमांकन के लिए मंजूर किया था। इसके बाद सीमांकन 14 फरवरी को दोपहर 12.30 बजे तय किया था। इस निषेध सर्वे के सीमांकन के आदेश के चलते शिकायत हुई थी। इस पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने सख्त कार्रवाई की थी। कलेक्टर ने मंगलवार 17 फरवरी को तहसीलदार, आरआई और पटवारी तीनों को वर्तमान जगह से हटाने के आदेश दिए।
पर आवेदन तो खुद प्रशासक ने लगाया
अब इसमें सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। यह सीमांकन का आवेदन जिसे मंजूर करने में कलेक्टर ने कार्रवाई की है, वह किसी और ने नहीं बल्कि खुद संस्था के प्रशासक ने लगाया है। सहकारिता विभाग ने संस्था में बोर्ड नहीं होने के चलते केके जमरे को प्रशासक नियुक्त किया हुआ है। जमरे ने ही सीमांकन के लिए आवेदन कलेक्टोरेट में लगाया है। साथ ही प्रशासन को इस सीमांकन काम के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने तक का पत्र कलेक्टर को लिख दिया है।
इस पत्र में लिखा कि- मैं केके जमरे प्रशासक हरियाणा गृह निर्माण संस्था हूं। संस्था के सर्वे नंबर 1179 के सीमांकन के लिए हमारे जरिए विधिवत आवेदन किया गया है। इस सीमांकन के लिए 14 फरवरी तय की गई है। इस सीमांकन के दौरान कुछ लोग शांति व्यवस्था को भंग कर परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसिलए निवेदन है कि शांति से यह काम करने के लिए उचित कार्रवाई व सहायता प्रदान की जाए।
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तहसीलदार निरस्त कर चुकी थी आदेश
वहीं सर्वे नंबर के निषेध की कैटेगरी में होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद तहसीलदार ने 13 फरवरी को ही आरआई चतुर्वेदी और पटवारी अक्षय शांडिल्य को नोटिस जारी कर दिया था। इसमें साफ कहा गया यह सीमांकन के आवेदन के सर्वे नंबर तो तत्कालीन कलेक्टर के 4 नवंबर 2022 के आदेश में संलग्न है। इस तथ्य से तहसील न्यायालय को अवगत नहीं कराया गया और सीमाकंन की सूचना जारी कर दी गई थी।
यह लापरवाही है और इसके लिए मप्र सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कार्रवाई की जाए। इसके लिए तीन दिन में जवाब दें। वहीं साथ ही तहसीलदार ने इसी दिन इस सीमांकन संबंधी आवेदन को निरस्त कर दिया है। इसमें आदेश लिखा कि यह सर्वे नंबर हरियाणा गृह सोसायटी का है। इसमें बिना सक्षम मंजूरी के कुछ भी करना निषेध है। ऐसे में आवेदन को इसी स्तर पर निरस्त किया जाता है।
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तहसीलदार को निरस्त करने का आदेश
सहकारिता पर कार्रवाई क्यों नहीं
अब सवाल उठता है कि जब यह सर्वे नंबर निषेध की कैटेगरी में था। इसकी जानकारी सहकारिता विभाग को ही सबसे ज्यादा होगी। कारण है कि मामला पूरी तरह से सहकारिता विभाग से जुड़ा है, फिर उन्होंने सीमांकन के लिए आवेदन किया ही क्यों? संस्था के प्रशासक जो सहकारिता विभाग से होकर शासकीय अधिकारी है उन्होंने आवेदन किया था। साथ ही कलेक्टर को पत्र लिखकर इस काम के लिए सुरक्षा और मदद भी मांगी। खुद कहा भी कि इस काम में विवाद की स्थिति बन सकती है, तो फिर यह आवेदन उन्होेंने किसी सक्षम मंजूरी से किया।
जमरे क्या बोल रहे
जमरे का कहना है कि जमीन पर कब्जे हो रहे हैं। संस्था के सदस्य चिंतित थे और शिकायत की थी। इसलिए जमीन की नपती जरूरी थी। इसका जमीन की खरीदी बिक्री से लेना देना नहीं है। वैसे भी जमीन सरकारी नहीं हुई संस्था के नाम पर है।
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