इंदौर में किन्नर विवाद में पंढरीनाथ टीआई लाइन अटैच, समय पर चालान तक नहीं दे सके

Sanjay Gupta | Feb 09, 2026, 18:59 IST
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इंदौर के पंढरीनाथ थाना प्रभारी अजय राजोरिया को किन्नर विवाद में लापरवाही के कारण लाइन अटैच किया गया। आरोपियों को समय पर चालान न देने के कारण जमानत मिल गई।

News in Short

  • इंदौर में किन्नरों के बीच हुआ विवाद।
  • सपना हाजी और अन्य पर गंभीर आरोप, वसूली और धमकी का केस।
  • थाना प्रभारी अजय राजोरिया ने समय पर चालान पेश नहीं किया।
  • आरोपियों को जमानत मिल गई, जिससे शिकायतें हुईं।
  • डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने थाना प्रभारी को लाइन अटैच किया।

News in Detail

इंदौर में हुए चर्चित किन्नर विवाद में अब पंढरीनाथ थाना प्रभारी पर गाज गिरी है। डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने टीआई अजय राजोरिया को लाइन अटैच करने के आदेश दे दिए हैं। गंभीर केस में टीआई समय पर चालान ही पेश नहीं कर सके जिससे आरोपियों की जमानत हो गई।



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किन्नर सपना हाजी को मिली है जमानत

इंदौर में कुछ समय पहले किन्नरों के बीच भारी विवाद हुआ था। इसमें सपना हाजी व अन्य पर वसूली, धमकी सहित गंभीर धाराओं में केस हुआ था। इसमें कुछ किन्नरों ने सपना हाजी व अन्य से परेशान होकर कमरे में बंद होकर जहरीला पदार्थ खा लिया था।



इस मामले में शिकायतों के बाद गंभीर धाराओं में केस हुआ, लेकिन इसके बाद समयसीमा में थाना प्रभारी अजय राजोरिया ने कोर्ट में चालान ही पेश नहीं किया। इसके चलते सभी की जमानत हो गई।



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जांच में टीआई की भूमिका संदिग्ध

जमानत के बाद मामले में वरिष्ठ स्तर पर शिकायतें हुई और जानबूझकर आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। इसकी जांच में प्रांरभिक तौर पर थाना प्रभारी की भूमिका उचित नहीं पाई गई।



डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने कहा कि यह केस गंभीर मामला था। इसमें थाना प्रभारी की लापरवाही पाई गई और समय पर चालान पेश नहीं हुआ। इसके चलते सपना हाजी व अन्य साथियों की जमानत हो गई। थाना प्रभारी को लाइन अटैच किया है।



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चार महीने पहले बनी थी SIT

दरअसल, किन्नर सपना गुरु और पायल गुरु के बीच विवाद नया नहीं है। 30 मई 2025 को सपना के कमरे का ताला तोड़कर उसका सामान चोरी किया गया था। इस मामले की रिपोर्ट पंढरीनाथ थाने में दर्ज की गई थी। इसके बाद जांच अधिकारी टीआई अजय नायर (इंदौर पुलिस ) ने न तो किसी का बयान लिया और न ही गंभीरता दिखाई।



महज 20 दिन में प्रकरण बंद कर दिया गया। जब मामला वरिष्ठ अफसरों तक पहुंचा, तब जाकर ऋषिकेश मीणा के निर्देशन में एसआईटी गठित की गई। इसमें एडिशनल डीसीपी आनंद यादव, एसीपी हेमंत चौहान और टीआई पंढरीनाथ को शामिल किया गया। मीणा और यादव के तबादले के बाद जांच ठंडी पड़ गई। न किसी का बयान लिया गया, न किसी की जवाबदेही तय की गई।



फील्ड में नहीं, फाइलों में चल रही थी जांच

एसआईटी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए वकील नायडु और सचिन सोनकर ने कहा कि चार महीने में एक भी बयान दर्ज न होना बताता है कि जांच सिर्फ कागजों में चल रही थी। अगर पुलिस सक्रिय रहती, तो आज 24 जानें खतरे में नहीं आतीं।



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किन्नर समाज के दो गुटों में चल रहा है विवाद

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से इंदौर में किन्नर समाज के दो गुटों के बीच लगातार विवाद चल रहा है, जिसकी चरम स्थिति तब देखने को मिली जब कई किन्नरों ने सामूहिक रूप से फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था। अब प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि वह इस विवाद पर जल्द विराम लगाए।





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