इंदौर के होलकर कॉलेज में इंटर्नशिप घोटाला, सवालों के घेरे में कॉलेज प्रबंधन
News in Short
- इंदौर के होलकर कॉलेज में इंटर्नशिप के नाम पर घोटाले के आरोप।
- छात्रों ने फीस के निजी खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी दी।
- सौरभ शर्मा को "इन्फ्लूक्स" कंपनी का MD बनाए जाने पर सवाल।
- अवनीश व्यास पर सरकारी पद का उल्लंघन करने के आरोप।
- छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर घोटाले को दबाने का आरोप लगाया, निष्पक्ष जांच की मांग।
News in Detail
मध्यप्रदेश के इंदौर के होलकर कॉलेज में इंटर्नशिप के नाम पर घोटाले के आरोप सामने आए हैं। छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि इंटर्नशिप के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। छात्रों का कहना है कि कॉलेज ने "इन्फ्लूक्स" कंपनी से MOU साइन किया था। इसके बाद छात्रों से फीस ली गई, लेकिन यह रकम कॉलेज के आधिकारिक खातों में नहीं, बल्कि निजी खातों में ट्रांसफर की गई।
सौरभ शर्मा को MD बनाने पर सवाल
सौरभ शर्मा, जो होलकर कॉलेज से तीन बार फेल हो चुका था, को "इन्फ्लूक्स" कंपनी का MD बना दिया गया। यह कदम छात्रों और कॉलेज के लिए चौंकाने वाला था। सौरभ ने न तो कॉलेज में अच्छा प्रदर्शन किया था, न ही उसे औपचारिक चयनित किया गया था।
अवनीश व्यास पर आरोप
डेवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के प्लेसमेंट अधिकारी अवनीश व्यास पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि अवनीश व्यास सरकारी पद पर रहते हुए एक निजी कंपनी को संचालित कर रहे हैं, जो नियमों का उल्लंघन करता है। इस पर छात्रों ने उन्हें हितों के टकराव का आरोपी ठहराया है।
इंटर्नशिप फीस का घोटाला
इंटर्नशिप के नाम पर छात्रों से जो फीस ली गई, वह कॉलेज के आधिकारिक खाता में नहीं जमा हुई, बल्कि निजी खातों में ट्रांसफर की गई। छात्रों ने इसके स्क्रीन शॉट्स भी उपलब्ध कराए हैं, जो इस घोटाले को और भी गंभीर बनाते हैं। इस गड़बड़ी के चलते कॉलेज की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
सर्टिफिकेट में गड़बड़ी
इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को "इन्फ्लूक्स" कंपनी की ओर से सर्टिफिकेट दिए गए, लेकिन आरोप है कि इन सर्टिफिकेट्स में गड़बड़ी की गई। कुछ छात्रों ने ऐसे सर्टिफिकेट्स दिखाए, जो किसी और कंपनी के नाम से जारी किए गए थे, जो इस मामले को और संदिग्ध बनाता है।
कॉलेज प्रबंधन और जांच की मांग
जब इस मामले पर कॉलेज प्रबंधन से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो प्रिंसिपल अनामिका जैन से संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद, छात्रों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है, ताकि घोटाले के सभी पहलुओं का खुलासा किया जा सके।
सौरभ शर्मा ने दी सफाई
सौरभ शर्मा ने इस मामले पर अपनी सफाई दी और कहा कि पहले भी शिकायत की गई थी। लेकिन जांच में कुछ नहीं निकला। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि फर्स्ट ईयर के छात्रों को अभी तक सर्टिफिकेट नहीं मिले हैं, जबकि थर्ड सेमेस्टर के छात्रों को सर्टिफिकेट दिए गए हैं।
कार्रवाई की उम्मीद
इस मामले में छात्रों का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया और वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। कॉलेज के अकाउंट सेक्शन से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यदि जांच होती है, तो यह इंदौर के शिक्षा तंत्र से जुड़ा एक बड़ा खुलासा साबित हो सकता है।
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