इंदौर में जमीन कब्जे के लिए IAS तरुण भटनागर की कोर्ट का फर्जी आदेश, वकील और कंपनी घिरी
Sanjay Gupta | Aug 25, 2026, 12:12 IST
indore ias Tarun Bhatnagar court fake order land case
इंदौर में एक सीनियर आईएएस की कोर्ट का ही फर्जी आदेश बन गया है। यह आदेश न केवल बना बल्कि हाईकोर्ट में भी पुटअप भी हुआ और तहसीलदार को देकर जमीन पर कब्जे का प्रयास भी हो गया। इसके लिए कलेक्ट्रेट में दल भी बन गया।
इंदौर में जमीन कब्जाने के लिए 2012 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी और अपर आयुक्त तरुण भटनागर की कोर्ट का फर्जी आदेश तैयार कर दिया गया।
यह मामला तब सामने आया, जब रविवार को हाईकोर्ट में हुई अर्जेंट सुनवाई के दौरान यह आदेश पेश किया गया।
आदेश सामने आते ही संभागायुक्त कार्यालय में हड़कंप मच गया। जांच में यह आदेश फर्जी पाया गया। अब इस मामले में कई बड़े लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
यह मामला हाईप्रोफाइल पुष्परतन रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अंकित जैन की कंपनी और राजीव अग्निहोत्री की जमीन से जुड़ा है। खजराना की इस जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच सौदे का विवाद चल रहा है। अग्निहोत्री ने यह जमीन पुष्परतन कंपनी को बेचने का सौदा किया था, लेकिन मामला अब मध्यस्थ कोर्ट में पहुंच चुका है।
इस जमीन पर लक्ष्मीबाई नाम की महिला झोपड़ी बनाकर रह रही है। यह जमीन खजराना के सर्वे नंबर 388/2/14 में आती है, जिसका क्षेत्रफल करीब 5 हजार वर्गफीट (0.047) है। फिलहाल पुष्परतन कंपनी को मुंबई का एक ग्रुप संभाल रहा है।
इस झोपड़ी को हटाने के लिए पुष्परतन रियलिटी ने साल 2023 में तहसीलदार कोर्ट में केस लगाया था। लेकिन जमीन का मामला पहले से मध्यस्थ कोर्ट में चल रहा था, इसलिए तहसीलदार कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद साल 2024 में एसडीओ जूनी इंदौर की अपील कोर्ट ने भी कंपनी की याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद कंपनी ने अपर आयुक्त तरुण भटनागर की कोर्ट में अपील की। यहां 20 अप्रैल 2026 का एक आदेश सामने आया, जिसे अब फर्जी बताया जा रहा है। इस आदेश में तहसीलदार और एसडीएम घनश्याम धनगर की कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए पुष्परतन कंपनी को जमीन का कब्जा देने की बात कही गई थी। आदेश में लिखा था कि लक्ष्मीबाई के पास जमीन से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं हैं, इसलिए उनका कब्जा मान्य नहीं है और झोपड़ी हटाई जाए।
इस मामले में एक वकील की भूमिका सामने आ रही है। आरोप है कि अधिवक्ता आशीष अग्रवाल ने यह आदेश तैयार कराया। साथ ही निवेदन किया कि वह केवल कलेक्टोरेट से अधिकारियों को फॉलो कर लें, ताकि अपर आयुक्त के आदेश का पालन हो जाए।
इसके बाद अधिकारियों से संपर्क किया गया। 20 अगस्त को तहसीलदार जूनी इंदौर ने जमीन का कब्जा दिलाने के लिए एक दल भी बना दिया। लेकिन रविवार को एमपी हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जब यह फर्जी आदेश सामने आया तो पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित अधिवक्ता से पूछा कि यह आदेश उन्हें कहां से मिला। जांच में सामने आया कि यह सत्यापित कॉपी आशीष अग्रवाल की ओर से दी गई थी। अब इस मामले में आशीष अग्रवाल की तलाश की जा रही है। प्रशासन की ओर से जल्द कानूनी कार्रवाई (Indore News) की बात कही जा रही है।
संभागायुक्त आईएएस भास्कर लक्षकार ने कहा कि शुरुआती जांच में यह आदेश फर्जी पाया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में अपील की सुनवाई अभी चल रही है। प्रशासन की ओर से जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
उधर रविवार को हाईकोर्ट में हुई अर्जेंट सुनवाई में एक और अहम बात सामने आई। कोर्ट ने पुराने आदेशों को देखते हुए कहा कि चौकीदार को जमीन पर कब्जे का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि यह विवाद दो जमीन मालिकों के बीच का है, ऐसे में चौकीदार को कब्जे का हक नहीं मिल सकता। इसके बाद हाईकोर्ट ने लक्ष्मीबाई की याचिका खारिज कर दी।
क्या बोले
इस मामले में आईएएस तरुण भटनागर ने द सूत्र को बताया कि यह केस अभी उनकी कोर्ट में चल रहा है। उन्होंने कहा कि सामने आया आदेश फर्जी है। प्रशासन से इस संबंध में रिपोर्ट मिली है। इसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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यह मामला तब सामने आया, जब रविवार को हाईकोर्ट में हुई अर्जेंट सुनवाई के दौरान यह आदेश पेश किया गया।
आदेश सामने आते ही संभागायुक्त कार्यालय में हड़कंप मच गया। जांच में यह आदेश फर्जी पाया गया। अब इस मामले में कई बड़े लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
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इस जमीन को लेकर है विवाद
इस जमीन पर लक्ष्मीबाई नाम की महिला झोपड़ी बनाकर रह रही है। यह जमीन खजराना के सर्वे नंबर 388/2/14 में आती है, जिसका क्षेत्रफल करीब 5 हजार वर्गफीट (0.047) है। फिलहाल पुष्परतन कंपनी को मुंबई का एक ग्रुप संभाल रहा है।
कैसे बना फर्जी आदेश
इसके बाद कंपनी ने अपर आयुक्त तरुण भटनागर की कोर्ट में अपील की। यहां 20 अप्रैल 2026 का एक आदेश सामने आया, जिसे अब फर्जी बताया जा रहा है। इस आदेश में तहसीलदार और एसडीएम घनश्याम धनगर की कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए पुष्परतन कंपनी को जमीन का कब्जा देने की बात कही गई थी। आदेश में लिखा था कि लक्ष्मीबाई के पास जमीन से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं हैं, इसलिए उनका कब्जा मान्य नहीं है और झोपड़ी हटाई जाए।
फिर एक अधिवक्ता ने कलेक्ट्रेट में फॉलो किया
इसके बाद अधिकारियों से संपर्क किया गया। 20 अगस्त को तहसीलदार जूनी इंदौर ने जमीन का कब्जा दिलाने के लिए एक दल भी बना दिया। लेकिन रविवार को एमपी हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जब यह फर्जी आदेश सामने आया तो पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित अधिवक्ता से पूछा कि यह आदेश उन्हें कहां से मिला। जांच में सामने आया कि यह सत्यापित कॉपी आशीष अग्रवाल की ओर से दी गई थी। अब इस मामले में आशीष अग्रवाल की तलाश की जा रही है। प्रशासन की ओर से जल्द कानूनी कार्रवाई (Indore News) की बात कही जा रही है।
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क्या बोल रहे संभागायुक्त
उधर हाईकोर्ट से कंपनी के पक्ष में फैसला
क्या बोले आईएएस तरुण भटनागर
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