खेतों में गेहूं उगाए, सिस्टम में जीरो, मध्यप्रदेश में सरकार के सैटेलाइट ने लाखों किसानों को झूठा ठहराया

Ravi Kant Dixit | Apr 23, 2026, 14:09 IST
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mp wheat rocurement satellite survey issue farmers crisis
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मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी के बीच किसानों पर बड़ी मुसीबत टूट पड़ी है। सैटेलाइट सर्वे की तकनीकी गलती से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। प्रशासन का दावा है कि खेतों में गेहूं की फसल बोई ही नहीं गई।

"मैं सीमांत किसान हूं… अपनी जमीन पर गेहूं बोया था। दिन-रात मेहनत की, फसल काटी। अब बेचने की बारी आई तो कहा जा रहा है कि हमने गेहूं बोया ही नहीं।" यह कोई कहानी नहीं, यह बैतूल के किसान केके पांडे की हकीकत है।

अपनी ही जमीन, अपनी ही फसल और अपने ही हक को साबित करने के लिए वह परेशान हो रहे हैं। सैटेलाइट की तस्वीर कह रही है कि उनके खेत में गेहूं नहीं था और इसी एक लाइन ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

केके पांडे बताते हैं कि हमने हर नियम का पालन किया था। समय पर पंजीयन भी कराया था। स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया पूरी की। फिर अपनी तारीख का इंतजार किया, लेकिन जब फसल बेचने की बारी आई तो प्रशासन ने कह दिया कि रिकॉर्ड में आपकी फसल नहीं है। इसलिए खरीदी नहीं होगी।

यानी खेत में गेहूं उगा, किसान ने काटा, घर लाए और कागज में सब शून्य हो गया। यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं है। अकेले बैतूल जिले में ऐसे हजारों किसान हैं।

प्रदेश में तो परेशान किसानों की संख्या लाखों में है। किसान सरकारी सिस्टम के बुने जाल में फंसे हुए हैं। कहीं उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

तकनीक का खेल, किसान पर भारी

दरअसल, इस बार मध्यप्रदेश में मोहन सरकार ने गेहूं खरीदी में सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया है। इसका मकसद गड़बड़ी रोकना था, लेकिन यही तकनीक अब किसानों के लिए मुसीबत बन गई है।

किसानों ने समय पर गेहूं बोया। फसल तैयार हुई और उन्होंने कटाई भी कर ली। कटाई के बाद खेत खाली हो गया। कई जगह नरवाई जलाई गई। कई किसानों ने अगली फसल के लिए खेत तैयार कर लिया। कुछ ने गर्मी के सीजन वाली मूंग की बोवनी भी कर दी।

अब सैटेलाइट जब ऊपर से फोटो ले रहा है तो उसे खेत में गेहूं दिखाई ही नहीं दे रहा है। यहीं से पूरी गड़बड़ी हो रही है। सिस्टम कह रहा है कि सैटेलाइट में गेहूं नहीं दिख रहा है, मतलब आपने गेहूं बोया ही नहीं था।

यानी जिसने समय पर खेती की, वही अब सजा भुगत रहा है। बैतूल जिले की समस्या समझने और उसके ​समाधान के लिए द सूत्र ने कलेक्टर डॉ.सौरभ सोनवणे से संपर्क किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

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MSP खरीदी: कागजों में सफलता, जमीन पर फेल

मध्यप्रदेश में इस साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। सरकार का दावा है कि 21 अप्रैल 2026 तक 1 लाख 88 हजार किसानों से 81 लाख 76 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा गया है, लेकिन हकीकत इससे उलट है।

प्रदेश में 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। यानी लाखों किसान अब भी इंतजार में हैं और समय तेजी से खत्म हो रहा है।

सैटेलाइट और सर्वर: तकनीक बनी किसानों की दुश्मन

भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत कहते हैं कि प्रदेशभर से शिकायतें आ रही हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसानों की मदद के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी तय ही नहीं है। सैटेलाइट सर्वे में गड़बड़ी है।

सर्वर बार-बार डाउन हो रहा है और विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। वहीं कृषि विभाग कहता है कि यह राजस्व विभाग का काम है। राजस्व विभाग कहता है कि डेटा कृषि को भेज दिया है। इस सरकारी पिंग-पोंग में किसान पिस रहा है।

धूत का आरोप है कि इस लापरवाही का सीधा असर यह हुआ कि किसान अपनी उपज औने-पौने दामों में बाजार में बेचने को मजबूर हो गया है।

अब किसान संघ की मांग है कि वेरिफिकेशन के लिए सैटेलाइट सर्वे को निरस्त करके सरकार पटवारी की गिरदावरी रिपोर्ट को ही मान्य करे, ताकि किसानों को राहत मिले।

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मेहनत हमारी, मजाक सिस्टम का

बरेली के युवा किसान शिव लोधी कहते हैं, खेतों में फसल थी। पटवारी और सर्वेयर पुष्टि कर चुके हैं, लेकिन सैटेलाइट में फसल नहीं दिख रही है। इसलिए किसान फसल नहीं बेच पा रहा है।

यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं है, यह किसानों के सम्मान पर सीधा हमला है। किसान साल भर मेहनत करता है, कर्ज लेता है, जोखिम उठाता है, तब जाकर फसल तैयार होती है, लेकिन जब बेचने का समय आता है तो सरकार की व्यवस्था ही सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।

किसानों की 5 बड़ी परेशानियां

1. पंजीयन ज्यादा, खरीदी कम

लाखों किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी है। किसान लाइन में खड़े हैं नंबर नहीं आ रहा है।

2. स्लॉट बुकिंग ठप

स्लॉट के बिना फसल नहीं बिक सकती लेकिन स्लॉट ही नहीं मिल रहे हैं। तकनीकी दिक्कतें अलग से परेशान कर रही हैं।

3. MSP का फायदा नहीं

सरकार ने 2625 रुपए प्रति क्विंटल MSP तय किया है, लेकिन मजबूरी में किसान दो हजार से 2400 रुपए में गेहूं बेच रहा है।

4. चना खरीदी में सख्ती

चना में थोड़ी सी मिलावट पर पूरी फसल रिजेक्ट हो रही है। किसानों के लिए यह नियम आर्थिक सजा बन गया है।

5. समय कम, चिंता ज्यादा

खरीदी की आखिरी तारीख 05 मई है, लेकिन जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उसमें सभी किसानों की फसल बिकना मुश्किल है।

विपक्ष का हमला: किसानों के पेट पर लात

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले पर सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि जिस किसान से सरकार का पेट भरता है, आज उसी के पेट पर लात मारी जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी की तारीख बार-बार बदली गई। दो हेक्टेयर से ज्यादा जमीन वाले किसानों से खरीदी रोकी गई। सर्वर ठप रहने से चार हजार 500 करोड़ का गेहूं सस्ते में बिक गया है। बारदाने की कमी और अव्यवस्था के कारण खरीदी प्रभावित हुई है।

सीएम बोले- किसानों के साथ खड़ी है सरकार

वहीं समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी को लेकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का कहना है कि, वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है।

पहले छोटे किसानों से, फिर मध्यम और बाद में बड़े किसानों से गेहूं खरीदेंगे। केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के लिए 78 लाख टन का कोटा निर्धारित किया है। प्रदेश में गेहूं का उत्पादन इस वर्ष बढ़ा है। ऐसे में राज्य सरकार ने इस कोटे को बढ़ाने के लिए केंद्र से अनुरोध किया है।

कमिश्नर बोले- सुलझा ली गई है दिक्कत, स्लॉट भी बढ़ाए हैं

'द सूत्र' ने इस मामले में खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त कर्मवीर शर्मा से बात की। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट इमेजरी से जुड़ी तकनीकी चीजें सुलझा ली गई हैं।

प्रदेश के सभी कलेक्टर्स से कहा गया था कि जहां सैटेलाइट से जुड़ी दिक्कत हो, वहां भौतिक सत्यापन कराएं, जहां उन्होंने वैरिफाई करके दे दिया तो हमने भी उसे स्वीकार करते हुए दुरुस्त किया है। अब किसानों को कहीं परेशानी नहीं आ रही है।

किसानों की सुविधा को देखते हुए हमने स्लॉट बुकिंग भी बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन प्रति सेंटर कर दी है। किसान बंधु स्लॉट बुक करके सुविधाजनक रूप से अपनी फसल खरीदी केंद्र पर तुलवा सकते हैं।

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