इंदौर में टीबी मरीज को ब्राउन शुगर तस्कर बताकर घर से उठाया, जेल में मौत, 9 पुलिसकर्मियों पर जांच शुरू

Sanjay Dhiman | Jan 22, 2026, 18:18 IST
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In Indore TB patient picked up from home by calling him a brown sugar smuggler dies in jail
Photograph: (the sootr)

इंदौर में पुलिस ने एक टीबी मरीज को बिना FIR के गिरफ्तार कर झूठे आरोप में फंसा दिया। जेल में उसकी मौत हो गई। मामले में नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच शुरू हुई है।

NEWS IN SHORT

  • इंदौर पुलिस ने बिना एफआईआर के टीबी मरीज अजय सोनी को गिरफ्तार किया।
  • अजय को अवैध रूप से ब्राउन शुगर तस्करी के आरोप में फंसाया गया।
  • परिवार का आरोप, पुलिस ने 25 हजार रुपये की अवैध वसूली की।
  • अजय की गिरफ्तारी के दिन सीसीटीवी फुटेज से झूठे आरोप का खुलासा हुआ।
  • कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया, लोकायुक्त जांच में जुटा।

NEWS IN DETAIL

इंदौर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक गंभीर रूप से बीमार युवक को ब्राउन शुगर तस्करी के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। इस युवक की जेल में मौत हो गई। मौत के बाद परिवार ने पुलिस के खिलाफ सख्त आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि युवक को बिना एफआईआर के घर से उठाया गया, अवैध वसूली की गई। बाद में एक सोची-समझी साजिश के तहत उसे झूठे एनडीपीएस केस में फंसा दिया गया।

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आरोपी युवक की गंभीर स्थिति

यह घटना 15 नवंबर 2024 की है, जब पुलिस ने अजय सोनी नामक युवक को उसके घर से जबरन उठा लिया। अजय टीबी का मरीज था और उसका वजन मात्र 30 किलो रह गया था। उसकी बहन राधिका सोनी ने 23 मई 2025 को पुलिस कमिश्नर को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में एमआईजी थाने के नौ पुलिसकर्मियों पर भारतीय दंड संहिता और एनडीपीएस एक्ट की गंभीर धाराओं के गलत इस्तेमाल के आरोप लगाए गए।

the actions of the indore police have tarnished the department s reputation
the actions of the indore police have tarnished the department s reputation


पुलिस की कार्रवाई: बिना एफआईआर के गिरफ्तारी

राधिका सोनी ने बताया कि अजय को सरकारी टीबी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर देखभाल की जा रही थी। लेकिन 15 नवंबर 2024 को एमआईजी थाने के छह पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे। इनमें प्रवीण सिंह नामक एक पुलिसकर्मी और एक युवक पोलार्ड भी था।



आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बिना एफआईआर के घर में घुसकर तलाशी ली और अजय को उठाकर ले गए। इस दौरान पुलिस को अजय की गंभीर बीमारी की जानकारी देने के बावजूद किसी तरह की मदद नहीं की। साथ ही अजय के पिता की एक्टिवा भी पुलिस अपने साथ ले ली।

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अवैध वसूली का आरोप

पुलिस पर अवैध वसूली का भी आरोप है। राधिका सोनी ने बताया कि प्रवीण सिंह ने 40 हजार रुपए की मांग की थी, उन्होंने 25 हजार रुपए देकर केवल एक्टिवा छुड़वाया। इसके बाद, पुलिस ने अजय को थाने में रखा और रात को उसे सिंगापुर बिजनेस बिल्डिंग के पीछे 9.10 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार करने का झूठी रची। पुलिस के सभी नौ कर्मचारी, जिनमें आरक्षक, प्रधान आरक्षक, चालक और सब-इंस्पेक्टर शामिल थे, इस झूठी गिरफ्तारी के गवाह बने।

इन 9 पुलिसकर्मियों पर जांच की तलवार

कोर्ट के आदेश के बाद अब एमआईजी थाने के उन पुलिसकर्मियों की लिस्ट सामने आ गई है जिन पर जांच की तलवार लटकी है। इस केस में प्रवीण सिंह (प्रधान आरक्षक), राहुल डाबर (एसआई), अजमेर सिंह करोलिया (एसआई), शिवकुमार यादव (प्रधान आरक्षक) और राहुल दिवाने (प्रधान आरक्षक) के नाम प्रमुख हैं। इनके अलावा आरक्षक चालक रविन्द्र, सैनिक कालू हार्डिया, आरक्षक सोनू पांडे और आरक्षक विपिन जाट पर भी मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं।

सेंट्रल जेल में मौत और परिवार की शिकायत

अजय को अगले दिन कोर्ट में पेश किया गया और उसे जेल भेज दिया गया। जेल में उसकी तबीयत खराब हो गई और 12 दिसंबर 2024 को उसकी मौत हो गई। परिवार को केंद्रीय जेल प्रशासन ने सूचना दी। राधिका ने सीसीटीवी फुटेज और पेनड्राइव की स्क्रीनशॉट्स अदालत में पेश किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अजय को घर से दोपहर में उठाया गया था। इधर पुलिस ने अजय की गिरफ्तारी रात को दिखाने का नाटक किया था।

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जिला न्यायालय की कार्रवाई

इस गंभीर मामले की जांच अब इंदौर जिला न्यायालय द्वारा की जा रही है। अदालत ने राधिका सोनी के बयान को लिखित रूप में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि इस तरह के मामलों में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और मंदसौर के उदाहरण भी हैं। जहां पुलिस के झूठे गिरफ्तारियों और फर्जी मामलों पर उच्च न्यायालय ने निर्देश जारी किए थे।

लोकायुक्त पुलिस की भूमिका

लोकायुक्त पुलिस ने राधिका की शिकायत पर बयान और सबूत जुटाए हैं और पूरी फाइल भोपाल भेज दी है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है।

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