एयर इंडिया ने लंदन से लौटी छात्रा से की गलत वसूली, कोर्ट ने लगा दिया हर्जाना
Ashish Bhardwaj | Jun 10, 2026, 12:39 IST
Photograph: (The sootr)
लंदन से लौटी राजस्थान के जयपुर की छात्रा लावण्या से एयर इंडिया ने महाराजा स्कॉलर स्कीम के बावजूद 34000 बैगेज शुल्क वसूला। एयर इंडिया ने गलती मानकर भी रिफंड नहीं दिया। राज्य उपभोक्ता अदालत ने 40000 हर्जाना देने के आदेश दिए हें।
समझें क्या है पूरा मामला
- एयर इंडिया ने लावण्या मेगन से 34,000 रुपए अतिरिक्त बैगेज शुल्क वसूला।
- लावण्या महाराजा स्कॉलर स्कीम के तहत छूट की हकदार थीं।
- कंपनी ने गलती मानी, लेकिन पैसे वापस नहीं किए।
- उपभोक्ता अदालत ने एयर इंडिया को हर्जाना सहित राशि लौटाने का आदेश दिया।
- राज्य उपभोक्ता अदालत ने हर्जाने की रकम बढ़ाकर कुल 40,000 रुपए कर दी।
लावण्या ने कंपनी को पत्र लिख कर इस बात की पूर्ण जानकारी दी। इस पर कंपनी ने गलती तो मान ली लेकिन पैसे नहीं लौटाए। राजस्थान राज्य उपभोक्ता अदालत ने एयर इंडिया को शुल्क वापस करने के साथ हर्जाना सहित 40000 रुपए देने के आदेश दिए हैं।
क्या है महाराजा स्कॉलर स्कीम
लावण्या के मुताबिक एयर इंडिया ने तकनीकी आधार पर छूट देने से मना कर दिया। कंपनी ने 34000 रुपए बैगेज शुल्क वसूल लिया।
गलती मानी, फिर भी पैसे नहीं लौटाए
आखिरकार लावण्या ने जिला उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कराई। जिला अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया। एयर इंडिया को वसूली गई राशि वापस करने के साथ 3000 रुपए मानसिक पीड़ा और 3000 रुपए मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया गया। जिला अदालत के मुआवजे से असंतुष्ट होकर लावण्या ने राज्य उपभोक्ता अदालत में अपील की। अपील स्वीकार की गई।
अदालत ने क्या कहा
FAQ
- महाराजा स्कॉलर स्कीम क्या है?
यह एयर इंडिया की एक योजना है जो विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय विद्यार्थियों को अतिरिक्त बैगेज पर छूट देती है। इस स्कीम के तहत पात्र छात्र यात्रा के दौरान तय सीमा से अधिक सामान बिना अतिरिक्त शुल्क के ले जा सकते हैं। - लावण्या मेगन को अदालत ने कितना मुआवजा दिलाया?
राजस्थान राज्य उपभोक्ता अदालत ने एयर इंडिया को वसूले गए 34000 रुपए बैगेज शुल्क वापस करने के साथ 40000 रुपए अतिरिक्त हर्जाना देने के आदेश दिए। इसमें मानसिक पीड़ा और मुकदमा खर्च शामिल है। - उपभोक्ता अदालत में शिकायत कैसे करें?
अगर किसी सेवा में खामी हो और कंपनी समाधान न करे तो उपभोक्ता जिला उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज करा सकता है। जिला अदालत के फैसले से असंतुष्ट होने पर राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की जा सकती है।
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