इंदौर दिगंबर जैन में विवाद बढ़ा, मुनिश्री आदित्यसागर महाराज बोले- अध्यक्ष बताएं किसे गीदड़ बोला
समझें क्या है पूरा मामला
- आनंद गोधा ने गुना में आचार्य सुधासागर जी महाराज के सामने शेर-गीदड़ वाली टिप्पणी की थी।
- इस बयान के बाद समाज के कई लोगों ने आपत्ति जताई है।
- मुनिश्री 108 आदित्यसागर जी महाराज ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त की है।
- उन्होंने पूछा कि गीदड़ किसे कहा गया, इसका जवाब दिया जाए।
- गोधा पहले ही कह चुके हैं कि उन्होंने समाज को गीदड़ नहीं कहा है।
इंदौर दिगंबर जैन समाज में विवाद बढ़ा
दिगंबर जैन सामाजिक संसद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष आनंद गोधा की आचार्य सुधासागर जी महाराज के सामने गुना में की गई कई विवादित टिप्पणी चर्चा में हैं। इसमें जैन महाराज सुधासागर को शेर और बाकी को गीदड़ बताने जैसी टिप्पणी की गई थी।
साथ ही समाज में भी कई लोगों द्वारा दुकान चलाने व अन्य कई बातें बोली गईं। इसे लेकर अब इंदौर में श्रुत संवेगी महाश्रमण श्री 108 आदित्यसागर मुनिराज ने अध्यक्ष गोधा को जमकर नसीहत दी है।
क्या बोले मुनिश्री आदित्यसागर?
मुनिश्री 108 आदित्यसागर जी महाराज ने कहा कि बोलने वाले के पास विवेक होना चाहिए। समाज के अध्यक्ष के पास ज्यादा विवेक होना चाहिए। वह जब पैदा नहीं हुए थे, तब सर सेठ हुकमचंद जी ने इंदौर को सींचा था। वह यह नहीं बोल सकते हैं कि इंदौर को किसी ने कुछ नहीं दिया।
समाज के दस लोग समाज को नहीं चलाते हैं। यदि किसी को लगता है कि वह सर्वेसर्वा है तो चुनाव करा लें, दूध का दूध हो जाएगा। चुनाव भी उन्हें पुराने अध्यक्ष ने ही जितवाया था। अध्यक्षजी ने किसे गीदड़ बोला वह बताएं, किसी साधु को बोला या समाज के वरिष्ठ लोगों को बोला।
उन्होंने आगे कहा कि मैं इंदौर कई बार आया हूं, लेकिन कभी किसी अध्यक्ष ने ऐसा वक्तव्य नहीं दिया है। योग्य व्यक्ति यदि गद्दी पर नहीं आएगा तो काम बिगड़ जाएगा। शब्द ही बताता है कि कितनी गहराई है। जिसके पास वक्तव्य कला नहीं हो, उसे गद्दी पर नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि उनके कारण पूरा समुदाय बदनाम होता है।
आनंद गोधा ने यह बोला था
आचार्य सुधासागर जी महाराज के सामने गोधा ने कहा था कि आप जैसा शेर आ जाएगा तो सारे गीदड़ भाग जाएंगे और गुरुदेव, हम उन्हें भगाना चाहते हैं क्योंकि समाज में कुछ करना चाहते हैं।
समाज के लोग चाहते हैं युवा पीछे हों और उनकी दुकान फिर चालू हो। दुकान हमने मुश्किल से अपनों को सुपुर्द की है। आपको मंदिर के बैनर पर नहीं, पूरे इंदौर के बैनर पर हम ला रहे हैं। यह पूरे इंदौर के बैनर पर चातुर्मास होगा।
समाज में इस बात पर है नाराजगी
समाज में इस बात को लेकर नाराजगी है कि हमारा समाज अहिंसा को लेकर जाना जाता है। वहीं गोधा आचार्य और समाज की तुलना शेर व गीदड़ जैसे जानवरों से कर रहे हैं।
आचार्य को शेर कह रहे हैं और समाजजन को गीदड़ बताने पर आपत्ति है। साथ ही समाज के मामले में दुकान जैसे शब्दों के उपयोग से भी नाराजगी है।
गोधा बोले थे, मैंने गलत नहीं कहा, वह शेर ही हैं
वहीं इस विवाद पर द सूत्र ने गोधा से बात की। उन्होंने साफ कहा कि आचार्य जी तो खुद को शेर कहते हैं, हमने भी वही कहा। हां, वह शेर हैं। इसमें हमने कुछ गलत नहीं कहा।
वह शेर ही हैं और समाज में शेर की आवश्यकता है। समाज को गीदड़ नहीं कहा है। समाज एकजुट है। विपक्ष के जो लोग होते हैं, वह कुछ भी बोल सकते हैं। कहें, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। वह शेरू गुरु हैं और शेर ही हैं, यह बात पक्की है।
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