इंदौर स्मार्ट सिटी और धोखाधड़ी में फंसी कंपनी तीर्थ गोपीकॉन की दोस्ती में धंसी 40 करोड़ की सड़क

Sanjay Gupta | Aug 19, 2026, 15:06 IST
इंदौर स्मार्ट सिटी और धोखाधड़ी में फंसी कंपनी तीर्थ गोपीकॉन
इंदौर स्मार्ट सिटी की गोराकुंड की 40 करोड़ की सड़क धंसने ने एक बार फिर शहर के विकास कार्यों की पोल खोल दी। परतें खुलीं तो एक बार फिर इसमें स्मार्ट सिटी कंपनी और धोखाधड़ी में फंसी तीर्थ गोपीकॉन की दोस्ती सामने आई।

इंदौर में स्मार्ट सिटी की 40 करोड़ की लागत से बनी गोराकुंड सड़क के पानी की लाइन परीक्षण में ही धंसने ने राष्ट्रीय बेइज्जती करा दी है। एक बार फिर स्मार्ट सिटी के एक हजार करोड़ के काम सवालों के घेरे में आ गए हैं। पहले ही नेहरू पार्क का नौ करोड़ का काम हो या फिर एमओजी लाइन का 454 करोड़ का जमीन सौदा, सभी विवादों में आ चुके हैं।



पांच-पांच आईएएस हैं बोर्ड में

स्मार्ट सिटी इंदौर कंपनी का गठन साल 2016 में हुआ था। केंद्र और राज्य मिलकर इसमें एक हजार करोड़ के काम करेंगे, ऐसे में सही निगरानी के लिए बोर्ड से राजनेताओं को दूर रखा गया। बोर्ड में कलेक्टर को चेयरमैन, निगमायुक्त को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया, जो आईएएस हैं।



साथ ही स्मार्ट सिटी सीईओ आईएएस हैं तो आईडीए सीईओ भी आईएएस हैं। एक अन्य आईएएस तन्वी गर्ग भी नॉमिनी डायरेक्टर हैं। कुल मिलाकर 18 जिम्मेदारों का बोर्ड है और इसमें पांच आईएएस अधिकारी हैं।



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तीर्थ गोपीकॉन ने किया काम, 32 करोड़ लिए

यह स्मार्ट सिटी की सड़क का काम 40 करोड़ का है। यह ठेका फर्जी बैंक गारंटी में फंसी गुजरात की तीर्थ गोपीकॉन कंपनी को साल 2021 में मिला था। इसमें से उसे 32 करोड़ का भुगतान भी हो चुका है। यह वही कंपनी है जिसने जल निगम के 900 करोड़ के ठेके के लिए 184 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी दी थी। उज्जैन निगम के काम में भी फर्जी बैंक गारंटी दी थी। सीबीआई ने इस पर केस किया और इसके मुख्य आरोपी महेश कुंभानी को जेल भेजा गया।



गोपीकॉन और स्मार्ट सिटी की दोस्ती

गोपीकॉन के पास केवल यही 40 करोड़ का काम नहीं था। उसके पास पानी का भी एक प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी से था। साथ ही उसने 454 करोड़ की एमओजी लाइन की 15 एकड़ जमीन का सौदा किया था, जिसे सीबीआई केस के बाद रद्द किया गया। कंपनी ने इस सौदे की एक किश्त भी नहीं दी थी। वहीं एमओजी लाइन में ही एक अन्य जमीन भी उसने 27 करोड़ में ली। इस सौदे को भी रद्द करने के लिए स्मार्ट सिटी ने अब नोटिस दिया है। कंपनी हाईकोर्ट गई है।



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इस मामले में क्या बोल रहे हैं स्मार्ट सिटी सीईओ

इस मामले में स्मार्ट सिटी सीईओ आईएएस अर्थ जैन ने बताया कि यह पूरी रोड 1.70 किमी लंबी है। इसमें 150 मीटर की रोड सीसी (सीमेंट-कंक्रीट) से नहीं बनाई गई थी क्योंकि पाइप लाइन डलनी थी। लोगों को आने-जाने में समस्या न हो, इसलिए इस हिस्से को केवल डामर का पैचवर्क कर भराव कर चालू किया था, ताकि पाइपलाइन के बाद इसे सीसी कर दिया जाए। इस हिस्से का भुगतान भी तीर्थ गोपीकॉन को नहीं किया गया है।



स्मार्ट सिटी में दिखाए लंदन वाले सपने

इस मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कहा कि हम लगातार स्मार्ट सिटी के कामों की जांच का मुद्दा उठाते रहे हैं। इस रोड पर भी निगम ने कई बार काम कराया है। एमआईसी मेंबर राजेंद्र राठौर ने स्मार्ट सिटी बोर्ड के सभी अधिकारियों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि एक हजार करोड़ का चूना लगाया गया है। अधिकारियों ने सपने दिखाए थे कि लंदन जैसी सड़क होगी, लेकिन यह हालत है कि स्मार्ट सिटी में सड़क धंस रही है। निगम खुद इस सड़क पर कई बार पैचवर्क करा चुका है। सभी एक हजार करोड़ के कामों की जांच होनी चाहिए।



क्या बोल रहे हैं धंसी सड़क पर निगमायुक्त

निगमायुक्त आईएएस क्षितिज सिंघल ने कहा कि इस सड़क की जांच कराई है, उस समय 150 मीटर सड़क का काम नहीं हो सका था। पानी की लाइन के कारण सीसी का काम नहीं हुआ था। इंटर कनेक्शन पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान यह लीकेज हुआ है। जल्द ही रोड का काम पूरा कराएंगे।



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